मई-जून का महीना और साथ ही भीषण गर्मी का प्रकोप. उत्तर भारत के अधिकतर राज्यों में 40 डिग्री सेल्सियस के पार पारा और मौसम विभाग की ओर से देश के अलग-अलग हिस्सों में हीटवेव की चेतावनी. कुल मिलाकर गर्मी के साथ गर्मी वाली बीमारियों का खतरा. सबसे गंभीर समस्या होती है हीट स्ट्रोक की. हीट स्ट्रोक को आमतौर पर लू लगना भी कहते हैं. इससे बचने के कई तरीकों के साथ एक तरीका बड़ा वायरल रहता है. दावा किया जाता है कि जेब में प्याज रखने से लू नहीं लगती. लेकिन, क्या वाकई ऐसा कुछ है? चलिए बताते हैं.
जेब में प्याज रखने से गर्मी में लू नहीं लगेगी? सच जान रिस्क नहीं लेंगे
गर्मी में हीट स्ट्रोक पर ये प्याज वाला दावा खूब वायरल होता है, सच ये निकला...


इस सवाल का जवाब बताने से पहले आपको ये बताते हैं कि लू लगना यानी हीट स्ट्रोक होता क्या है. और जवाब आपको खुद मिल जाएगा. हीट स्ट्रोक गर्मी से जुड़ी एक गंभीर स्थिति है. लू लगने के कारण जान जाने का भी खतरा होता है. अप्रैल महीने में महाराष्ट्र से भूषण अवॉर्ड सेरेमनी के दौरान लू लगने से 14 लोगों की मौत होने की खबर आई थी.
हीट स्ट्रोक में हमारी बॉडी अपना टेंपरेचर कंट्रोल नहीं कर पाती. इसे ऐसे समझिए कि जब आपको बहुत गर्मी लगती है, तो पसीना होता है. ये पसीना जब सूखता है, तो शरीर को ठंडक मिलती है. पसीना होना आपके शरीर को ठंडक देने का हिस्सा है. वैसे ही जैसे ठंडी लगने पर आप कांपने लगते हैं, कंपकंपी शरीर को गर्मी देने की प्रक्रिया का एक हिस्सा है. तो हीट स्ट्रोक में होता ये है कि बॉडी गर्म होती जाती है. इंटरनल टेंपरेचर को सेल्फ-रेगुलेट करने का शरीर का मैकेनिज्म फेल हो जाता है.
बॉडी टेंपरेचर तेजी से बढ़ता है, शरीर ठंडा नहीं हो पाता. 10 से 15 मिनट के अंदर टेंपरेचर 104°F या इससे अधिक हो सकता है. इस हालत में अगर इमरजेंसी ट्रीटमेंट नहीं मिलता, तो मरीज की जान तक जा सकती है. हीट स्ट्रोक में हाई टेंपरेचर के अलावा स्किन लाल और ड्राई हो सकती है. तेज सिर दर्द, चक्कर आना, मिचली या उल्टी, उलझन और बेहोशी लू लगने के लक्षण हैं. अब, आप ही बताइए कि ऐसे में प्याज रखने भर से क्या सुरक्षा मिलेगी?
दिल्ली के होली फैमिली हॉस्पिटल में क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट डॉक्टर सुमित रे कहते हैं कि प्याज रखना हीटस्ट्रोक से बचाव का तरीका नहीं है.
प्याज को लेकर तमाम ऐसे फर्जी दावे होते आए हैं, जिनका कोई लॉजिक नजर नहीं आता. एक फर्जी दावा ये भी किया जाता है कि प्याज रखकर फ्लू से बचा सकता है या कमरे में रखा कटा प्याज बैक्टीरिया या वायरस को खींच लेता है. कोरोना के समय दावा किया गया कि प्याज और सेंधा नमक खाने से कोविड-19 ठीक हो जाता है. असल में इन दावों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.
अब असल सवाल ये कि भीषण गर्मी के इस मौसम में हम हीट स्ट्रोक से बचने के लिए क्या कर सकते हैं.
हीट स्ट्रोक से बचने के लिए क्या करें?क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट डॉक्टर सुमित रे कुछ बातों का खयाल रखने की सलाह देते हैं. वो कहते हैं कि गर्मी में जब तापमान अपने चरम पर हो, तब बाहर नहीं निकलना चाहिए. अगर बाहर निकलना ही पड़े, तो पूरी तैयारी के साथ निकलें. जैसे, छाता लेकर निकलना, शरीर को अच्छे से कवर करना, खुद को हाइड्रेटेड रखना. इसके लिए अपने पास पानी जरूर रखें. शराब, चाय, कॉफी और कार्बोनेटेड ड्रिंक से बचें क्योंकि ये पानी का विकल्प नहीं हैं. अगर आपको पानी के अलावा कुछ और चाहिए तो नारियल पानी, नींबू-पानी, छाछ या घर में तैयार कोई ड्रिंक जैसे आम पना ले सकते हैं.

(फोटो: PTI)
गर्मी में अगर किसी की तबीयत खराब हो रही हो, तो तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए. मेडिकल मदद आने तक मरीज को किसी ठंडी और छाया वाली जगह पर ले जाना चाहिए. डॉक्टर सुमित रे बताते हैं कि हीट स्ट्रोक की स्थिति में सबसे जरूरी मरीज के शरीर को ठंडा करना होता है. ऐसे में ठंडे पानी से स्पंजिंग भी की जा सकती है.
फिर प्याज का क्या करना है?पॉकेट में नहीं रखना है. जी हां, जेब में प्याज रखने का कोई फायदा नहीं है. प्याज लगभग हर घर के किचन में होता ही है. ये खाने का जायका तो बढ़ाता ही है, इसे सलाद की तरह कच्चा भी खाया जाता है. गुरुग्राम के फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट में हेड क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट दीप्ति खटुजा कहती हैं कि गर्मियों में कच्चा प्याज खाना अच्छा होता है. प्याज के फायदों की बात करें, तो ये फैट और कोलेस्ट्रॉल फ्री होता है. प्याज में फाइबर, विटामिन C, विटामिन B6, पोटैशियम और दूसरे पोषक तत्व जैसे फोलेट, कैल्शियम और आयरन पाए जाते हैं.
तो कुलमिलाकर बात ये है कि प्याज का फायदा पाने के लिए आपको प्याज अपनी जेब में नहीं रखना है, बल्कि अपनी डाइट में शामिल करना है. यहां ये ध्यान रखने वाली बात है कि प्याज हो या कोई भी फल-सब्जी. इनका सेवन सेहत के लिए अच्छा होने का मतलब ये नहीं होता कि ये किसी बीमारी का इलाज हैं. जाहिर है कि किसी भी तरह की हेल्थ प्रॉब्लम में डॉक्टर को दिखाने की जरूरत होती है, ना कि घरेलू नुस्खे अपनाए जाने की.
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