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'अगर पैसे नहीं...', Rau's IAS कोचिंग हादसा मामले में दिल्ली सरकार को कोर्ट से फटकार, अधिकारी तलब

Delhi High Court ने Delhi Government को फटकार लगाते हुए कहा कि आपको इस मुफ्तखोरी संस्कृति पर फ़ैसला लेना होगा.

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कोर्ट ने कहा कि सब तरफ़ से ज़िम्मेदारी एक-दूसरे की तरफ़ डालने की कोशिश हो रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर - PTI)

दिल्ली हाई कोर्ट ने Rau's IAS स्टडी सर्किल कोचिंग हादसे वाले मामले पर सुनवाई की है. सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पूछा कि अब तक क्या किसी MCD के अफ़सर पर कार्रवाई हुई है? कोर्ट ने कहा कि ओल्ड राजेंद्र नगर में जल निकासी के लिए उचित व्यवस्था नहीं है. अवैध निर्माण पुलिस की मिलीभगत से होते हैं. इसके बिना कोई अवैध निर्माण नहीं हो सकता. कोर्ट ने दिल्ली सरकार की 'मुफ्तखोरी' की नीतियों की आलोचना भी की है. कोर्ट में याचिका दायर कर घटना की जांच के लिए एक हाई लेवल कमेटी के गठन की मांग की गई है.

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आजतक से जुड़े संजय शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक़, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि उस क्षेत्र में पानी कैसे जमा हो गया, ये रॉकेट साइंस नहीं है. जब अधिकारियों ने इमारत को बनाने की मंजूरी दी, तो क्या उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी. सब तरफ़ से ज़िम्मेदारी एक-दूसरे की तरफ़ डालने की कोशिश हो रही है. कार्यवाहक चीफ़ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस तुषार राव गेडेला की दो जजों की बेंच मामले की सुनवाई कर रही थी. बेंच ने कहा कि 'मुफ्तखोरी संस्कृति' के कारण सरकार के पास शहर की बढ़ती आबादी के मद्देनजर इंफ़्रास्ट्रक्चर, ख़ासकर शहर की जल निकासी प्रणाली पर खर्च करने के लिए पैसा नहीं है.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक़, सुनवाई के दौरान कार्यवाहक चीफ़ जस्टिस मनमोहन ने कहा,

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आप बहुमंजिला इमारतों की मंजूरी दे रहे हैं, लेकिन नाली की सही व्यवस्था नहीं है. आपके अधिकारी दिवालिया हो चुके हैं. अगर आपके पास सैलरी देने के लिए पैसे नहीं हैं, तो आप इंफ़्रास्ट्रक्चर को कैसे दुरुस्त करेंगे? आप मुफ्तखोरी की संस्कृति चाहते हैं. MCD ने बताया कि अगर 5 करोड़ रुपये से ऊपर का कोई भी प्रोजेक्ट होगा, उसके लिए स्थायी समिति द्वारा मंजूरी ली जाएगी. लेकिन ऐसी कोई समिति नहीं है. MCD ने कहा कि एक प्रोजेक्ट कैबिनेट में भेजा गया. लेकिन कैबिनेट की बैठक की अगली तारीख क्या है, कोई नहीं जानता! आपको इस मुफ्तखोरी संस्कृति पर फ़ैसला लेना होगा.

न्यूज़ एजेंसी PTI के मुताबिक़, मामले में कोर्ट ने MCD के कमिश्नटर, DCP और दूसरे जांच अफ़सरों को 2 अगस्त को पेश होने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने मामले की जांच पर भी सवाल उठाया. इसे ‘अजीब’ कहा. क्योंकि कार चलाने वाले राहगीर के ख़िलाफ़ पुलिस कार्रवाई चल रही है, लेकिन MCD अधिकारियों के ख़िलाफ़ कोई जांच ही नहीं चल रही.  कोर्ट ने बताया कि कोचिंग सेंटर के बेसमेंट के सभी पांच सह-मालिकों (co-owners) की ज़मानत याचिका पर शाम 4 बजे आदेश पारित किया जाएगा.

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आजतक की ख़बर के मुताबिक़, कोर्ट ने कहा कि लोगों की जान महंगी है. नालियों के लिए कोई मास्टरप्लान नहीं बनाया गया है. अगर अफ़सर हर चीज की जांच करने में सक्षम नहीं, तो हम इसकी जांच किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपेंगे. शायद हम लोकपाल लाएंगे. सीनियर अफ़सरों को मैदान पर उतरना चाहिए. कोर्ट ने निर्देश दिए कि ओल्ड राजेंद्र नगर के सभी नाले साफ किये जाएं. इलाक़े के सभी अतिक्रमणों को 2 दिनों के अंदर (2 अगस्त तक) साफ कराएं.

दरअसल, पीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में Rau's IAS स्टडी सर्किल कोचिंग हादसे पर एक हाई लेवल कमेटी बनाने की मांग की गई थी. याचिका सार्वजनिक ट्रस्ट कुटुंब द्वारा दायर की गई थी. याचिका में NCR के हर ज़िले में एक जिला स्तरीय कमेटी बनाने की मांग की गई है, जो अपने-अपने ज़िलों में अवैध कमर्शियल इमारतों की जांच करेगी.

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