कश्मीर के मुद्दे पर हाल के वर्षों में नेहरू को ज़िम्मेदार और पटेल को अतिसक्रिय लेकिन हाथ बांधे पेश किया जाता रहा है. क्या वास्तव में ऐसा था? नेहरू और पटेल के उस समय कश्मीर को लेकर क्या मत थे और क्या पटेल की बात मान ली जाती तो कश्मीर मसला उसी समय स्थायी रूप से सुलझ गया होता और क्या तब पाकिस्तान के कब्ज़े वाला कश्मीर भी आज भारत में होता? अगर सरदार पटेल प्रधानमंत्री होते तो क्या होता? अगर पाकिस्तान का कब्ज़ाया जम्मू-कश्मीर हमारा होता, तो क्या होता? क्या है इन अगर-मगर के पीछे की गणित? जानने के लिए देखें तारीख का ये एपिसोड.
तारीख: कहानी सीजफायर, कश्मीर और LoC की, पटेल और नेहरू का इस पर क्या सोचना था?
नेहरू और पटेल, भारत के वो दो मजबूत स्तम्भकार है जिनमें साम्यता के बिना आज हम और आप इस मजबूत भारत को ना देख रहे होते. नेहरू थोड़े डिप्लमैट किस्म के व्यक्ति थे और पटेल खरी ज़ुबान के आदमी थे.
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