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तो ट्रकों में लगेगी ब्रेक, रोजमर्रा का सामान मिलना मुश्किल होगा?

90 परसेंट ट्रक नेशनल हाईवे पर खड़े हो चुके हैं. छोटे पेट्रोल पंप और स्टेट हाईवे के टोल बूथ पुराने नोट नहीं ले रहे.

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Image: AP
ट्रांसपोर्टर, जो देश के हर स्टेट में, शहर देहातों में रोजमर्रा का सामान पहुंचाते हैं. ट्रकों में लादकर. उनके लिए मुसीबत हो गई है. पुराने नोट पेट्रोल पंप और स्टेट हाईवे के टोल बूथ पर ले नहीं रहे. कैश निकालने में रकम जो हाथ आती है वो ऊंट के मुंह में जीरा है. दरअसल बात ये है कि छोटे ट्रांसपोर्टर के छोटी दूरी वाले ट्रक पर एक दिन का खर्च आता है सात से आठ हजार रुपए. लंबी दूरी वाले ट्रकों पर एक दिन में 50 हजार रुपए खर्च होता है. बड़ा ट्रांसपोर्टर अगर 10 ट्रक चलवा रहा है तो कम से कम तीन लाख रुपए रोज चाहिए. ये बताया है दिल्ली गुड्स ट्रक ट्रांसपोर्टर एसोशिएसन के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर ने. लेकिन सिर्फ 10 हजार रुपए कैश निकालने की छूट है. अगर और छूट नहीं मिलेगी तो ट्रक खड़े करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा. इसलिए पुराने नोटों को चलाने के लिए और वक्त मांगा है. नहीं तो ट्रकों में ब्रेक लगेगा और खाने पीने से लेकर रोजमर्रा की जरूरत का सामान पहुंचना बंद हो जाएगा. 90 परसेंट ट्रक खड़े हो चुके हैं 30 लाख में से 90 परसेंट ट्रक पिछले 3-4 दिन से नेशनल हाईवे पर ही चपकर रह गए हैं. छोटे पेट्रोल पंप तो ले नहीं रहे पुराने नोट. दाल, सब्जी, ब्रेड और डेली यूज का सामान लादे ये ट्रक आगे बढ़ें तो कैसे? 1 करोड़ के आसपास चलने वाले ट्रकों में 30 लाख ट्रक शहरों के बीच में माल ढोते हैं. ये बताया है एक्सप्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चीफ ऑपरेटिंग अफसर विजय कुमार ने. कहिन कि 'ये पहल तो ठीक है लेकिन कैश के मामले में हमारी हालत खराब हो रही है.' अस्पताल, सरकारी बस, रेलवे और पेट्रोल पंप को पहले 11 तारीख तक पुराने नोट स्वीकार करना था. फिर डेट 14 हो गई.  और अब 24 हो गई है. अब इसमें कोर्स फीस भी आती है. लेकिन सारे पेटोल पंप सरकारी तो हैं नहीं. वो बात मान नहीं रहे. नोट ले नहीं रहे. चक्का जाम हो रखा है. स्टेट हाईवे पर टोल बूथ वालों के अलग नखरे हैं. वो भी पुराने नोट नहीं ले रहे.
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