कांग्रेस ने वेनेजुएला संकट पर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर निशाना साधा है. कांग्रेस का आरोप है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन में वहां के एक निर्वाचित राष्ट्रपति को जबरन हटाए जाने के बावजूद भारत सरकार ‘चुप्पी’ साधे हुए है.
'ये भारत में भी हो सकता है', वेनेजुएला संकट पर कांग्रेस ने ऐसा क्यों कहा?
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार बड़े वैश्विक मुद्दों पर साफ रुख लेने में नाकाम रही है.
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि वेनेजुएला में जो कुछ हुआ है, वह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ है और इससे दुनिया के सामने एक खतरनाक मिसाल कायम हो सकती है. उन्होंने कहा कि वहां एक निर्वाचित राष्ट्रपति का अपहरण किया गया है और यह बेहद गंभीर चिंता का विषय है, ऐसा कल किसी और देश के साथ भी हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा, “भविष्य में ऐसा भारत के साथ भी हो सकता है.”
पृथ्वीराज चव्हाण ने भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार बड़े वैश्विक मुद्दों पर साफ रुख लेने में नाकाम रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि वेनेजुएला के मामले में भी भारत ने कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है. चव्हाण ने कहा कि रूस और चीन ने अमेरिका की कार्रवाई की आलोचना की है, लेकिन भारत ने हमेशा की तरह चुप रहना ही बेहतर समझा.
उन्होंने कहा कि यही स्थिति पहले यूक्रेन युद्ध के दौरान भी देखने को मिली थी, जब भारत ने कोई पक्ष नहीं लिया. इसी तरह इज़रायल-हमास संघर्ष पर भी भारत ने कोई ठोस रुख नहीं अपनाया. चव्हाण ने आरोप लगाया, “अब हालात ये हैं कि भारत अमेरिका से इतना डर गया है कि जो हुआ है, उसकी आलोचना करने की कोशिश भी नहीं कर रहा.”
कांग्रेस नेता ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर लगाए गए ड्रग तस्करी के आरोपों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यह दावा 'पूरी तरह बेबुनियाद' है कि मादुरो खुद नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल हैं. चव्हाण ने कहा कि ऐसे गंभीर आरोपों के लिए सबूत होने चाहिए, लेकिन अब तक कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है. उनके मुताबिक, यह पूरा मामला राजनीतिक मकसद से प्रेरित है.
पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि इस पूरे संकट की असली वजह वेनेजुएला के विशाल ऊर्जा संसाधन हैं. वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है और अमेरिका की नजर इस पर है. उनके अनुसार, तेल को एक हथियार के रूप में कैसे इस्तेमाल किया जाए, यह अमेरिका की रणनीति का हिस्सा है.
उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कई हिस्सों ने अमेरिका की कार्रवाई की आलोचना की है, लेकिन भारत ने हमेशा की तरह चुप्पी साध ली है. चव्हाण ने सवाल उठाया कि अगर भारत खुद को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बताता है, तो उसे वैश्विक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखनी होगी. अगर भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनना चाहता है, तो उसे जिम्मेदारी निभानी होगी और अंतरराष्ट्रीय मंच पर सक्रिय भूमिका निभानी पड़ेगी.
चव्हाण ने साफ कहा कि इस तरह दोनों पक्षों को खुश करने की नीति नहीं चल सकती. किसी न किसी बिंदु पर भारत को अपना स्पष्ट रुख अपनाना होगा.
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