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जानिए, कैसे हुई थी दीनदयाल उपाध्याय की रहस्यमयी मौत

दीनदयाल उपाध्याय की लाश के हाथ में पांच रुपए का एक नोट भींचा हुआ था.

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ये 1968 के जाड़े की बात है. संसद का बजट सत्र शुरू होने वाला था. इसी के मद्देनज़र जनसंघ ने 11 फरवरी को अपने 35 सदस्यों वाले संसदीय दल की दिल्ली में बैठक बुलाई थी. एक दिन पहले जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित दीनदयाल उपाध्याय लखनऊ में थे. वो यहां अपनी मुंहबोली बहन लता खन्ना से मिलने आए हुए थे. उन्हें अगले दिन संसदीय दल की बैठक के लिए दिल्ली जाना था. तो आखिर ऐसा क्या हुआ कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय को दिल्ली की बजाय पटना निकलना पड़ा. देखिए पंडित जी के आखिरी सफ़र का विस्तृत ब्योरा.

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