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कॉन्डोम, डायपर, सेनेटरी पैड के साथ अब आयेंगे पाउच

कूड़ा बीनने वालों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने लिया डिसीज़न. अब कचरा फेंकने के लिए सामान बनाने वाले पाउच साथ में देंगे.

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फोटो - thelallantop
फैक्ट्री में सामान बनता था. सामान मार्केट में आने के बाद इस्तेमाल किया जाता है. बचे हुए वेस्ट प्रोडक्ट का क्या करना है ये सर दर्द सिर्फ यूज़र का ही था. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. अब सामान को बनाने वाले भी उसके वेस्ट प्रोडक्ट के मैनेजेमेंट के लिए ज़िम्मेदार होंगे. पूरे देश भर में सभी कूड़ा बीनने वाले लोग रजिस्टर किये जायेंगे. उन्हें अपने काम की ट्रेनिंग भी दी जाएगी. इससे उनकी सेहत पर पड़ने वाले बुरे असर से उन्हें बचाया जा सकता है. इस नए रूल के तहत डायपर, सैनिटरी पैड्स, नैपकिन और कॉन्डोम्स बनाने वालों को उसके साथ पाउच या पैकेट देने पड़ेंगे. ऐसे पाउच जिसमें इन सामानों को इस्तेमाल के बाद सही ढंग से कचरे में फेंका जा सकेगा. इस से सबसे ज़्यादा फ़ायदा कूड़ा उठाने वालों को होगा. पर्यावरण मंत्रालय ने मंगलवार को ये नियम बनाते हुए इसे अपने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल के तहत इसे अनिवार्य कर दिया है. इस्तेमाल किये जाने के बाद बिना पैक करके फेंके गए डायपर, सैनिटरी पैड्स, नैपकिन और कॉन्डोम्स से कूड़ा बीनने वालों को होने वाली दिक्कत और खतरों को देखते हुए ये नियम बनाया गया है. इस नियम में ये भी साफ़ तौर पर कहा गया है कि प्रोडक्ट बनाने वाली कम्पनियां वेस्ट मटेरियल को सही ढंग से फेंकने के लिए भी लोगों को बतायेंगी. साथ में दिए जाने वाले पाउच पर आने वाले खर्च पर 'extended producer responsibility' के तहत डिस्कशन किया जायेगा. इस रूल को देश भर में स्थानीय नगर निगम लागू करने की ज़िम्मेदारी उठाएंगे.

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