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ये है साउथ का वो ओछा सिनेमा जिस पर हंसिका मोटवानी को गर्व है

इसकी फिल्मों ने (भी) औरतों के साथ वो किया है जिसे जानकर दम घुटने लगता है.

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राम्या कृष्णन और रंभा स्टारर ‘अलूडा माजका’ (1995) ही काफी है ज़ेहन में बहुत अधिक गुस्सा भर देने के लिए, ये औरतों का ऐसा चित्रण करती है.
'बिग बॉस - 11' में अभी क्या झगड़ा चल रहा है, ये जानकर हमारा-आपका कुछ नहीं बदलेगा, लेकिन एक इश्यू है जो अभी चर्चा में है और गौर करने लायक है.
शो में एक प्रतियोगी और एक्ट्रेस हिना ख़ान (ये रिश्ता क्या कहलाता है, ख़तरों के खिलाड़ी-8) ने कहा है, "वे (साउथ इंडियन प्रोड्यसूर) लोग यही चाहते हैं कि उनकी हीरोइन्स वजन बढ़ाएं और अपने उभरे और फूले हुए शरीर को दिखाएं. यहां तक कि मुझे भी दो बड़े प्रोडक्शन हाउस ने फिल्में ऑफर की थीं जिन्हें मैंने ठुकरा दिया क्योंकि उन्होंने मुझे भी बोला था वजन बढ़ाओ."
हिना की बात बिलकुल सही है.
बॉलीवुड में भी अभिनेत्रियों का objectification यानी वस्तुकरण होता है लेकिन साउथ की इंडस्ट्री और वहां की फिल्में तो भरपूर male dominated है. वहां की हीरोइन्स भरे बदन की/मांसल हों, गोरे रंग की हों, होठ फूले हुए लाल हों और नाक पतली हो तो ज्यादातर का करियर चलता है. इनके उलट फीचर्स वाली एक्ट्रेस को आकर्षक काम नहीं मिलता.
हंसिका मोटवानी जिन्होंने हिना के कहे पर आपत्ति ली है. हालांकि उनकी आपत्ति गैर-वाजिब है.
हंसिका मोटवानी जिन्होंने हिना के कहे पर आपत्ति ली है. हालांकि उनकी आपत्ति गैर-वाजिब है.

हिना की बात के विरोध में साउथ की इंडस्ट्री को डिफेंड करने उतरी हैं हंसिका मोटवानी. वही जिन्हें हमने 2003 में ऋतिक के साथ 'कोई मिल गया' में बच्ची के तौर पर देखा था. बड़ी होने के बाद वे साउथ में चली गईं और वहां उन्होंने आज तक जितनी भी फिल्में कीं, उनमें तकरीबन सभी में वे सजावट की वस्तु से ज्यादा कुछ नहीं रही हैं. ये बात और भी दुखद है कि उन्हें खुद की इस हकीकत का कोई अंदाजा नहीं है. हिना के कमेंट पर उनका रिस्पॉन्स कुछ ऐसा था, "वो साउथ की इंडस्ट्री को ऐसे कैसे नीचा दिखा सकती है? क्या उसको पता नहीं है कि कई बॉलीवुड एक्टर्स ने भी यहां काम किया है और काम कर रहे हैं! हमें नीचा दिखाने के लिए तुम्हे शर्म आनी चाहिए हिना ख़ान. साउथ की इंडस्ट्री की एक्ट्रेस होने के नाते मैं कहना चाहूंगी कि मैं इस पर गर्व करती हूं और वो जो भी कह रही है वो सिर्फ बकवास है."
हंसिका के अलावा साउथ की दो-तीन अन्य महिलाओं (खुशबू, श्रीदेवी श्रीधर, काजल अग्रवाल) ने भी साउथ की objectified फिल्म इंडस्ट्री की वकालत की है. लेकिन हमें इन आवाजों पर ध्यान देने के बजाय खुद टटोलना चाहिए कि आखिर तमिल, तेलुगू और अन्य दक्षिण भाषा की कमर्शियल फिल्मों में औरतों का चित्रण कैसा रखा गया है? खासकर वहां की एक्ट्रेसेज़ को जो रोल मिलते हैं वो कैसे होते हैं? इन्हें देखें तो पाते हैं कि वहां हीरोइन हमेशा हीरो के पीछे ही खड़ी होती है. या उसकी आर्म कैंडी होती है. या आइटम सॉन्ग करके मर्दों को संतुष्ट करती है. यहां तक कि जो फीमेल कैरेक्टर्स विदेश से ऊंची पढ़ाई करके आई होती हैं और जो पॉलिटिक्स, प्रशासन और अन्य क्षेत्रों में काफी कुछ कर सकती हैं, उन्हें भी हीरो 'लाइन' पर ले आता है और अंततः उन्हें पारंपरिक हाउसवाइफ बनाकर ही छोड़ता है. उसके बाद ही दर्शक थियेटर से संतुष्ट निकलते हैं.
नमूने के तौर पर 1995 में आई तेलुगू फिल्म 'अलूडा माजका' देखें जिसमें राम्या कृष्णन और रंभा के मॉडर्न किरदारों के साथ गांव का गंवार सीताराम (चिरंजीवी) फूहड़ हरकतें करता और फिल्म में उनके ट्रेडिशनल न होने के लिए उनकी बेइज्जतियां की जाती हैं. साउथ की फिल्मों के इतिहास की ये सबसे ज्यादा OBJECTIFYING फिल्म थी. हंसिका और गलतफहमी में जी रही अन्य एक्ट्रेसेज़ को सिर्फ नीचे दिया ये एक सीन ही देख लेना चाहिए. वे कहती हैं कि साउथ की इंडस्ट्री को हिना ने अपने बयान से नीचा दिखाया है, इस फिल्म ने दो महिला किरदारों को इतना नीचा दिखाया है जो घृणित है. और विडंबना देखिए कि इस फिल्म पर जब सेंसर बोर्ड दो महीने का बैन लगा रहा था तब चिरंजीवी के पुरुष फैन्स ने हंगामा कर दिया था और इसे देखते हुए कुछ सीन काटकर फिल्म को रिलीज करना पड़ा था. हालांकि बाद में भी ये फिल्म घटिया ही रही.

