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आगरा के अस्पतालों की ये ग्राउंड रिपोर्ट UP सरकार के दावों की धज्जियां उड़ा रही है!

ऑक्सीजन की कमी नहीं है तो लोग क्यों मर रहे हैं?

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UP के CM दावा कर रहे हैं कि प्रदेश में न तो ऑक्सीजन की कमी है, न ही बेड की. लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त इससे बिल्कुल उलट है. (फोटो- PTI)
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार दावा कर रहे है कि सूबे में न तो मेडिकल ऑक्सीजन की कोई कमी है, न ही अस्पतालों में बेड की. लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त अलग है. इंडिया टुडे रिपोर्टर आशुतोष मिश्रा मुख्यमंत्री के इन दावों की पड़ताल करने के लिए आगरा के अस्पतालों में गए. कई प्राइवेट हॉस्पिटल ऐसे मिले, जहां बाहर मेन गेट पर ही पोस्टर लग गए हैं कि यहां बेड उपलब्ध नहीं हैं या यहां ऑक्सीजन उपबल्ध नहीं है. अस्पतालों ने परिजनों से कह दिया है कि मरीज के लिए ऑक्सीजन का प्रबंध ख़ुद करें. अस्पतालों से ग्राउंड रिपोर्ट शहर के प्रभा हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की भयंकर किल्लत है. हॉस्पिटल की ओर से मरीज के परिजनों को खाली सिलेंडर और एक चिट्ठी दी जा रही है. चिट्ठी में ऑक्सीजन रिफिल करने वालों के लिए गुहार लिखी है कि मरीज के परिवार को ऑक्सीजन देने की कृपा करें. यहां काम करने वाली नंदनी का कहना है कि शासन-प्रशासन सबको ऑक्सीजन की किल्लत के बारे में फोन किया जा चुका है, मेल किया जा चुका है. DM, SDM को बताया गया है. लेकिन कोई मदद अब तक नहीं मिली है. प्रभा हॉस्पिटल के इंचार्ज का कहना है कि करीब 100 मरीज एडमिट हैं. सब को हाई-फ्लो ऑक्सीजन दी जा रही है. अगर जल्द से जल्द और सप्लाई नहीं आई तो लोग मरने लगेंगे. पारस हॉस्पिटल में तो 8 मरीजों की ऑक्सीजन की किल्लत के चलते मौत हो गई. यहां काम करने वाली तनु चतुर्वेदी का कहना है कि सात से आठ लोगों की मौत ऑक्सीजन की कमी के चलते हुई है और हमने इसकी जानकारी प्रशासन को भी दे दी थी. पारस अस्पताल पर लगा ऑक्सीजन का मीटर जीरो का प्रेशर दिखा रहा है यानी ऑक्सीजन नहीं है. हालत ये है कि ICU से बाहर आकर डॉक्टर और नर्स मरीज का नाम लेकर उनके तीमारदारों को बुला रहे हैं कि ऑक्सीजन का इंतजाम करिए. भगवती हॉस्पिटल में भी यही हालात हैं. यहां भी 3 दिन से ऑक्सीजन की किल्लत का नोटिस चस्पा है. हॉस्पिटल की मैनेजर जरीखा खान का कहना है कि ऑक्सीजन खत्म होने की स्थिति में हमने लोगों से कह दिया कि जहां बेहतर स्थिति हो अपने मरीज को वहां ले जाएं. रेमडिसिविर की भी कमी ऑक्सीजन ही नहीं, रेमडिसिविर इंजेक्शन की भी कमी है.‌ इंजेक्शन न तो मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध है, न ही प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर. आशुतोष मिश्रा की बात धीरज से हुई, जो अपने पिता प्रेम सिंह के लिए इंजेक्शन ढूंढ रहे हैं. पूनम भी अपनी मां के लिए इंजेक्शन की तलाश में है, लेकिन नहीं मिल रहा. पूनम कहती हैं कि सरकार का दावा है इंजेक्शन बहुत हैं, लेकिन हमें तो ब्लैक में भी नहीं मिल रहा. किसी हेल्पलाइन नंबर से मदद नहीं मिल रही. DM भी मान रहे किल्लत की बात आगरा के जिलाधिकारी प्रभु सिंह भी ये मान रहे हैं कि पिछले 24 घंटे में ऑक्सीजन की किल्लत हुई है. उनका कहना है कि मरीजों की संख्या अचानक बढ़ी है इसलिए ऑक्सीजन की मांग भी बढ़ी है. उम्मीद भी जता रहे हैं कि जल्द सप्लाई आएगी. कह रहे हैं,
“लिक्विड ऑक्सीजन की खेप पहुंच रही है, जिससे कमी पूरी हो जाएगी. लेकिन साथ ही चेतावनी दी है कि जिन अस्पतालों ने ग़लत तरीके से पर्चियां जारी की हैं या लोगों को ऑक्सीजन लाने के लिए कहा है ऐसे अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. जिन अस्पतालों ने पैनिक क्रिएट किया है, अब उनके खिलाफ कार्रवाई होगी.”
ऑक्सीजन फैक्ट्री के मालिक सुनील बताते हैं कि ऑक्सीजन लेने आए लोगों में झगड़ा तक होने की नौबत आ गई थी और अब जब ऑक्सीजन खत्म हो गया है तो फैक्ट्री पर ताला लगा दिया गया है. लोग खाली सिलेंडर लेकर आ रहे हैं. लेकिन ऑक्सीजन है ही नहीं, इसलिए खाली हाथ लौट रहे हैं. सरकार कोई भी दावे करे, लेकिन महामारी में बुनियादी चीजों की किल्लत है. फिर चाहे वह दवा हो, ऑक्सीजन हो या फिर अस्पतालों में बेड हों. व्यवस्था नहीं हुई तो हालात और बेकाबू हो सकते हैं.

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