The Lallantop

ये है दिल्ली का सबसे बड़ा फेलियर स्कूल!

करावल नगर का गवरमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल. यहां आठवीं पास करने के बाद लड़कियों के रिजल्ट पर ब्रेक लग जाता है.

Advertisement
post-main-image
फोटो - thelallantop
करावल नगर का गवरमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल. दिल्ली का सबसे ज्यादा भीड़ वाला स्कूल. वहां पहुंचो तो लगेगा किसी मेले में आए हो. 7 हजार छात्राएं, चार शिफ्ट और 14 सेक्शंस में पढ़ती हैं. तीन घंटे क्लासेज होती हैं जिनमें 6 सब्जेक्ट पढ़ने होते हैं. छात्राएं ज्यादा हैं. क्लासरूम सिर्फ 69. इसलिए बाहर ग्राउंड में क्लास लगती हैं. इस साल 9th क्लास में 1100 छात्राएं थीं. पास हुईं 213. माने सिर्फ 20 परसेंट. 887 फिर उसी क्लास में बैठेंगी. आठवीं पास होकर आने वाली लड़कियों के साथ. पिछले साल का रिजल्ट भी यही था. करीब 50 परसेंट छात्राएं ही पास हुई थीं. इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक बीती 18 मार्च को 11वीं क्लास का पॉलिटिकल साइंस का पेपर था. बीच में हो गई बारिश. मैदान में पेपर दे रही लड़कियां भागीं. दीवारों के सहारे अपनी कॉपी बचाई. सब गुड़ गोबर हो गया. कॉपी भीग गईं. 31 मार्च को रिजल्ट आया. 700 लड़कियां फेल हो गईं इसमें. सिर्फ 300 पास हो सकीं. अब इस मसले पर मचा है बवाल. स्कूल की लड़कियां और उनके पैरेंट्स प्रोटेस्ट कर रहे हैं. रिजल्ट निकलने के बाद स्कूल पहुंचते हैं. स्कूल का नक्शा बिगाड़ देते हैं. पुलिस रोकने आती है तो उस पर पत्थर चला देते हैं. उनसे मीडिया ने पूछा कि क्यों ये सब हो रहा है? तो अलग अलग कहानियां सामने आईं. एक लड़की 11वीं में फेल हुई. उसके पिता हैं लाल मोहन. वो बताते हैं कि स्कूल में छात्राओं के लिए लिखने पढ़ने की जगह ही नहीं है. लाइब्रेरी तक स्टाफ रूम बना रखा है. सुरेश चंद्र स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के मेंबर हैं. वो बताते हैं कि तीन घंटे की शिफ्ट होती है. उसमें भी दो घंटे क्लास लगती है. उन घंटों में भी टीचर्स नहीं होते. कुछ सब्जेक्ट्स के टीचर तो पूरे सेशन नहीं मिलते. छात्राओं से कैसे उम्मीद की जाए कि वो इत्ते कम रिसोर्सेज में, इतने कम वक्त में 6 सब्जेक्ट्स पढ़ के पास हो जाएंगे. एक गार्जियन ने अपनी मुश्किल बताई. कि यहां आने वाली लड़कियों के पैरेंट्स की कमाई 10 हजार के आस पास है महीने में. प्राइवेट स्कूलों में बच्चियों को पढ़ाना हमारे बस का नहीं. यहां हाल ये है कि बच्चे सालों पढ़ने के बाद एक शब्द नहीं पढ़ पाते. महीने की फीस 60 रुपए है. प्रिंसिपल हैं माला रानी. पैरेंट्स का इनके बारे में खयाल है कि इनसे मिलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है. वो बताती हैं कि लिमिटेड सुविधाओं के बावजूद स्कूल अच्छा परफॉर्म कर रहा है. पैरेंट्स को पहले से पता होता है कि स्कूल में जगह कम है. बच्चों को बाहर बैठना पड़ेगा. हम ऊपर से डिमांड करते हैं कि सुविधाएं बढ़ाई जाएं. क्लासरूम बढ़ाए जाएं. लेकिन यहां स्टूडेंट्स की संख्या देखिए. सिर्फ 18 परमानेंट टीचर हैं. 116 गेस्ट टीचर्स. जिनमें गेस्ट टीचर क्लास मिस कर देते हैं या छुट्टियां ले लेते हैं. क्या कहते हैं टीचर वो धांय से ठीकरा स्टूडेंट्स के सिर पर फोड़ दिए. बताया उनकी कमजोर तैयारी को जिम्मेदार. 9th और 11th में पाठ्यक्रम लंबा है. स्टूडेंट्स पूरे सेंटेंस नहीं लिखते. अब बताओ. उन आंसर्स पर नंबर कैसे दें? दिल्ली के शिक्षा मंत्री क्या बोले अखबार ने एजूकेशन मिनिस्टर मनीष सिसोदिया से संपर्क साधा. वो कहते हैं "सरकारी स्कूलों में एवरेज हजार से 1500 स्टूडेंट्स रहते हैं. बॉर्डर एरियाज में ये गिनती 3 हजार तक बढ़ जाती है. जब बच्चे NCR से आते हैं. करावल नगर नॉर्थ ईस्ट में पड़ता है. वहां गाजियाबाद के बहुत बच्चे आते हैं. इसलिए संभालना मुश्किल होता है." पैरेंट्स कहते हैं कि ये सब स्कूल की साजिश है. स्टूडेंट्स की गिनती घटाने की. आठवीं क्लास तक किसी को फेल नहीं कर सकते. उसके बाद नौवीं में पास नहीं करेंगे. ताकि वहां पहुंचने से पहले ही बच्चे स्कूल छोड़ दें.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement