तो फिर 2019 का लोकसभा चुनाव पेजेन्ट्स एंड वर्कर्स पार्टी ही जीतेगी!
विपक्ष के पास मुद्दे हैं, पर तर्क नहीं.
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फोटो - thelallantop
रंगा और बिल्ला के बीच लड़ाई हो गई. दोनों काम तो एक ही करते थे, पर दोनों में कंपटीशन था. एक का फायदा दूसरे का घाटा होता था. एक दिन रंगा ने बिल्ला को मार्केट से हटा दिया. लोग भी त्रस्त हो गये थे दोनों के झगड़ों से. बिल्ला को किसी ने सपोर्ट नहीं किया. कहा कि एक बार में एक को ही झेलेंगे. अब काम चलने लगा. पर बिल्ले से रहा नहीं जा रहा था. एक दिन बिल्ला मार्केट में भागा-भागा जा रहा था. चिल्लाते हुए. कह रहा था कि रंगा के घर में ही हत्या हो गई है. अब वो जायेगा जेल. अब इस मार्केट में मेरा दबदबा होगा. मैं कहता तो था कि रंगा के दिन अब लदने वाले हैं. लोग भौंचक्के हो गये. रंगा के घर गये लोग तो पता चला कि एक चींटी मरी है रंगा के घर. वही हाल अभी राजनीति का हुआ है. नरेंद्र मोदी की सरकार को जनता ने वोट किया. बहुमत दिया. ढाई साल हो गये. विपक्ष मुद्दे खोज रहा है. अगले ढाई साल के लिये. मुद्दे मिल भी रहे हैं. पर इस चक्कर में कई फालतू बातें भी हो जा रही हैं. नवी मुंबई में APMC के चुनाव हुये. एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केटिंग कमिटी यानी कृषि कमिटी. मंडी. 17 सीटें थी. भाजपा सारी सीटें हार गईं. PWP (पेजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी) ने 15 सीटें जीतीं. शिवसेना और कांग्रेस को एक-एक सीटें मिलीं. कांग्रेस को 25 साल बाद इस चुनाव में पहली बार कोई सीट मिली. अब विपक्षी पार्टियों ने कहना शुरू किया है कि मोदी के नोट बैन के फैसले से भाजपा की लोकप्रियता डूब रही है. सांस भी ना लेने पाएगी. बुरी तरह हार रही है चुनाव. ये बिल्कुल ठीक है कि भाजपा मंडी के चुनाव हार गई. पर ये लोकल चीजें होती हैं. इसमें मुद्दे अलग होते हैं. इतने अलग कि महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना दोनों साथ हैं पर मंडी के चुनाव में विपक्ष में. अगर इन चुनावों के आधार पर लोकप्रियता तय होने लगे तब तो PWP देश की सबसे लोकप्रिय पार्टी होगी. 2019 का चुनाव जीतने की प्रबल संभावना होगी. पर ऐसा तो है नहीं. नोट बैन के फैसले का प्रभाव आने में अभी वक्त लगेगा. अभी किसी को ये नहीं पता है कि इसका क्या प्रभाव पड़ा है. जनता में तो अभी तक पॉजीटिव सेंटीमेंट है. दिक्कतों के बावजूद. वक्त ही बतायेगा कि भाजपा की लोकप्रियता में कितनी कमी/बढ़ोत्तरी हुई है. अभी अगर चाहें तो सरकार के ढाई साल के फैसलों पर ही डाटा समेत सवाल खड़े किये जा सकते हैं. रुके हुए बिल को लेकर बातें की जा सकती हैं. नोट बैन पर समाधान निकाला जा सकता है. जिस हिसाब से रोज संसद स्थगित हो रही है, लग रहा है कि सारी ही पार्टियों की लोकप्रियता घट रही है. अगर जनता से सवाल पूछा जाये तो लोग किसी एलियन को सत्ता सौंप दें.
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