कभी मध्य प्रदेश के भीमबेटका जाना हो, तो वहां की गुफाओं में बनी पेंटिंग्स देखिएगा. ये पाषाण काल की कलाकारी है. माने जब मानव सभ्यता ढंग से विकसित भी नहीं हुई थी, इंसान को लिखना भी नहीं आता था, तब भी वो एक्सप्रेस करता था. बस उसका तरीका कुछ और था. भीमबेटका छोडिए, आप किसी छोटे बच्चे को कलम पकड़ाइए, वो दीवार पर गोद-गादकर कुछ कहने की कोशिश करेगा ही. ये सिर्फ ख़ामख़ा की कलमकारी या शैतानी नहीं, ये उनका ‘फॉर्म ऑफ़ एक्सप्रेशन’ है. किसी जमाने में महिलाएं अपने हाथ में पति का नाम गुदवाए रहती थीं. कोई नाम पूछे, तो वही दिखा दिया करती थीं. इन अभिव्यक्तियों से जुड़ा है एक इतिहास और इनमें रची-बसी है पूरी एक संस्कृति. क्या है ‘गोदना’ गुदवाने की कहानी, जानने के लिए देखें तारीख का ये एपिसोड.
तारीख: कहानी पुरान जमाने के टैटू 'गोदना' की जो एक जमाने की संस्कृति था
किसी जमाने में महिलाएं अपने हाथ में पति का नाम गुदवाए रहती थीं. कोई नाम पूछे, तो वही दिखा दिया करती थीं.
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