प्रकाश का कहना है, 'उन्हें आवाज सुनकर थोड़ा अजीब सा महसूस हुआ. एस-2 कोच में ही रेलवे की ड्रेस में मौजूद एक अफसर और टीसी को इस बारे में बताया भी था. रेलवे के अफसरों ने इसे सीरियसली नहीं लिया और सामान्य बताकर टाल दिया.' प्रकाश ने 'इंडियन एक्सप्रेस' को बताया कि जिस रेल अफसर को ये बात बताई उसका वो नाम नहीं जानते. लेकिन जब ट्रेन मध्य प्रदेश के देवास जिले को क्रॉस कर चुकी थी, तब उन्होंने उस अफसर से कॉन्टेक्ट किया था. इंदौर से ट्रेन रवाना होने के करीब डेढ़ घंटे बाद वह उज्जैन स्टेशन पर उतर गए थे.रविवार सुबह उन्हें हादसे की सूचना मिली तो लगा कि उनकी आशंका सच साबित हो गई. प्रकाश कहते हैं कि मैंने हादसे के 12 घंटे पहले चेताया था. रेलवे के अफसर उनकी बात को गंभीरता से लेते तो इस हादसे को टाला जा सकता था. हादसा कैसे हुआ, कौन इसका जिम्मेदार है. इसका अभी खुलासा नहीं हुआ है. रेलवे पूरे हादसे की अपने स्तर पर जांच करेगा, जिसके बाद हादसे की असल वजह का पता चल सकेगा. ट्रेन हादसे में S1, S2, S3 और S4 कोच हादसे में बुरी तरह डैमेज हुए हैं. जिस वजह से मौत का आंकड़ा बड़ा हो गया.
आउटडेटेड थे ट्रेन के कोच
हादसे की वजह में एक वजह ये भी हो सकती है कि इंदौर-पटना एक्सप्रेस के आईसीएफ कोच आउटडेटेड थे. इनको राजधानी और शताब्दी के मॉडर्न Linke Hoffman Busch कोच से बदला जाना है. रेलवे मिनिस्टर सुरेश प्रभु ने साल 2015-16 के बजट में प्रॉमिस किया था कि चरणबद्ध तरीके से ट्रेनों में LHB कोच को जोड़ा जाएगा. और आईसीएफ कोच को बाहर किया जाएगा. लेकिन एक साल बाद ये प्रोसेस ठप्प पड़ा है. कहा जा रहा है कि इंडस्ट्री नए कोच देने में सक्षम नहीं है. क्योंकि आईसीएफ कोच की संख्या ज्यादा है, और उस तरह से नए कोच बनने में टाइम लगेगा. नए कोच साल में जोड़े जा सकेंगे. अभी 55 हजार पुराने आईसीएफ कोच पटरी पर दौड़ रहे हैं. जबकि LHB कोच की संख्या 5 से 8 हजार तक है.ये भी पढ़ें
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