हमें नहीं पता था कि शादी कोई खेल नहीं होता. और छोटी सी उमर में ब्याहकर जाने कितने बच्चों का खेल कर दिया जाता. वो गाना है ना ‘बालिका वधू’ का ‘छोटी सी उमर में परणाई ओ बाबोसा कांई थांरो करयो में कसूर.’राजस्थान में आखातीज (अक्षय तृतीया) के मौके पर बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन ने कमर कसी. वहां के लोकल अखबारों में यह खबर हर साल रिवाज के तौर पर दिखाई देती है. आखातीज को 'अबूझ सावा' माना जाता है. इस दिन प्रदेश में सबसे ज्यादा बाल विवाह होते हैं और कोई मुहूर्त-वुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती.
ये भी पढ़ें 'रोज गाली देने, झगड़ने वाले मुस्लिमों को हमारे इलाके में मत बसाओ, दंगे हो सकते हैं'
बाल विवाह रोकने के बड़े-बड़े दावे हैं, सैकड़ों एनजीओ कागजों में रोशन है, टीवी सीरियल बनते हैं, फिल्में बनती हैं. पर नतीजा, अब भी दिल दुखाने वाला है. जनगणना के आंकड़ों का 'इंडिया स्पेंड' नाम की एक वेबसाइट ने विश्लेषण किया. उसमें बाल विवाह के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे निराश करने वाले हैं.
ये भी पढ़ें साध्वी प्राची ने क्या 'कमाल' की बात कही है!
देश में अब भी भारी संख्या में बाल विवाह हो रहे हैं और इनमें हिंदू परिवार सबसे पिछड़े हुए हैं. 'जागो हिंदू' को कुछ लोगों ने पॉलिटिकल नारा बना दिया है. हे भारत के बहुसंख्यकों, किसी के खिलाफ मत जागो. जागो, अपने बच्चों के भविष्य के लिए. अपने घरों का रुख करो.1
जितनी जम्मू कश्मीर की टोटल पॉपुलेशन है, उतने बाल विवाह हुए हैं देश में.2
1.2 करोड़ भारतीय ऐसे हैं जिनकी शादी 10 बरस की उम्र से पहले हो गई.3
हिंदुओं की हालत ज्यादा खराब है. इनमें 84 फीसदी हिंदू और 11 फीसदी मुसलमान हैं.4
जाहिर है, इस कुरीति का सबसे बुरा असर लड़कियों पर होता है. बाल विवाह वाले 1.2 करोड़ में से 65 फीसदी यानी 78 लाख लड़कियां है.5
नाबालिग उम्र में ब्याही गई लड़कियों में 10 में से 8 लड़कियां अनपढ है.6
इनमें ज्यादातर लड़कियां गांवों की होती है.10 बरस से कम उम्र में ब्याही गई लड़कियों में 74 फीसदी हिंदू हैं और 58.5 फीसदी मुस्लिम.
'सारे मुसलमान सबीन के साथ मर क्यों न गए'
संघ के स्कूल से पढ़े मुस्लिम लड़के ने असम में किया टॉप
7
रिपोर्ट के मुताबिक, शादी करने की औसत उम्र में भी बहुत फासले हैं. जैन धर्म की कन्याएं सबसे देरी से शादी करती हैं उनकी शादी करने की औसत उम्र 20.8 बरस है. ईसाइयों में यह 20.6 और सिखों में 19.9 बरस है. जबकि हिंदू और मुस्लिम कन्याओं की शादी की औसत उम्र 16.7 बरस है.8
बाल विवाह का सबसे बड़ा कारण अशिक्षा है. कम उम्र में शादी के बाद बच्चों को स्कूल छुड़वा दिया जाता है. 1.2 करोड़ बाल विवाहितों में से 54 लाख अनपढ हैं उसमें 84 फीसदी लड़कियां हैं. इसीलिए पढ़ाई-लिखाई को बाल विवाह रोकने का सबसे बड़ा हथियार माना जाता है.9
2011 के आंकड़ों के अनुसार, कम से कम 10.2 करोड़ लड़कियों का ब्याह 18 बरस से कम उम्र में हुआ. और 2001 में ये आंकड़ा 11.9 करोड़ था. एक दशक में 14 फीसदी की कमी आई है.10
लड़कों के आंकड़े देखें तो 2011 में 21 बरस से कम उम्र में 12.5 करोड़ लड़के ब्याहे गए. जबकि 2001 में ये आंकड़ा 12 करोड़ था. लड़कों के बाल विवाह एक दशक में 7 फीसदी कम हुए है.













.webp?width=275)





