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13 साल की लड़की ने पीएम मोदी को एक ख़त लिखा और हजारों लोग भ्रष्टाचार से बच गए

बच्ची की सोच और PMO का काम, दोनों काबिल-ए-तारीफ़ है.

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फोटो - thelallantop
सातवीं क्लास की स्टूडेंट हश्मिता ने देश के प्रधानमंत्री को एक लेटर लिखा. इस लेटर का कुछ ऐसा असर हुआ कि राजघाट पर महात्मा गांधी की समाधि पर तैनात पूरा स्टाफ बदल गया.
हश्मिता पटियाला के सनौर कस्बे की रहने वाली हैं. वो कुछ दिनों पहले पूरे परिवार के साथ दिल्ली घूमने गई थी. महात्मा गांधी की समाधि राजघाट भी गई. समाधि को नमन किया. फिर एक बात देखी जो उसे बहुत गलत लगी. वहां जूते के दो काउंटर हैं. एक पेड और एक मुफ़्त. पेड काउंटर का असल रेट महज़ 1 रुपए है. गलत बात ये थी कि स्टाफ विदेशी टूरिस्ट के जूते रखने के लिए उनसे 100 रुपए वसूल रहे थे.
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राजघाट
13 साल की हश्मिता रात भर इस बारे में सोचती रही. घर पहुंचने के बाद भी उसके दिमाग से ये बात नहीं गई. सोचती रही कि विदेशी, भारत की कैसी छवि लेकर वापस जाते होंगे. 'अतिथि देवो भव:' वाली इमेज लिए विदेशी इंडिया घूमने आते होंगे. यहां उन्हें बाहरी समझकर ठग लिया जाता है. हश्मिता सोचती रही कि क्या जाए जो ये ठगी रुक जाए. उसने पीएम को एक लेटर लिखा. घटना की पूरी जानकारी दी. एड्रेस नहीं पता था तो एनवेलप पर सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नई दिल्ली लिखा. इतने पर ही लेटर पीएमओ पहुंच गया.
इस लेटर की वजह से राजघाट के स्टाफ पर तुरंत एक्शन लिया गया. पूरा का पूरा स्टाफ ही बदल गया. ऐसा दोबारा न हो सके इसके लिए वहां सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं. हश्मिता के पिता अमरदीप सिंह को इस पर हैरानी भी हुई और खुशी भी. हैरानी इस बात पर कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर एक्शन लिया और वो भी इतनी जल्दी. खुशी इस बात की कि देश में बढ़ते भ्रष्टाचार को रोकने के लिए प्रधानमंत्री इतने सचेत हैं. एक बच्ची की शिकायत पर पूरा का पूरा स्टाफ ही बदल दिया गया.
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हश्मिता
सेंट मैरी स्कूल में पढ़ने वाली हश्मिता से हमें कितना कुछ सीखने की ज़रूरत है. रोज़ हम भ्रष्टाचार का कोई न कोई वाकया देखते होंगे. लेकिन कितने लोगों की हश्मिता की तरह नींद उड़ती होगी. जिन्हें लगता होगा कि ये कितना गलत है और इसे रोकने के लिए कुछ करना चाहिए. कई बारी लोग झंझटों से बचने के लिए रिश्वत देते हैं. लेकिन ये झंझट भी इन्हीं भ्रष्टाचार से पैदा होता है.
हो सकता है हश्मिता के पापा उसकी इस बात को गंभीरता से न लेते. फिर वो लेटर पोस्ट न होता. लेकिन इससे हश्मिता पर क्या असर पड़ता? ज़रूरी है कि न तो हम खुद भ्रष्टाचार करें न होने दें. देखकर चीज़ों को अनदेखा करने से कभी कुछ सही नहीं होगा. हश्मिता जैसी सोच अगर देश के हर नागरिक की हो जाए तो देश से भ्रष्टाचार मिट जाए. विदेशी इंडिया के बारे में सही विचार लेकर अपने देश जाएं. दूसरों से भी हमारे देश की तारीफ़ करें.


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