मेरा क्रिकेट का हीरो इंग्लैंड का ये क्रिकेटर है
न कोहली, न तेंदुलकर. बस एक ही नाम.
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फोटो - thelallantop
खेलने के वक़्त आप सिर्फ खेल नहीं रहे होते हैं. अप लड़ रहे होते हैं. विरोधी से भी और खुद से भी. दरअसल खेल के शाब्दिक अर्थ को इतना हल्का बना दिया गया है कि जिस दौरान आप मैदान पर होते हैं उस दौरान आप जिन भी चीज़ों से गुज़र रहे होते हैं, वो उसके साथ न्याय नहीं कर पाता. दुबई में क्रिकेट टूर्नामेंट चल रहा था. ऐसे प्लेयर्स का टूर्नामेंट जो विकलांग हैं. इसी टूर्नामेंट में इंग्लैंड वर्सेज़ पाकिस्तान मैच चल रहा था. इंग्लैंड की बॉलिंग चल रही थी. पाकिस्तान के बैट्समैन ने गेंद स्क्वायर लेग की ओर मारी. थॉमस दौड़ते हुए बॉलचेज़ करने लगा. ऐन मौके पर डाइव मारी. और इसी प्रोसेस में उसका नकली पैर निकल गया. अच्छी बात ये थी कि उसने गेंद रोक ली थी. पैर छिटक के एक ओर गिरा. गेंद दूसरी ओर. उसने बिना पैर की परवाह किये, एक टांग पर उछलते हुए गेंद उठाई और वापस फेंक दी. वापस फेंकनी भी ज़रूरी थी क्यूंकि विरोधी बैट्समैन रन दौड़ रहे होंगे. गेंद फेंकने के दौरान थॉमस एक पैर पर बैलेंस नहीं बनाये रख पाए और गिर पड़े. वीडियो खतम होने तक वो इस बात की खबर ले रहे थे कि गेंद सही जगह पहुंची थी या नहीं. और साथ ही उनकी तारीफ़ करते हुए कुछ तालियों की आवाज़ भी आ रही थी. जिसके बाद वो वापस एक टांग पर उचकते हुए अपने नकली पैर तक पहुंचते हैं. अपने लोअर को उठाते हैं और नकली पैर को पहनने लगते हैं. आप जब ये वीडियो देखते हैं तो एक पल के लिए ऐसे बंध जाते हैं जैसे किसी ने मनों भारी एक झोला आपके सीने पर रख दिया हो. आप एक ही समय पर इंस्पायर हो रहे होते हैं और खुद को थॉमस के सामने छोटा पाते हैं. उस वक़्त पूरी दुनिया थॉमस की विल और मजबूती के सामने बौनी लगती है. थॉमस उस दूर पड़े नकली पैर से अलग एक हल्क से दिखते हैं. जिसे अपने असली रूप में आने के लिए कठिन परिस्थितियों की ज़रूरत होती है. इस वीडियो में दिखने वाला थॉमस असल में सभी शक्तियों का मालिक है. वो शक्तियां जो आपके शरीर के हिस्सों में नहीं जिगर में बसती हैं. https://www.youtube.com/watch?v=WrFUEFF_dAI
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