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किसान आंदोलन के विरोध में BJP के मंत्री बोले, अवॉर्ड लौटाने वाले देशभक्त नहीं हैं

किसानों के सपोर्ट में कई लोग अवॉर्ड वापस करने की बात कह रहे हैं.

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कमल पटेल, मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री हैं, BJP नेता हैं. किसान आंदोलन के मुद्दे पर बात की है. (फोटो- ANI)

किसान आंदोलन के सपोर्ट में कई सारे नामी लोग अपने अवॉर्ड वापस कर रहे हैं. मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल ने कहा है कि ऐसे लोग देशभक्त नहीं हैं. समाचार एजेंसी ANI से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा,

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"वो तो पहले भी अवॉर्ड वापस हुए थे. ये जितने अवॉर्डी हैं, उन्हें अवॉर्ड कैसे मिले थे? भारत माता को गाली दो, देश के टुकड़े करो, क्या उनको अवॉर्ड मिलते हैं? ये तथाकथित बुद्धिजीवी, तथाकथित अवॉर्डी, ये देश-भक्त नहीं हैं."

इसके साथ ही उन्होंने किसान संगठनों को चुनौती दी कि उनसे कृषि कानून को लेकर कोई भी सवाल किया जाए, वो संतुष्ट कर देंगे. उन्होंने कहा,

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"मैं किसान संगठन, किसी को भी खुली चुनौती दे रहा हूं. आप भी मुझसे प्रश्न करो, मैं आपको संतुष्ट करने को तैयार हूं. एक ही चीज़ बिल वापस लो, नहीं तो बात ही नहीं मानेंगे. ऐसा कोई होता है क्या? अरे लोकतंत्र में सबसे बड़ी शक्ति जनता है और जनता के चुने हुए जन-प्रतिनिधियों ने कानून पास किया संसद में. सबसे बड़ी संस्था है."

किस-किसने लौटाए अवॉर्ड?

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किसान आंदोलन के सपोर्ट में पंजाब के पूर्व सीएम और शिरोमणि अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल ने पद्म विभूषण सम्मान लौटाने को कहा है. सुखदेव सिंह ढींढसा ने भी पद्म भूषण अवॉर्ड लौटाने का ऐलान किया था. ओलिंपिक्स पदक विजेता विजेंदर सिंह ने खेल रत्न लौटाने की बात कही. इसके अलावा 7 दिसंबर को पंजाब के कई खिलाड़ियों ने अवॉर्ड लौटाने के लिए राष्ट्रपति भवन की तरफ रुख किया था, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोल्ड विनर पूर्व पहलवान करतार सिंह के नेतृत्व में ये खिलाड़ी राष्ट्रपति भवन जा रहे थे.

किसान तीन कृषि कानूनों को लेकर विरोध कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि ये कानून उनके हित में नहीं हैं. किसानों की मांग है कि सरकार कृषि कानूनों को वापस ले. सरकार का कहना है कि इसे वापस नहीं लिया जा सकता. सरकार कानूनों में कुछ संशोधन के पक्ष में तो दिख रही है, लेकिन वापसी के खिलाफ है. दोनों पक्ष अपनी-अपनी मांगों पर डटे हुए हैं. इसी आंदोलन के तहत किसानों ने 8 दिसंबर को 'भारत बंद' बुलाया है. बहुत सी विपक्षी पार्टियां इस बंद के सपोर्ट में हैं. ये बंद सरकार के साथ छठे राउंड की बातचीत के एक दिन पहले हो रहा है. छठे राउंड की बातचीत 9 दिसंबर को है. इसके पहले पांच राउंड की बातचीत हो चुकी है, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला है.

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