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केजरीवाल की टांग खींचने के चक्कर में BJP विधायक ने जो किया उसे कहते हैं- आ बैल मुझे मार

कोई इतना गैरजिम्मेदार कैसे हो सकता है?

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विजेंद्र गुप्ता खुद ही ट्रोल हो गए हैं.
लोकसभा चुनाव सिर पर हैं. अप्रैल-मई में देश फिर एक बार देश का प्रधानमंत्री चुनेगा. अखबारों से लेकर सड़कों तक में विकास कार्यों के इस्तेहार और बैनर छपे और लटके दिख रहे हैं. ऐसा लग रहा है कि दुनिया में सबसे ज्यादा काम इंडिया में ही हो रहा है. मगर इसी बीच एक दूसरे के प्रति एजेंडा भी खूब चल रहा है. सोशल मीडिया से लेकर भाषणों तक में एक दूसरे को नीचा दिखाने और जनताविरोधी बताने की भी होड़ लगी हुई है. इसी के चलते भारतीय जनता पार्टी के सीनियर नेता और दिल्ली की रोहिणी विधानसभा से विधायक विजेंद्र गुप्ता भी भूल गए कि किसी भी पोस्ट को शेयर करने से पहले उसकी प्रमाणिकता जो जांच लेना चाहिए. हुआ ये कि विजेंद्र गुप्ता ने अपने वैरिफाइड ट्विटर हैंडल से 9 मार्च को शाम 6.13 पर ट्वीट किया. इसमें विजेंद्र गुप्ता ने अरविंद केजरीवाल का एक पोस्टर शेयर करते हुए लिखा कि AAP नेता केजरीवाल इतने बौखलाए हुए हैं कि झाटू को वोट देने की अपील कर रहे हैं! नीचे जो तस्वीर विजेंद्र गुप्ता ने अटैच की उसमें झाड़ू की जगह झाटू लिखा दिख रहा है और इसे लाल घेरे में भी दिखाया गया है.  पहली बात तो ये कि इस शब्द को अपशब्द यानी गाली की तरह लिया जाता है. आप बोलचाल की भाषा में इसे बदजुबानी में इस्तेमाल किया जाता है. दूसरी बात ये कि ये फोटोशॉप तस्वीर है. यानी असल में यहां झाड़ू लिखा गया था मगर इसके साथ फोटोशॉप में छेड़छाड़ करके इस रूप में कर दिया गया जिसे विजेंद्र गुप्ता ने शेयर करने में देर नहीं लगाई. Dhruv मगर सबसे ज्यादा मजेदार बात तब हो गई जब इस पर कमेंट करते हुए यूट्यूबर ध्रुव राठी ने लिखा- "गुप्ता अंकल आपने ये फोटोशॉप खुद किया है या किसी बीजेपी आईटी सेल के वर्कर को काम दिया था? मतलब झूठ फैलाने में भी एक नंबर के कामचोर हो आप लोग." साथ में ध्रुव ने उस शब्द को जूम करके भी दिखाया जिसमें साफ दिख रहा है कि 'झा' के आगे 'टू' की कलर टोन में कितना फर्क है. अब विजेंद्र गुप्ता इसमें इतने फंसे हैं कि आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी उन्हे ट्रोल कर दिया. इनकी इस ट्वीट पर बहुत से कमेंट आए हैं और अब विजेंद्र गुप्ता इस ट्वीट को न तो डिलीट करने की हिम्मत कर पा रहे हैं और न ही इस पर माफी मांगने की. मगर इतना जरूर साफ हो गया है कि पार्टियां एक दूसरे को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ने वाली हैं. अभी चुनाव में जितना भी वक्त है, नेताओं की तरफ से जिम्मेदारी भरे बयान या सोशल मीडिया पोस्ट की उम्मीद न ही की जाए तो अच्छा है.

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