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'नाक से ब्लड, खून की उल्टी,' मादुरो का गार्ड बोला- 'अमेरिका ने वेनेजुएला पर मिस्ट्री वेपन से हमला किया'

Nicolas Maduro के वफादार सिक्योरिटी गार्ड ने कथित तौर पर कहा कि जो हमने झेला, वो सब कोई दोबारा झेलना नहीं चाहता. गार्ड ने आगे कहा कि जो कुछ यहां हुआ, वो सिर्फ Venezuela ही नहीं, बल्कि पूरे इलाके की तस्वीर बदल देगा.

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अमेरिका की गिरफ्त में वेेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो. (Reuters)

"नाक से खून बहने लगा. कुछ लोग खून की उल्टियां करने लगे. हम जमीन पर गिर गए, हिल भी नहीं पा रहे थे." वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के एक भरोसेमंद सिक्योरिटी गार्ड ने अमेरिकी हमले को लेकर यह दावा किया है. इस सुरक्षाकर्मी ने कथित तौर पर कहा कि मादुरो को पकड़ने आई अमेरिकी सेना ने 'मिस्ट्री वेपन' यानी किसी 'रहस्यमई हथियार' का इस्तेमाल किया, जिससे वेनेजुएलियाई सैनिक घुटनों पर आ गए.

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गार्ड उस पल को याद कर रहा था जब अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस पर हमला किया और मादुरो को पत्नी समेत गिरफ्तार कर लिया. सुरक्षाकर्मी बताता है कि तब माहौल किस तरह उनकी समझ से बाहर चला गया.

इस सिक्योरिटी गार्ड ने ये सारी बातें कथित तौर पर एक इंटरव्यू में कहीं. इसे माइक नेटर नाम के एक यूजर ने X पर पोस्ट किया है. इसी पोस्ट को अमेरिकी राष्ट्रपति भवन वाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने अपने ऑफिशियल X अकाउंट से रीपोस्ट किया.

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उन्होंने लिखा,

"आप जो भी कर रहे हो उसे रोककर सबसे पहले ये पढ़ो..."

Karoline Leavitt
कैरोलिन लेविट का रीपोस्ट. (X @PressSec)

उन्होंने इसी इंटरव्यू पोस्ट को पढ़ने के लिए कहा. इसमें जो-जो कहा गया, सबकुछ आपको भी बताते हैं. 10 जनवरी 2026 को माइक नेटर ने ये पोस्ट की. इसमें नेटर ने दावा किया कि ये प्रेसिडेंट निकोलस मादुरो के वफादार वेनेजुएलियाई सिक्योरिटी गार्ड की गवाही है.

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पोस्ट के मुताबिक सिक्योरिटी गार्ड कहता है,

"ऑपरेशन वाले दिन हमें किसी के भी आने की आवाज सुनाई नहीं दी. हम सुरक्षा तैनाती पर थे. लेकिन अचानक हमारे सारे रडार सिस्टम्स अपने आप बंद हो गए. इसके बाद हमने देखा कि हमारे ऊपर ड्रोन उड़ रहे हैं, बहुत सारे ड्रोन... हमें समझ ही नहीं आया कि कैसे रिएक्ट करें."

फिर सिक्योरिटी गार्ड से पूछा गया कि इसके बाद क्या होता है? असल हमला कब और कैसे शुरू हुआ? तो वो कहता है,

"ड्रोन के आने के बाद कुछ हेलिकॉप्टर भी आए. तादाद मगर बहुत कम थी. शायद सिर्फ आठ. उन हेलिकॉप्टर से कुछ अमेरिकी सैनिक उतरे. उनकी संख्या भी बहुत कम थी. तकरीबन 20 लोग रहे होंगे. लेकिन वो लोग तकनीक के मामले में बेहद एडवांस्ड थे. हमने पहले कभी ऐसे दुश्मन का सामना नहीं किया था."

