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Lithium बैटरी का ये धमाके वाला VIDEO देखकर आप पूछेंगे - "क्या इसी से कार-बाइक चलेगी?"

हाल में ही जम्मू-कश्मीर में लीथियम का बहुत बड़ा भंडार मिला है.

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वायरल वीडियो के स्क्रीनशॉट. (ट्विटर-@blabla112345)

लिथियम भंडारण में भारत तीसरे नंबर पर पहुंचा. लिथियम का भंडार मिला, चीन की हालत खराब कर देंगे. लिथियम का भंडार मिलने से भारत अब आत्मनिर्भर हो जाएगा.

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ये सारी खबरें तो आपने पढ़ ही ली होंगी. आज आप ये भी देख लीजिए कि लिथियम कितना खतरनाक होता है. ट्विटर पर एक वीडियो खूब चल रहा है. वीडियो में लिथियम कैसे ब्लास्ट होता है, ये दिखाया गया है. @blabla112345 नाम के ट्विटर यूज़र ने ये वीडियो शेयर किया है.

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वीडियो में क्या है?

एक पेंसिल बैटरी है. जैसी घड़ी या माउस में लगती है. उसपर नाम लिखा है "एनर्जाइज़र, अल्टीमेट लिथियम." बैटरी पर ऊपर जो मेटैलिक कवर था उसे बीच से काट देते हैं. अंदर से लिथियम की फॉइल निकाली जाती है. फिर उसे पानी से भरे कंटेनर में डाल दिया जाता है. पहले तो पानी में आग लगती है फिर उसमें ब्लास्ट हो जाता है.

लिथियम को जान लीजिए

लिथियम का एटॉमिक नंबर 3 है. इसमें 3 इलेक्ट्रॉन, 3 प्रोटॉन और 4 न्यूट्रॉन होते हैं. जिसकी वजह से इसका मास बहुत कम होता है. इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फिग्रेशन के हिसाब से समझें तो लिथियम की बाहरी सेल में एक इलेक्ट्रॉन होता है जिसे लूज करके लिथियम आयन Li+ बनता है. लिथियम आयन बैटरी Alessandro volta के बनाए सेल के कंसेप्ट पर काम करती है. लिथियम आयन शॉर्ट में बोले तो Li-ion बैटरी का जलवा कितना ज्यादा है इसका अंदाजा बस इसी बात से लग जाएगा कि 2019 में रसायन विज्ञान के क्षेत्र का नोबेल पुरस्कार जिन तीन वैज्ञानिकों को दिया गया था, उन्होंने ही इस लिथियम आयन बैटरी का अविष्कार किया. जॉन बी गुडइनफ़, एम स्टेनली व्हिटिंगम और अकीरा योशिनो, जिन्होंने दुनिया को इस रिचार्जेबल बैटरी का तोहफा दिया. अब इसके आगे कुछ कहने की जरूरत नहीं फिर भी आपकी जानकारी के लिए हम बता देते कि Li-ion बैटरी बड़ी मात्रा में करंट प्रवाहित कर सकती है. लोअर मैंटेनेंस इनकी खासियत है.

ब्लास्ट क्यों हुआ?

पानी में डालने से लिथियम में इसलिए आग लगी क्योंकि पानी के साथ मिलकर लिथियम, हाइड्रोजन गैस और लिथियम-हाइड्रॉक्साइड पैदा करता है, जो आग को बढ़ावा देने में मदद करती है. इसी वजह से ये धमाका हुआ.

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लिथियम बैटरी का इस्तेमाल

लिथियम आयन यही वो बैटरी है जो इलेक्ट्रिक स्कूटर्स से लेकर स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर कार और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन तक में इस्तेमाल होती है. 1991 में सोनी के वीडियो रिकॉर्डर में पहली बार इस्तेमाल होने से लेकर आजतक लिथियम आयन बैटरी सबकी फेवरिट बनी हुई है. टेसला ने 2008 में  Roadster के साथ बैटरी पावर वाली कार मार्केट में भी उतार दिया.

वीडियो: क्या चीन की लीथियम आयन बैटरी को टक्कर देकर भारत का KABIL टक्कर दे पाएगा?

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