हमें इतना ही सोच लेना चाहिए कि क्या 60-70 बरस के फिल्मी इतिहास ने वहां से दर्जन भर विश्वस्तरीय फेमिनिस्ट फिल्में निकली हैं क्या. मैं औरतों के घटिया चित्रण वाली दस दर्जन फिल्मों के उदाहरण दे सकती हूं.
एक नजर 10 ऐसी एक्ट्रेस पर जिन्होंने या तो साउथ के फिल्म उद्योग में objectification झेला है या उन्हें वैसे ही रोल्स के मुताबिक शरीर को वजनी या भरा हुआ बनाना पड़ा है. यहां तक कि 2017 के टाइम में भी यंग एक्ट्रेसेज़ को 'सुंदरता' की कई सर्जरी करवानी पड़ी हैं, तभी सरवाइव कर पा रही हैं.
#1.  तमन्ना भाटिया साउथ की फिल्म इंडस्ट्री में 11 साल से हैं, हिंदी में उन्होंने 'हमशकल्स' और 'हिम्मतवाला' जैसी फिल्में की हैं. टॉलीवुड में उनके 'गोरे' रंग को लेकर बहुत ऑब्सेशन है. ज्यादातर काम उन्हें उनकी इसी उपयोगिता के लिए मिलता है. वहां उन्हें 'मिल्की ब्यूटी' भी बुलाया जाता है. इसके अलावा उन्हें वजन बढ़ाने को लेकर भी कहा जाता रहा. खुद तमन्ना ने इस बारे में शेयर किया थाः "जब मैंने साउथ की फिल्मों में काम करना शुरू किया था तो मुझे पहला कमेंट ये सुनने को मिला- 'थोड़ा सा वज़न बढ़ा लो'. फिर मैंने वैसा दिखने के लिए सही से खाना शुरू कर दिया. मुझे अब जाकर समझ आया है कि उनका मतलब कामुक दिखने से था."
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तमन्ना के साथ 'बाहुबली' में भी ऐसा ही हुआ. वो सांवली, फाइटर होती है पर हीरो के आने के बाद गोरी-कामुक बना दी जाती है.

#2.  ज्योतिका ने करीब 20 साल के करियर में कन्नड़, मलयालम, तेलुगू और हिंदी फिल्मों में काम किया है. सितंबर में उनकी तमिल फिल्म 'मगलिर मटटूम' रिलीज हुई. ऐसी फीमेल सेंट्रिक फिल्में साउथ के सिनेमा में न के बराबर बनती हैं. इसमें उन्होंने एक इंडिपेंडेंट महिला का प्रशंसनीय रोल किया है. साउथ के प्रोड्यूसर-डायरेक्टर एक्ट्रेसेज़ के बारे में क्या सोचते हैं इसके बारे में ज्योतिका ने भी अपना अनुभव बताया थाः "साउथ में ऐसे डायरेक्टर्स हैं जो अपनी फिल्मों में हीरोइन्स को ऑब्जेक्ट की तरह दिखाते हैं. डायरेक्टर्स की सोच कुछ ऐसी होती है, 'फ़िल्मों में हीरोइन्स को ऐसे कपड़े थोड़े ही पहना सकते हैं जैसे घर में औरतें पहनती हैं. लेकिन हम उन्हें ऐसे रोल ज़रूर दे सकते हैं कि वो असल ज़िंदगी में चाहे जितनी बुद्धू हों लेकिन उन किरदारों औऱ फिल्मों में वो समझदार लगें'."
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डायरेक्टर प्रियदर्शन की हिंदी फ़िल्म 'डोली सजा के रखना' (1998) से ज्योतिका ने अपना डेब्यू किया था.

