डॉमिनिक लैपियर और लैरी कॉलिंस अपनी किताब, फ़्रीडम एट मिडनाइट में एक क़िस्से का ज़िक्र करते हैं. अप्रैल 1947 में लुई माउंटबेटन आख़िरी वाइसरॉय बनकर भारत आए. माउंटबेटन ने आते ही भारत के सभी बड़े नेताओं से बात की. नेहरू और गांधी से मिलने के बाद उन्हें लगा, उन्हें जो ज़िम्मेदारी मिली है, वो उतनी भी मुश्किल नहीं है. अंत में माउंटबेटन की मुलाक़ात मुहम्मद अली जिन्ना से हुई. मुलाक़ात के बाद उन्होंने अपने प्रेस सचिव से कहा, ‘हे भगवान, आदमी था कि बर्फ़ की चट्टान.’ बर्फ़ की चट्टान कितनी सख़्त थी, ये वाइसरॉय को आगे के महीनों में पता लगना था. लेकिन उस रोज़ एक और दिलचस्प चीज़ हुई. पहली मुलाक़ात में माउंटबेटन दम्पति और जिन्ना की तस्वीर ली गई. जिन्ना को अंदाज़ा था कि ऐसा होगा. इसलिए वो इस ख़ास मौक़े के लिए एक कविता या जिसे वन लाइनर कहते हैं, याद करके लाए थे. लेकिन ये वन लाइनर एक ही स्थिति में फ़िट बैठ सकता था. तब जबकि जिन्ना और माउंटबेटन अग़ल बग़ल खड़े हों और बीच में एडविना खड़ी हों. हुआ ये दोनों पति पत्नी ने जिन्ना को अपने बीच में खड़ा कर लिया. जिन्ना एक ही चीज़ सोच के आए थे, सो उन्होंने वही दोहरा दी. बोले, 'अ रोज़ बिट्वीन टू थॉर्न्स' यानी 'दो कांटों के बीच एक गुलाब'. देखें वीडियो.
तारीख: पाकिस्तान 14 अगस्त को आज़ाद हुआ था या 15 अगस्त को?
डॉमिनिक लैपियर और लैरी कॉलिंस अपनी किताब, फ़्रीडम एट मिडनाइट में एक क़िस्से का ज़िक्र करते हैं. अप्रैल 1947 में लुई माउंटबेटन आख़िरी वाइसरॉय बनकर भारत आए. माउंटबेटन ने आते ही भारत के सभी बड़े नेताओं से बात की.
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