कुंभ में नागा संन्यासी आते हैं. स्नान में हिस्सा लेते हैं. आम लोग इन्हें देख पाते हैं. वैसे ये साधु नग्न रहते हैं. लेकिन समाज में आने पर लोक मर्यादा के लिए, ये उपस्त्र यानी कौपीन लंगोट धारण करते हैं. ध्यान, पूजा पाठ करने के बाद. इतनी संख्या में आए नागा संन्यासी कहां जाते हैं? जवाब मिलता है. कुछ गांव, खेड़ों, कस्बों और शहरों में स्थित - मंदिरों, मठों और आश्रमों में लौट जाते हैं. वहीं का प्रबंध देखते हैं, रहते हैं. वहीं कई गुफाओं और कंद्राओं में ध्यान, तप और समाधि में लीन होने निकल जाते हैं. पर इन समाधियों में होता क्या है? नागा संन्यासियों के तप और चमत्कार से जुड़ी कहानियों के बारे में क्या जिक्र मिलता है? देखिए आज तारीख़ में.
तारीख: कहां से आते हैं इतने नागा साधु, कुंभ के बाद कहां लौट जाते हैं?
नागा संन्यासियों और इनकी समाधियों के इर्द-गिर्द तमाम कहानियां और चमत्कारों का जिक्र मिलता है. ऐसी ही एक कहानी का सिरा उनके जाने से जुड़ा है.
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