पर मुगल ठहरे मुगल. 1587 में सेना झंडा लेकर घुस लिए. किले को कब्जे में ले लिया. अब यहां से शुरू हुआ सौतेला व्यवहार. मुगलों ने किले की ज्यादा 'टेक केयर' की नहीं. बनते-बिगड़ते ये किला फाइनली 1646 में तैयार हुआ. तब मुजफ्फराबाद को बसाने वाले बोम्बा रियासत के सुल्तान मजफ्फर खान का शासन था. डोगरा वंश के महाराजा गुलाब सिंह ने 1846 में किले को फिर से बनाया. डोगरा वंश की सेना ने 1926 तक किले का इस्तेमाल किया. तीन तरफ से नीलम नदी से घिरे इस किले की ऐतिहासिक इंपोर्टेंस अब भी है. हालांकि इस किले का ज्यादा ध्यान नहीं रखा जा रहा है, इसलिए स्ट्रक्चर वक्त बीतने के साथ शानदार नहीं रहा.87 साल में बनकर तैयार हुआ पाकिस्तानी लाल किला
लाल किला कहां है? दिल्ली बोलने जा रहे हैं तो रुकिए. वॉर्मिंग के दौर में ज्ञान को भी ग्लोबल कीजिए.
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फोटो - thelallantop
लाल किला कहां है? दिल्ली बोलने जा रहे हैं तो रुकिए. वॉर्मिंग के दौर में ज्ञान को भी ग्लोबल कीजिए. इंटरनेशनल पर पकड़ बनाइए. एक लाल किला, पाकिस्तान में भी है. एकदम असली वाला, ऐतिहासिक टाइप्स. वैसा नहीं, जैसा छत्तीसगढ़ में तब के गुजराती मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए तैयार करवाया गया था. बैक टू पाकिस्तान. इस्लामाबाद से 3 घंटे की दूरी पर है मुजफ्फराबाद. यहीं बना है लाल किला. चक शासकों ने इस लाल किले की नींव रखी थी. रुट्टा किला और मुजफ्फराबाद फोर्ट के नाम से भी जाना जाता है. चक शासकों को मुगलों से खतरा था. लिहाजा किले बनाने का काम 1559 में शुरू किया गया.
पर मुगल ठहरे मुगल. 1587 में सेना झंडा लेकर घुस लिए. किले को कब्जे में ले लिया. अब यहां से शुरू हुआ सौतेला व्यवहार. मुगलों ने किले की ज्यादा 'टेक केयर' की नहीं. बनते-बिगड़ते ये किला फाइनली 1646 में तैयार हुआ. तब मुजफ्फराबाद को बसाने वाले बोम्बा रियासत के सुल्तान मजफ्फर खान का शासन था. डोगरा वंश के महाराजा गुलाब सिंह ने 1846 में किले को फिर से बनाया. डोगरा वंश की सेना ने 1926 तक किले का इस्तेमाल किया. तीन तरफ से नीलम नदी से घिरे इस किले की ऐतिहासिक इंपोर्टेंस अब भी है. हालांकि इस किले का ज्यादा ध्यान नहीं रखा जा रहा है, इसलिए स्ट्रक्चर वक्त बीतने के साथ शानदार नहीं रहा.
पर मुगल ठहरे मुगल. 1587 में सेना झंडा लेकर घुस लिए. किले को कब्जे में ले लिया. अब यहां से शुरू हुआ सौतेला व्यवहार. मुगलों ने किले की ज्यादा 'टेक केयर' की नहीं. बनते-बिगड़ते ये किला फाइनली 1646 में तैयार हुआ. तब मुजफ्फराबाद को बसाने वाले बोम्बा रियासत के सुल्तान मजफ्फर खान का शासन था. डोगरा वंश के महाराजा गुलाब सिंह ने 1846 में किले को फिर से बनाया. डोगरा वंश की सेना ने 1926 तक किले का इस्तेमाल किया. तीन तरफ से नीलम नदी से घिरे इस किले की ऐतिहासिक इंपोर्टेंस अब भी है. हालांकि इस किले का ज्यादा ध्यान नहीं रखा जा रहा है, इसलिए स्ट्रक्चर वक्त बीतने के साथ शानदार नहीं रहा.Add Lallantop as a Trusted Source

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