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केरल में मिला ज़ीका वायरस का पहला केस, मंत्री ने कहा, 'अभी और केस मिलेंगे'

क्या है पूरा मामला, जानिए

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केरल से जीका वायरस से इंफेक्शन की खबर आ रही है. फिलहाल एक महिला में यह संक्रमण पाया गया है. मुख्य रूप से यह संक्रमण मच्छरों से फैलता है. फाइल तस्वीर नई दिल्ली में मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के लिए की जाने वाला फॉगिंग की है. (फोटो-पीटीआई)
कोरोना वायरस (Corona virus) से जूझ रहे देश में अब ज़ीका वायरस (Zika Virus) ने दस्तक दे दी है. केरल में 8 जुलाई को ज़ीका वायरस का पहला मामला सामने आया है. केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने बताया कि 24 साल की गर्भवती महिला इस वायरस से संक्रमित मिली है. स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक तिरुवनंतपुरम से 19 लोगों के सैंपल पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी भेजे गए हैं. रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है. इनमें से डॉक्टर्स और हेल्थ वर्कर्स समेत 13 लोगों के संक्रमित होने का शक है. कैसे पता चला? केरल के तिरुवनंतपुरम जिले के पारसलेन की रहने वाली एक महिला को बुखार, सिरदर्द और शरीर पर लाल चिकत्ते पड़ने की शिकायत हुई. उसे 28 जून को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां उसका इलाज चलता रहा. उसने 7 जुलाई को ही बच्चे को जन्म दिया है. टेस्ट हुआ. टेस्ट के बाद महिला में ज़ीका वायरस होने की पुष्टि हुई है. हालांकि, महिला की हालत अब स्थिर है. महिला की कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है. मतलब वह कहीं बाहर नहीं गई है. उसका घर तमिलनाडु बॉर्डर पर स्थित है. एक हफ्ते पहले उनकी मां में भी ऐसे ही लक्षण दिखे थे. लक्षण क्या हैं? ज़ीका वायरस मुख्य रूप से मच्छरों से फैलता है. ज़ीका वायरस से संक्रमित होने के लक्षण डेंगू जैसे ही होते हैं जैसे बुखार आना, शरीर पर चकत्ते पड़ना, आंख लाल होना और जोड़ों में दर्द. ज़ीका का इतिहास? सबसे पहले ज़ीका वायरस का पता तब चला जब अफ्रीका में वायरस रिसर्च पर काम चल रहा था. ये रिसर्च ज़ीका के जंगल में रीसस मकाक (एक तरह का लंगूर) को पिंजरे में बंद करके किया जा रहा था. बाद में रिसर्च के दौरान ही उस बंदर को बुखार आया. इसे 1952 में ज़ीका वायरस इंफेक्शन कहा गया. जहां तक बात इंसानों में ज़ीका वायरस की है तो 1952 में ही इसका पहला केस अफ्रीकी देश युगांडा में मिला. हालांकि तब इस पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया गया. अफ्रीका के बाद दक्षिण पूर्वी एशिया में इसके मामले सामने आए. हालांकि मामले काफी कम थे. इस पर असल ध्यान साल 2007 में गया, जब अफ्रीका और एशिया के कई देशों में इसके काफी केसेज मिले. और तब से लाकर अब तक कुल 86 देशों और क्षेत्रों में ज़ीका संक्रमण फैलने के प्रमाण मिल चुके हैं.

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