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कोरोना वैक्सीन को लेकर भारत के लिए इससे अच्छी खबर फिलहाल कुछ और नहीं!

यूके ने ऑक्सफोर्ड की जिस नई वैक्सीन को मंजूरी दी है, वो भारत में अप्रूवल की लाइन में आगे है

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Oxford-AstraZeneca वैक्सीन की ख़ास बात ये है कि इसे सामान्य रेफ्रिजरेटर कंडिशन में रखा जा सकता है. (तस्वीर: एपी)
ब्रिटेन ने ऑक्सफोर्ड की कोरोना वैक्सीन को भी इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी है. जल्द ही युनाइटेड किंगडम (यूके) के लोगों को ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की ओर से मिलकर बनाई गई इस वैक्सीन के टीके लगने शुरू हो जाएंगे. ऐसा करने वाला ब्रिटेन दुनिया का पहला देश है. ब्रिटेन में इस वैक्सीन को हरी झंडी मिलने के बाद भारत में भी उम्मीदें बढ़ गई है, क्योंकि यहां इस्तेमाल के लिए अप्रूवल की लाइन में ऑक्सफोर्ड की कोरोना वैक्सीन सबसे आगे खड़ी है. यूके मेडिसिन एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलटेरी एजेंसी (MHRA) ने 18 साल या उससे अधिक उम्र के व्यक्तियों को ऑक्सफोर्ड की कोविड वैक्सीन की इमरजेंसी डोज देने की परमिशन दे दी है. ब्रिटेन में 4 जनवरी से इस वैक्सीन को रोलआउट किया जाएगा. नॉर्मल फ्रिज में स्टोर करके रखी जा सकेगी ऑक्सफोर्ड की इस वैक्सीन की ख़ास बात ये है कि इसे सामान्य फ्रिज के तापमान पर स्टोर करके रखा जा सकेगा. इसके साथ ही ये दूसरी वैक्सीन्स की तुलना में सस्ती भी है. ऑक्सफोर्ड ने एक बयान में बताया था कि इस वैक्सीन के लिए 2 से 8 डिग्री तापमान की जरूरत होगी. इस टेंपरेचर पर इसे 6 महीने तक रखा जा सकेगा. इससे इसे आसानी से कहीं भी लाया ले जाया जा सकेगा. भारत जैसे देश के लिए इस तापमान वाली वैक्सीन को मुफीद माना जा रहा है. बता दें, फाइजर जो वैक्सीन बना रही है, उसे रखने के लिए माइनस 70 डिग्री टेंपरेचर चाहिए होगा, जो एक बड़ी मुश्किल मानी जा रही है. दो डोज़ लेने की जरूरत होगी लाइवमिंट की रिपोर्ट के मुताबिक़ AstraZeneca ने वैक्सीन की दो डोज़ चार से बारह हफ्ते के बीच लेने की सलाह दी है. कंपनी ने कहा है कि क्लिनिकल ट्रायल में वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावी है. ट्रायल में कोई भी गंभीर मामला सामने नहीं आया और दूसरी ख़ुराक के बाद किसी को भी 14 दिन से अधिक अस्पताल में भर्ती नहीं रहना पड़ा. दावा है कि ऑक्सफोर्ड की इस वैक्सीन को ट्रायल में 70 फीसदी इफेक्टिव माना गया है. भारत में कोरोना की वैक्सीन पर क्या अपडेट है? भारत में सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमिटी (SEC) की बैठक आज 30 दिसंबर को होनी है. यही कमिटी भारत में कोरोना वैक्सीन को हरी झंडी देने की सिफारिश करेगी. भारत में ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन का निर्माण और ट्रायल सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया कर रहा है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा वैक्सीन बनाने वाली कंपनी है. सीरम की वैक्सीन को भारत में Covishield नाम से मार्केट में उतारा जाएगा. वैक्सीन के लिए आपको कितनी पैसे देने पड़ सकते हैं? अगर सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया (SII) और सरकार के बीच में क़रार साइन हो गया, तो अन्दाज़ लगाया जा रहा है कि ये वैक्सीन 250 रुपये तक की मिल सकती है. इससे पहले SII के CEO एस पूनावाला ने कहा था कि कोरोना की वैक्सीन 500-600 रुपए तक की पड़ सकती है, जबकि सरकारी ख़रीद में वैक्सीन का दाम 225-300 के बीच हो सकता है.

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