इंटरव्यूअर पूछता है कि फिर लड़ाई शुरू हो गई? सुरक्षाकर्मी ने जवाब दिया, "हां, लेकिन वो लड़ाई नहीं, कत्लेआम था." सो, पूछा गया कि आप लोगों के पास अपने हथियार नहीं थे? उनसे आपको कोई मदद नहीं मिली? यहीं पर कहानी का सबसे डरावना हिस्सा आता है, जब गार्ड उस हथियार का जिक्र करता है, जिसे आज भी याद करके उसकी रूह कांप जाती है. गार्ड कहता है,

"बिल्कुल नहीं. क्योंकि बात सिर्फ हथियारों की नहीं थी. एक वक्त ऐसा आया जब उन्होंने कुछ लॉन्च किया... ठीक-ठीक समझ ही नहीं आता कि उसे कैसे बयां करूं. वो किसी बेहद तेज साउंड वेव जैसा था. अचानक मुझे लगा जैसे मेरा सिर अंदर से फट रहा हो. हम सबकी नाक से खून बहने लगा. कुछ लोग खून की उल्टियां करने लगे. हम जमीन पर गिर गए, हिल भी नहीं पा रहे थे... मैंने जिंदगी में कभी ऐसा कुछ नहीं देखा. उस सॉनिक वेपन या वो जो भी रहस्यमय चीज थी, उसके बाद हम खड़े तक नहीं हो पा रहे थे..."

ऐसे में इंटरव्यूअर ने सवाल किया कि आपके साथियों का क्या? उन्होंने कुछ नहीं किया? वो इन सैनिकों और हथियारों से निपट नहीं पाए? फिर से वही जवाब मिला, "बिल्कुल नहीं."

"उन 20 लोगों ने, बिना एक भी कैजुअल्टी झेले, हमारे सैकड़ों लोगों को मार दिया. कसम से, मैंने जिंदगी में ऐसा कभी नहीं देखा. उस सॉनिक वेपन (आवाज की ताकत से वार करने वाला हथियार) या जो भी वो था, उसके बाद हम खड़े भी नहीं हो पा रहे थे."

आगे इस सिक्योरिटी गार्ड ने कथित तौर पर ये भी कहा कि जो हमने झेला, वो सब कोई दोबारा झेलना नहीं चाहता. गार्ड ने आगे कहा कि जो कुछ यहां हुआ, वो सिर्फ वेनेजुएला ही नहीं, बल्कि पूरे इलाके की तस्वीर बदल देगा.

वेनेजुएला के गृह मंत्रालय के मुताबिक, 3 जनवरी 2026 को हुए इस अमेरिकी हमले में वेनेजुएलन सिक्योरिटी फोर्सेज के तकरीबन 100 लोग मारे गए. हालांकि, यह साफ नहीं है कि इनमें से कितने लोग उस ‘रहस्यमई हथियार’ की वजह से मारे गए.

अमेरिकी अखबार 'दी न्यूयॉर्क पोस्ट' में केटलिन डोर्नबोस ने इस पर एक डीटेल्ड रिपोर्ट की है. इसमें एक पूर्व यूएस इंटेलिजेंस सोर्स ने बताया कि सेना के पास पहले से ही डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स होते हैं. यानी ऐसे हथियार जो माइक्रोवेव्स या लेजर बीम्स जैसी फोकस्ड एनर्जी के जरिए दुश्मन को बेअसर कर देते हैं. आसान शब्दों में कहें तो गोली नहीं, एनर्जी (ताकत) से हमला.

सोर्स के हवाले से बताया गया कि शायद यह पहली बार है जब अमेरिका ने ऐसे हथियार का इस्तेमाल सीधे कॉम्बैट (युद्ध जैसी स्थिति) में किया हो. सोर्स ने कहा,

"ऐसे हथियारों में इस तरह के लक्षण पैदा करने की क्षमता होती है, जो बताए जा रहे हैं. सारे नहीं, लेकिन हां, कुछ तो बिल्कुल वही थे. और ऐसे हथियार हमारे पास दशकों से हैं."

रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में लद्दाख में सीमा विवाद के दौरान चीन ने कथित तौर पर भारतीय सैनिकों के खिलाफ माइक्रोवेव वेपन का इस्तेमाल किया था. जो एनर्जी वेव्स का इस्तेमाल करके नुकसान पहुंचाते हैं.

इसलिए इस हथियार को लेकर वाइट हाउस से भी सवाल किया गया. मगर अमेरिकी राष्ट्रपति भवन ने तुरंत कोई जवाब नहीं दिया. यानी अभी तक अमेरिका की तरफ से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. वाइट हाउस ने ये भी साफ नहीं किया कि उसकी प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने जो पोस्ट शेयर की, उसे क्या इस गवाही की पुष्टि माना जाए या नहीं.

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