#3.  श्रुति हसन ने फिल्मों में जब एंट्री ली तो वे सफल नहीं हुईं. बाद में उन्हें प्लास्टिक सर्जरी करवानी पड़ी. उसके बाद से उनका करियर सही चल रहा है. सर्जरी उनका व्यक्तिगत मामला है. हम नहीं कहेंगे कि उन्होंने गलत किया कि सही. लेकिन उन्हें शायद ऐसा करने की ज़रूरत ही महसूस नहीं होती अगर फिल्म इंडस्ट्री में इतने स्टीरियोटाइप्स न होते. ये उनके शब्द हैं: "साउथ फ़िल्म इंडस्ट्री में चाहिए कि लड़कियां थोड़ी सी वज़नी हों. मैं टॉलीवुड और बॉलीवुड दोनों फिल्में करती हूं. टॉलीवुड फिल्में करने के दौरान थोड़ा सा ज़्यादा खाती हूं, लेकिन बॉलीवुड की फिल्म करते समय मुझे बहुत एक्सरसाइज़ करनी पड़ती है." तमिल फिल्म 'येवडू' (2014) में श्रुति का ये आइटम सॉन्ग देखें जो ज्यादातर उनके क्लीवेज के लिए चर्चा में रहा.

#4.  रकुलप्रीत जिन्होंने फिल्म 'यारियां' से बॉलीवुड में डेब्यू किया था वे बता चुकी हैं कि शुरू से फिटनेस को लेकर बहुत सचेत थीं. लेकिन उन्हें टॉलीवुड में वज़न बढ़ाने को कहा गया. 'यारियां' के बाद उन्हें हिंदी फिल्में नहीं मिलीं लेकिन साउथ में काम मिलता रहा. वो भी तब जाकर जब उन्होंने एक खास तरह की सुंदरता पाने के लिए सर्जरी करवाई. उन्हें अब तक साउथ में कोई सेंसिबल रोल नहीं मिला है, सब में वो सिर्फ सजावट की वस्तु रखी गई हैं.
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रकुलप्रीत सिंह दिल्ली में पैदा हुई थीं.

#5.  श्वेता बासु प्रसाद जब 11 साल की थीं तब उन्होंने विशाल भारद्वाज की 'मकड़ी' (2002) से फिल्म डेब्यू किया था. इसके लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड तक मिला. बाद में उन्होंने बहुत बेहतरीन फिल्म 'इकबाल' भी की. लेकिन जब उन्होंने साउथ का रुख़ किया तो धीरे-धीरे अहसास हो गया कि वहां कैसे जिस्म की ज़रूरत होती है काम पाने के लिए. जब उन्होंने ये इंडस्ट्री छोड़ी तब तक वजन बढ़ा लिया और लुक मांसल कर लिया था. एक प्रॉस्टीट्यूशन रैकेट में उनका नाम जोड़ दिया गया जो बाद में गलत साबित हुआ. उसके बाद श्वेता मुंबई लौट गईं. वे अनुराग कश्यप की कंपनी में स्क्रिप्ट कंसल्टेंट बन गईं.
shweta
2012 में आई तमिल फिल्म 'पुन्नामी रात्रि' में श्वेता का लुक.

#6.   समांथा रुथ प्रभु सर्जरीज़ के मामले में साउथ में मिसाल है. इतनी करवाईं कि चेहरा पूरा बदल गया. नीचे फोटो ही देख लें. उन्होंने कोई निजी कारणों से नहीं बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के कॉमर्स की वजह से ही ये सब करवाया. वहां हीरोइन्स में होड़ यही है कि टॉप की हीरोइन बन जाएं और सबसे ज्यादा सेलेबल स्टार बन जाएं. हाल ही में नागार्जुन के बेटे नागचैतन्य से शादी करने वाली समांथा 2011 में फिल्मों में आईं और जल्द ही उन्होंने सर्जरियां करवानी शुरू कर दीं. अगले साल ही आई उनकी फिल्म 'एगा' (मक्खी) देख लें जिसमें उनके होठ और नाक में बदलाव दिखा था. उसके बाद उन्होंने अपनी चिन और चेहरे में दूसरी जगह बदलाव करवाए.
सर्जरियों के बाद और उनके पहले की समांथा रूथ प्रभु ऐसी-ऐसी दिखती थीं.
सर्जरीज़ के बाद और उनके पहले की समांथा रूथ प्रभु ऐसी-ऐसी दिखती थीं.

