जब ट्रेन पटरी से उतरी, संतोष बाथरूम से लौट रहे थे. फोन में मैसेज चेक कर रहे थे कि अचानक ट्रेन को झटका लगा और डिब्बे पलट गए. इस हादसे से सबसे ज्यादा नुकसान S1 और S2 बोगी को हुआ है. संतोष किसी तरह इमरजेंसी विंडो से सेफली बाहर निकल गए. उनकी पीठ और गर्दन पर चोटें आई हैं. वो कहते हैं, 'अगर सीट न बदली होती तो मैं भी आज जिंदा न होता.'संतोष बताते हैं कि खिड़की से जब वो निकले, बाहर का मंजर बहुत दर्दनाक और खौफनाक था. पलटी हुई ट्रेन की बोगियां. खून से लथपथ लाशें. लोगों की चीखों से पूरा माहौल गूंज रहा था. द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, उसी हालत में उन्होंने बिहार रेलवे के CPRO विनय कुमार को फोन किया. और हादसे के बारे में बताया. उसके बाद उन्होंने कानपुर रेलवे कंट्रेल रूम में कॉल किया. मौके पर कोई सेक्योरिटी वाले नहीं पहुंचे थे. लोग एक-दूसरे की मदद कर रहे थे. बच्चे अपने पेरेंट्स को औऱ पेरेंट्स अपने बच्चों को तलाशने में लगे थे. संडे की शाम में संतोष अपने घर इलाहाबाद पहुंच चुके हैं. अपनी फैमिली के साथ हैं. पर वो हादसे को भूला नहीं पा रहे हैं. उनके मुताबिक, शरीर पर लगे घाव तो भर जाएंगे पर मैं उस दर्दनाक मंजर को भूलने के लिए क्या करूं? जिस औरत ने सीट बदली थी, वो कहां है. किस हाल में अभी इसकी जानकारी नहीं है.
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