मुकुल के साथ कई सीनियर पुलिस अधिकारी भी थे. पर किसी ने दखल देना मुनासिब नहीं समझा. जिस इकलौते जाबांज ने मुकुल को बचाना चाहा वो अब इस दुनिया में नहीं है. एसएचओ संतोष यादव ने मुकुल को बचाने की कोशिश की, लेकिन बाग के अंदर पेड़ों पर अपनी जगह बना चुके रामवृक्ष के उपद्रवियों ने फायरिंग शुरू कर दी. संतोष यादव से सिर में गोली लगी और वो शहीद हो गए. बता दें कि पुलिस को इस बात की इजाजत नहीं थी कि वो 'ऑपरेशन जवाहर बाग' के दौरान गोली चलाएं.रामवृक्ष की अपनी कोर्ट, अपनी सजा.. खबर है कि जवाहर बाग में रामवृक्ष ने अपनी कोर्ट और बैरक बना रखी थीं. अपने बनाए नियम तोड़ने पर लोगों को सजा दी जाती थी. रामवृक्ष लोगों को खाना-पीना मुहैया कराता. उन पर शासन करता. बाग के अंदर जेल बैरक, प्रवचन केंद्र और तख्त बना रखा था. तीन-चार हथियारबंद लोगों की बटालियन बना दी गई थी, जो बाग से अंदर आने वाले अधिकारियों और आम लोगों से निपटने का काम करते. रामवृक्ष यादव खुद को सुभाष चंद्र बोस की सेना मानता था. रामवृक्ष यादव अपने फॉलोअर्स को बाहर कदम रखने की इजाजत नहीं देता था. अगर किसी को अपने किसी से मिलने जाना होता, तो इसके लिए बाकयदा परमिट लेने का नियम था. ये परमिशन भी सिर्फ एक या दो दिन के लिए मिलती. बता दें कि 2 जून को पुलिस और रामवृक्ष यादव के 'आजाद भारत विधिक वैचारिक क्रांति सत्याग्रही' नाम के बेतुकी मांगों वाले संगठन के बीच झड़प हो गई थी. एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसचएचओ संतोष यादव के शहीद होने के साथ करीब 24 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. पुलिस 3 हजार एकड़ सरकारी जमीन पर रामवृक्ष के कब्जे को हटाने के लिए गई थी. 'अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव का करीबी था रामवृक्ष' अखिलेश यादव के चाचा हैं शिवपाल यादव. रामवृक्ष यादव को शह देने का आरोप लग रहा है शिवपाल पर. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा, 'मथुरा में हुई घटना की जितनी निंदा की जाए, उतना कम है. मुलायम सिंह यादव में अगर शर्म बची है तो तुरंत शिवपाल यादव से इस्तीफा लेना चाहिए. क्योंकि दो साल पहले तक आपके अनुज शिवपाल का रामवृक्ष यादव बेहद खास था. शिवपाल सिंह ने रामवृक्ष को खुला संरक्षण दिया हुआ था.' हालांकि शिवपाल यादव ने कहा, 'अमित शाह सबूत दें या फिर इस बात के लिए माफी मांगे. '
मथुरा: SP मुकुल द्विवेदी के सिर पर पड़ा डंडा, तो मैदान छोड़ भागे पुलिसवाले
मुकुल द्विवेदी ज्योतिषी से कहते, 'जरा पंचांग देखकर बताओ, जवाहर बाग मामला मेरी जान तो नहीं लेगा'
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रामवृक्ष यादव और संघर्ष में मारे गए एसपी मुकुल द्विवेदी.
मथुरा के जवाहर बाग में 2 जून को हुई हिंसा के दौरान रामवृक्ष यादव मारा गया. यूपी के डीजीपी जावीद अहमद ने कंफर्म कर दिया है. पर एक बात जो तकलीफ दे रही है वो ये कि एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी जब जवाहर बाग में दुष्टों से मुकाबला कर रहे थे, तब उनके साथ के पुलिसवाले ही उनका साथ छोड़ गए थे. फोर्स का मतलब होता है. ONE FOR ALL, ALL FOR ONE. पर इतनी बुनियादी सीख मथुरा पुलिस नहीं समझ पाई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी जब जवाहर बाग में दाखिल हुए, तब उनके साथ काफी पुलिसवाले थे. लेकिन जब रामवृक्ष यादव के लोगों ने मुकुल द्विवेदी के सिर पर लाठियों से हमला किया, तो उनका हेलमेट गिर गिया. लोग झुंड बनाकर मुकुल द्विवेदी को घसीटकर मारने लगे. ये सब देखकर वहां मौजूद पुलिसकर्मियों की फोर्स मुकुल को छोड़कर भाग खड़ी हुई.
'ज्योतिषी जरा पंचांग देखकर बताओ, जवाहर बाग मामला मेरी जान तो नहीं लेगा' मुकुल द्विवेदी जवाहर बाग को लेकर काफी परेशान रहते थे. इस बारे में उनकी वाइफ अर्चना ने बताया. अर्चना ने कहा, 'मेरे पति को इस मामले में बलि का बकरा बनाया गया है. उनका जब से मथुरा ट्रांसफर हुआ था, वो इस बात को लेकर परेशान रहते. अक्सर ज्योतिषी से पूछते कि जरा पंचांग देखकर बताओ कि यह मामला मेरी जान तो नहीं लेगा?'
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