नोटबंदी, सर्जिकल स्ट्राइक और चुनाव. मंगलवार को गुजरात निकाय के उप-चुनाव के परिणाम आए. बीजेपी 8 सीटों से बढ़कर 23 सीटों पर पहुंच गई है. और 23 सीटों वाली कांग्रेस 9 सीटों पर लुढ़क गई. एक दिन पहले सोमवार को महाराष्ट्र के नगर परिषद चुनाव के परिणाम आए थे, जहां 2501 सीटों में से 610 सीटें जीतते हुए बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. 2011 में हुए पिछले चुनाव में वो तीसरे नंबर की पार्टी थी. इससे पहले मध्य प्रदेश और राजस्थान के निकाय चुनावों में भी बीजेपी जीत हासिल कर चुकी है.
इस वक्त निकाय चुनाव में बीजेपी की जीत के क्या मायने हैं?
महाराष्ट्र और गुजरात के निकाय चुनाव में बीजेपी जीत गई है. नरेंद्र मोदी गदगद हैं.



महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
इन चुनाव परिणामों से बीजेपी नेता और कार्यकर्ता खासे उत्साहित हैं. महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने पीठ थपथपाई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र की जनता का शुकराना किया. गुजरात के बीजेपी नेता भी बहुत खुश हैं. वजह: निकाय चुनाव का विधानसभा और लोकसभा के लिये ग्राउंड तैयार करने में निभाया गया रोल.
जमीनी स्तर पर होने वाले इन चुनावों को हमेशा राष्ट्रीय मुद्दों से जोड़कर देखा जाता है. इन चुनावों में जीतने वाली पार्टी इसे अपनी राष्ट्रीय नीतियों की जीत बताती है. मौजूदा हालात में यही हो रहा है. पिछले करीब डेढ़ साल से गुजरात आंदोलन मोड में चल रहा है. पटेल आरक्षण पर पहले पाटीदार आंदोलन हुआ और फिर गोरक्षा के नाम पर हुए अत्याचार की वजह से दलितों ने मोर्चा खोल दिया. हार्दिक पटेल और जिग्वेश मेवानी के ये आंदोलन इतने व्यापक स्तर पर हुए कि गुजरात में बीजेपी की जमीन खिसकने के कयास लगाए जाने लगे. पर ऐसा हुआ नहीं. सरकार ने नोटबंदी का भी फैसला लिया है. इसके बावजूद जीत हासिल हुई है.

दलित आंदोलन के दौरान जिग्नेश मेवानी
प्रधानमंत्री को भरोसा है कि ये उनकी विकास-नीति की जीत है. पार्टी मान रही है कि लोगों ने नोटबंदी के फैसले को मंजूरी दे दी है. गुजरात में पार्टी का अब भी वही दबदबा कायम है, जो पिछले डेढ़ दशक से चला आ रहा है.
महाराष्ट्र में मराठा वर्चस्व और गुजरात में पटेल वर्चस्व के बावजूद भाजपा ने जीत हासिल की है. ये बड़ी बात है. वो भी ऐसे समय में जब नोटबंदी के चलते जनता का मूड पलट भी सकता था. इसका फायदा भाजपा को आने वाले उत्तर प्रदेश और पंजाब के चुनावों में मिलेगा.

राहुल गांधी
पर बीजेपी के खिलाफ जाने वाले स्थानीय चुनाव का उदाहरण है इसी महीने नवी मुंबई में हुआ APMC चुनाव. एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केटिंग कमिटी यानी कृषि कमिटी. 17 सीटें थीं और बीजेपी सारी सीटें हार गई. पेजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी (PWP) पार्टी 15 सीटें जीती. शिवसेना और कांग्रेस को एक-एक सीट मिली.
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तो फिर 2019 का लोकसभा चुनाव पेजेन्ट्स एंड वर्कर्स पार्टी ही जीतेगी!















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