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अब कोई भूरी को अनपढ़ न कहना

लड़कियों को स्कूल जाने की सीख देने के लिए, 80 बरस की उमर में परीक्षा देने पहुंची दादी.

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पढ़-लिख, लिख-पढ़ बन होशियार (सिम्बोलिक इमेज) Source- Reuters
मुरादाबाद में रहने वाली 80 साल की एक औरत ने लिटरेसी सर्टिफिकेट के लिए स्टेट बोर्ड का एक्जाम दिया है. भूरी मुरादाबाद के दिदोरा गांव में रहती हैं. 80 बरस की हैं. पढ़ना-लिखना नहीं जानती थी. जिसके चलते उन्हें काफी परेशानी हुई. उन्होंने इस प्रॉब्लम का सॉल्यूशन निकाला और पढ़ना सिखा. अपने पोते-पोतियों से. उन्होंने अपने आप को लिटरेट प्रूव करने के लिए एक्जाम देने का फैसला किया. पिछले एक साल से उनके ग्रैंड चिल्ड्रन उनको पढा रहे हैं. रविवार को मुरादाबाद और सांभल जिले में साक्षर अभियान प्रोगाम के तहत लिटरेसी सर्टिफिकेट की परीक्षा हुई. यह परीक्षा स्टूडेंट्स के ओरल और राईटिंग स्किल को परखने के लिए था. 35 हजार बच्चों के साथ भूरी ने भी परीक्षा दी. 15-15 साल के बच्चों के साथ भूरी ने 3 घंटे परीक्षा हॉल में बिताए. आंस र लिखने में उनके हाथ कांप रहे थे. फिर भी वो लिखते गई. दरअसल भूरी गांव की उन लड़कियों के लिए एक उदाहरण सेट करना चाहती हैं जो स्कूल नहीं जाती. उन्हें पढ़ाई की इंपार्टेंस समझाना चाहती हैं ताकि उन्हें आगे कोई दिक्कत न हो. उनका कहना है कि अगर मैं 80 साल की उम्र में पढ़ सकती हूं तो गांव की लड़कियों को क्या दिक्कत है. अनपढ़ होना महिलाओं के लिए एक श्राप की तरह है. जिसे वो अपने गांव से हटाना चाहती हैं भले ही इस परीक्षा का नतीजा भूरी के लिए कुछ भी हो, पर उन्हें जो करना था वो कर चुकी हैं.

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