#7.   भुवनेश्वरी साउथ की ऐसी एक्ट्रेसेज़ में से हैं जिन्हें ज़्यादातर फ़िल्मों में 'सेक्स अपील' बढ़ाने के लिए ही लिया गया. मसलन, गूगल पर उनका नाम टाइप किया जाए तो किन्हीं मीनिंगफुल रोल्स या बेहतरीन अदाकारी के ऑप्शन नहीं आते, बल्कि भुवनेश्वरी की 'हॉट' तस्वीरों और वीडियोज़ के टाइटल सजेस्ट होकर आते हैं.
Bhuvaneswari
भुवनेश्वरी ने 1999 में टीवी से डेब्यू किया था. 2003 में तमिल फिल्म 'बॉयज़' में प्रॉस्टीट्यूट के एक रोल से वे चर्चा में आईं.

#8.   चार्मी कौर आपको 'आर... राजकुमार' (2013) के गाने 'गंदी बात' से याद होंगी. साउथ मूल के डायरेक्टर प्रभु देवा ने उनको सिर्फ इस गाने के लिए ही लिया था और मूलतौर पर उसमें उनका नाम अजीब मूव्स देना या शाहिद कपूर को चूमना था. 2002 में साउथ से डेब्यू करने वाली चार्मी की दो साल बाद आई फिल्म 'मास' ब्लॉकबस्टर थी. उसके बाद उन्होंने एक भरा-भरा शरीर मेंटेन किया तो उनका करियर चलता रहा. लेकिन एक समय में यही फैट उनके लिए मुश्किल बन गया. जरूरत से ज्यादा बैली फैट हो गया. 2013 में उन्होंने इसे कम किया.
Charmi-Kaur
पंजाबी मूल की चार्मी भी उन हीरोइन्स में से हैं जिन्हें गूगल में हॉट तस्वीरों के लिए ज्यादा सर्च किया जाता है.

#9.   नमिथा 2002 से साउथ इंडियन फ़िल्में करती आ रही हैं. जब उन्होंने पहली फिल्म 'सॉन्थम' की थी तो वे बिलकुल स्लिम और फिट थीं. लेकिन बाद के वर्षों में वे लगातार वजनी होती गईं. अब वहां उनकी पहचान एक एक्ट्रेस से ज्यादा 'सेक्स सिंबल' की होकर रह गई है. वहां अभिनेत्रियों से बढ़े वजन और मांसल शरीर की जो प्रत्यक्ष-परोक्ष मांग होती है उसे नमिथा का करियर पुष्ट करता है. उससे कम करो तो काम मिलने में दिक्कत और उससे ज्यादा हो तो भी दिक्कत. उन्हें भी इंटरनेट पर उनकी objectified इमेज के लिए ही ढूंढ़ा जाता है.
Namitha (1)
नमिथा का तमिल फिल्मों के दर्शकों में कल्ट स्टेटस है.

#10.   तापसी पन्नू को 2016 में हमने 'पिंक' जैसी पावरफुल फ़िल्म में देखा था. ये वही दुर्लभ बात है जिसके होने का इंतजार हम हिंदी, तमिल, तेलुगू सब फिल्म उद्योगों में कर रहे हैं. कि एक्ट्रेसेज़ को सजावट और उपभोग की वस्तु बना देने के बजाय सशक्त और सम्मानपूर्ण रोल दिए जाएं. तापसी ने इसी जर्नी को पूरा किया है. तमिल और तेलुगू फिल्मों से शुरुआत करने वाली तापसी को वहां ग्लैमरस रोल ही मिले. उन्होंने 2010 में तेलुगू फिल्म 'झुम्मांडी नादम' से डेब्यू किया था. इसे उन्हीं के. राघवेंद्र राव ने डायरेक्ट किया था जिन्होंने श्रीदेवी तक को लॉन्च किया. तापसी ने एक इंटरव्यू में बताया कि कैसे डायरेक्टर का उनकी नाभि और पेट वाले इलाके से obsession था. वे अपनी फिल्मों की एक्ट्रेस के मिडरिफ से फूल वगैरह टकराते थे. तापसी वाली फिल्म में राव ने उनकी नाभि पर नारियल गिराया. आप इमेजिन करिए कि ये तापसी हमेशा तमिल और तेलुगू में कमर्शियल सिनेमा ही करतीं तो कौन जान पाता कि उनमें 'पिंक' जैसी सशक्त फिल्म करने की संभावना भी छुपी है. ये संभावना हर उस एक्ट्रेस में है जिसकी सेक्सी फोटोज़ गूगल पर ढूंढ़ी जाती हैं.
tapsee pannu
तापसी पन्नू ने जब अपनी डेब्यू फिल्म के डायरेक्टर के मिडरिफ ऑब्सेशन का जिक्र किया तो लोग नाराज हो गए थे.

ये लिस्ट और भी बहुत लंबी है. बहुत लंबी.
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