शिवसेना पर अब आधिकारिक तौर पर शिंदे गुट का कब्जा हो गया है. चुनाव आयोग ने उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका देते हुए पार्टी के नाम और निशान पर अधिकार एकनाथ शिंटे गुट को दे दिया है. एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के मौजूदा मुख्यमंत्री भी हैं. शिंदे ने चुनाव आयोग में अर्जी दायर की थी कि शिवसेना पर अधिकार उन्हें दिया जाए. चुनाव आयोग ने आज इस मामले में फैसला सुनाते हुए शिंदे को शिवसेना दे दी.
उद्धव ठाकरे से छिनी शिवसेना, EC ने शिंदे गुट को दिया पार्टी का नाम और निशान
लोकतंत्र की हत्या हुई- उद्धव ठाकरे गुट.


इससे पहले अक्टूबर 2022 में, चुनाव आयोग ने शिवसेना के धनुष और तीर के चुनाव चिन्ह को फ्रीज कर दिया था. दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और अलग चिन्ह दिए. शिंदे गुट को दो तलवारों और ढालों के साथ "बालासाहेब की शिवसेना" नाम दिया गया था. उद्धव गुट को शिवसेना- उद्धव बालासाहेब ठाकरे नाम दिया गया और मशाल को उसका प्रतीक चिन्ह दिया गया था.
चुनाव आयोग ने आज फैसला सुनाते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने कहा है कि शिंदे गुट के पास 40 विधायकों का समर्थन है. जबकि ठाकरे गुट के पास सिर्फ 15 विधायक है.
उद्धव ठाकरे गुट की तरह से इस मामले में प्रतिक्रिया सामने आई है. संजय राउत ने कहा कि चुनाव आयोग का फैसला लोकतंत्र की हत्या है. राउत ने कहा कि चुनाव आयोग BJP के एजेंट की तरह काम कर रहा है. राउत ने ये भी कहा कि अभी कानूनी लड़ाई बाकी है. और जनता के न्यायालय में न्याय मांगेंगे.
इधर महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे का भी बयान सामने आया है. आजतक से बात करते हुए शिंदे ने कहा कि-
ये सत्य की विजय है. बालासाहेब और आनंद दिघे के विचार के विचारों की जीत है. ये उन विधायकों की जीत है जिन्होंने मुझपर भरोसा जताया. ये लोकतंत्र की जीत है.
उपमुख्यंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी बाला साहेब के विचारों की जो शिवसेना है वही असली शिवसेना है. उद्धव ठाकरे गुट तो विरोध करेगा ही.
शिंदे ने तख्तापलट किया थाजून 2022 में एकनाथ शिंदे गुट ने उद्धव ठाकरे से बगावत कर दी थी. शिंदे अपने समर्थक विधायकों के साथ गुवाहाटी चले गए थे. शिंदे की बगावत के बाद उद्धव ठाकरे को इस्तीफा देना पड़ा था. बाद में शिंदे गुट ने बीजेपी के समर्थन से सरकार बना ली थी.
वीडियो: चुनाव आयोग ने उद्धव ठाकरे, एकनाथ शिंदे को शिवसेना के चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल करने से रोका



















