The Lallantop

'मोदी जी, आप पूरी दुनिया घूम रहे हैं. क्या आप हमारे गांव नहीं आ सकते?'

प्रधानमंत्री जी, इस बच्चे की बात सुनिए प्लीज़

Advertisement
post-main-image
फोटो - thelallantop
प्रधानमन्त्री मोदी लोगों से मन की बात करते रहते हैं. लोगों ने भी अपने मन की बात उन्हें बतानी शुरू कर दी है. कई लोग प्रधानमन्त्री को चिट्ठी लिख चुके हैं. इन चिट्ठियों में वो अपनी समस्याओं, चिंताओं की बात करते हैं. इसमें नया नाम जुड़ा है दस साल के एक आदिवासी लड़के का. नाम है उमेश मधि. ओडिशा के मलकानगिरी जिले का रहने वाला है. उसने प्रधानमन्त्री मोदी को चिट्ठी लिखी है. अपना दर्द बयान किया है. जापानीज इन्सेफलाइटिस से बच्चों को बचाने की अपील की है.
उमेश मधि
                                        उमेश मधि
मलकानगिरी में इन्सेफलाइटिस की वजह से 505 गांवों में 73 बच्चों की मौत हो चुकी है. लेकिन जिले के चीफ मेडिकल ऑफिसर का कहना है कि अब तक 27 बच्चे ही इसकी चपेट में आये हैं. बाकी बच्चों की मौत दूसरी वजह से हुई है.
उमेश मधि ने मोदी को लिखी चिट्ठी में कहा है -
''हमारी जान बचा लीजिये. मेरे बहुत से दोस्त जापानी बुखार की वजह से नहीं रहे. आप पूरी दुनिया घूम रहे हैं. क्या आप हमारे गांव नहीं आ सकते? आकर देखिये यहां बच्चे कैसे मर रहे हैं. मुझे डर लगता है कि कहीं मैं भी अपने माता पिता से अलग न हो जाऊं.'' 
मधि सिकपली ग्राम पंचायत के एक प्राइमरी स्कूल में पढ़ता है. चौथी क्लास में. मधि का मानना है कि प्रधानमन्त्री हमारी आखिरी उम्मीद हैं.
मलकानगिरी में स्थिति पर नज़र रखने के लिए स्पेशल ड्यूटी पर ऑफिसर तैनात हैं. नाम है नृपराज राजन. उनका कहना है कि स्थिति उतनी नहीं सुधरी है, जितनी हमें उम्मीद थी. लेकिन जिला प्रशासन इसे सुधारने की पूरी कोशिश कर रहा है.
इससे पहले भी कई बच्चे प्रधानमन्त्री को चिट्ठी लिख चुके हैं.
तेरह साल के सुशांत मिश्रा और आठ साल के तन्मय ने भी अपने पिता को बचाने की गुहार लगाई थी. उनके पिता लम्बे समय से अस्थमा से जूझ रहे थे और पिता के इलाज के लिए उनके पास पैसे नहीं थे. उन्होंने स्कूल जाना भी छोड़ दिया था. फीस नहीं चुका पा रहे थे.
आठ साल की तैयबा ने आगरा से पीएम को चिट्ठी लिखी थी. उसके हार्ट में समस्या थी. इलाज के लिए पैसे नहीं थे. पीएमओ ने जवाब भी दिया था और इलाज की व्यवस्था भी करवाई थी.
बंगलौर के आठ साल के एक लड़के ने भी अपनी शिकायत कर डाली थी. उसे स्कूल जाने में देरी होती थी. सड़क में बन रहे फ्लाईओवर की वजह से. रेलवे क्रॉसिंग पर इसकी वजह से ट्रैफिक जाम लग जाया करता था. पीएमओ ने इसका भी जवाब दिया था और रेलवे मिनिस्ट्री से मामले को देखने को कहा था.
उन्नाव के ग्यारह साल के नयन सिंह ने भी क्रॉसिंग की समस्या के बारे में लिखा था. उसने कहा मेरे घर और स्कूल के बीच में रेलवे क्रॉसिंग की कमी है.
सत्रह साल की एक एनआरआई कश्मीरी लड़की ने कश्मीर के लोगों की बात सुनने के लिए पीएम को खुला ख़त लिखा था.
ज्यादातर बच्चों को पीएमओ की तरफ से जवाब दिया गया है. उम्मीद है उमेश मधि की आवाज़ भी सुनी जायेगी.
 


 

ये स्टोरी निशांत ने की है.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
 

Advertisement
Advertisement
Advertisement