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सिंघु बॉर्डर पर युवक की बर्बर हत्या को लेकर सोशल मीडिया में क्या चल रहा है?

लोग राकेश टिकैत को क्यों याद कर रहे हैं.

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तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन की फाइल फोटो. (फोटो सांकेतिक तौर पर इस्तेमाल की गई है)
सिंघु बॉर्डर पर जहां किसानों का प्रदर्शन चल रहा है, वहां शुक्रवार, 15 अक्टूबर को एक शव मिला. 35 साल के युवक की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. किसानों के विरोध प्रदर्शन के मुख्य मंच के पास युवक का शव बैरिकेड्स से लटका मिला. उसके हाथ कटे थे. संयुक्त किसान मोर्चा ने दावा किया है कि इस हत्या के पीछे निहंग सिख हैं. इस घटना का एक वीडियो सामने आया है जिसमें कुछ निहंग खड़े हैं. उनमें से एक कहता है कि पिछले दिनों आनंदपुर साहब में एक बंदा गुरु ग्रंथ साहिब के साथ बे’अदबी करके भाग गया था. वैसे ही,‌ ये बंदा भी आया था, सिखों के भेष में था, कछेहरा पहना हुआ था. इसने गुरु ग्रंथ साहिब के साथ बे’अदबी करने की कोशिश की, लेकिन निहंगों ने इसको मौक़े पर ही पकड़ लिया और सज़ा दे दी. इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भी नेताओं के साथ अन्य लोगों की प्रतिक्रिया देखने को मिली है. बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय (Amit Malviya) ने सिंघु बॉर्डर की घटना पर राकेश टिकैत पर निशाना साधा. लिखा,

बलात्कार, हत्या, वैश्यावृत्ति, हिंसा और अराजकता... किसान आंदोलन के नाम पर यह सब हुआ है. अब हरियाणा के कुंडली बॉर्डर पर युवक की बर्बर हत्या...आखिर हो क्या रहा है? किसान आंदोलन के नाम पर यह अराजकता करने वाले ये लोग कौन हैं जो किसानों को बदनाम कर रहे हैं?

उन्होंने एक और ट्वीट में लिखा,
योगेंद्र यादव के बगल में बैठकर अगर राकेश टिकैत ने लखीमपुर में मॉब लिंचिंग को सही नहीं ठहराया होता तो कुंडली सीमा पर एक युवक की हत्या नहीं हुई होती. किसानों के नाम पर इन विरोध प्रदर्शनों के पीछे के अराजकतावादियों को बेनकाब करने की जरूरत है.
वहीं योगेंद्र यादव का भी बयान आया है, उन्होंने ट्विटर पर एक वीडियो में कहा, सिंघु बॉर्डर से जो खबर आ रही है वो किसी भी इंसान को विचलित कर देने वाली है. संयुक्त किसान मोर्चा ने बयान देकर स्पष्ट कर दिया है कि इससे संयुक्त किसान मोर्चा का, किसान आंदोलन का कोई लेना देना नहीं है. हमनें कई बार कहा है कि ये किसान आंदोलन है, धार्मिक नेताओं के लिए कोई जगह नहीं है. लेकिन वो वहां पर डटे हुए हैं. मृतक इस ग्रुप के साथ पिछले कुछ सालों से रह रहा था. कल रात में कुछ विवाद हुआ और बेअदबी का आरोप लगा. ये गंभीर मामला है लेकिन किसी को कानून हाथ में लेना सही नहीं है. किसान आंदोलन में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है. आम आदमी पार्टी के IT हेड रहे अंकित लाल ने लिखा, जो भी सिंघु बॉर्डर पर हुआ उसकी जितनी भर्त्सना की जाए कम है. सभी दोषियों को कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए. शहजाद जय हिन्द ने लिखा कि सिंघु बॉर्डर पर हिंसा की सारी सीमाएं पार हो चुकी हैं. बताया जा रहा है कि तथाकथित आंदोलनकारियों ने इस हत्या को अंजाम दिया है इस से पहले 26 जनवरी की हिंसा , लड़की के साथ रेप, पंजाब में भाजपा नेता के साथ अभद्रता और बल्लभगढ़ में जलाकर मारने की घटना सामने आयी यह किसान नहीं हो सकते. कुछ लोगों ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की अपील की तो कुछ लोगों ने किसान नेता राकेश टिकैत के बयान की याद दिलाई जिसमें उन्होंने लखीमपुर मामले में क्रिया की प्रतिक्रिया बताया था.

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