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क्या बुल्ली बाई वाले मामले में कार्यवाई हो पाएगी?

मुस्लिम महिलाओं की बोली लगाने की छूट क्यों है?

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मुस्लिम महिलाओं की बोली लगाने की छूट क्यों है?
जो लड़के और पुरुष यह पढ़ रहे हैं, वो एक पल के लिए फर्ज़ करें कि आप महिला हैं. आप साल के पहले दिन सुबह उठती हैं और देखती हैं कि फोन मैसेजेस से भरा पड़ा है. जिस मैसेज को खोलती हैं, उसमें वही एक बात लिखी है - तुम्हारी तस्वीर किसी ने इंटरनेट पर डाल दी है. आप लिंक खोलती हैं तो आपको एक एप पर लिखा मिलता है - your bulli bai of the day is - और साथ में आपकी तस्वीर. नीचे आपका सोशल मीडिया हैंडल है. ताकि कोई आसानी से आपको इंटरनेट पर ढूंढ सके. ट्विटर पर शेयर करने का ऑप्शन भी है. कैसा लगेगा आपको? किसी लड़की की तस्वीर लगाकर उसे डील ऑफ द डे बता देना उसके जीवन में कितनी परेशानी पैदा कर सकता है, ये हमें आपको अलग से बताने की ज़रूरत नहीं है. और यहां प्रश्न सिर्फ महिलाओं का भी नहीं है. बुल्ली बाई पर सिर्फ मुस्लिम महिलाओं के नाम और तस्वीरें होना साफ बताता है कि इस कवायद का निशाना कहां था. ट्विटर पर मचे शोर के बाद एक बार फिर जांच और कार्रवाई की बातें हो रही हैं. एक नागरिक होने के नाते हम इस बात पर यकीन तो करना चाहते हैं कि अल्पसंख्यक महिलाओं की टार्गेटिंग पर भारत सरकार सख्त कार्रवाई करेगी. लेकिन फिर हमारे सामने आ जाता है एक सवाल - कि सुल्ली डील्स के बाद क्या कार्रवाई हुई थी? आज हम यही सवाल पूछेंगे कि मुस्लिम महिलाओं की टार्गेटिंग भारत में आम क्यों होती जा रही है? याद कीजिए फरवरी 2021 का वक्त. सरकार बड़े गाजे बाजे के साथ Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 लेकर आई. तब खूब हंगामा हुआ. इन नियमों की ये कहकर आलोचना की गई कि सरकार सोशल मीडिया को नियंत्रित करना चाहती है और इसी बहाने डिसेंट या असहमति पर चोट करना चाहती है. इसके साथ-साथ अखबार और टीवी न्यूज़ के बाद ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल्स का भी गला घोंटना चाहती है. सूचना प्रसारण मंत्री थे रविशंकर प्रसाद. उन्होंने इस आलोचना के जवाब में कहा कि सरकार नियंत्रण नहीं, नियमन चाहती है. और सरकार तो सोशल मीडिया को मज़बूत करना चाहती है. अपने दावे की पुष्टि करने के लिए सरकार ने बताया कि वो ये नियम इसलिए भी बना रही है ताकि ऑनलाइन अपराधों पर लगाम लगाई जा सके. आईटी रूल्स 2021 में एक बिंदू ये भी है - किसी भी यूजर की गरिमा को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को और सख्ती दिखानी होगी. खासतौर पर महिलाओं के मामले में. अगर कोई महिला किसी ऐसे कंटेंट के बारे में शिकायत करती है जिससे उसकी गरिमा को धक्का लगता है तो उसे 24 घंटे में हटाना होगा. मिसाल के तौर पर प्राइवेट पार्ट, अंतरंग तस्वीरें या फर्जी अकाउंट आदि. इस तरह की शिकायत यूजर या उसकी तरफ से कोई दूसरा भी कर सकेगा. प्लेटफॉर्म पर ऐसा कॉन्टेंट नहीं डाला जा सकेगा जिससे मानहानी हो, या वो अश्लील हो अब इन सारी बातों के आलोक में उस वीभत्स और अश्लील तमाशे को देखिए जो, बुल्ली डील्स के नाम पर हो रहा है. देश भर की मुस्लिम महिलाओं के नाम और तस्वीरें एक एप पर डालकर उन्हें डील ऑफ द डे बताया गया. यहां उम्र का कोई बंधन नहीं था. नाबालिग बच्चियां थीं, युवा पत्रकार थीं. सयानी उम्र की इतिहासकार और लेखिकाएं थीं. और साथ में थी एक बूढ़ी मां जो पिछले पांच साल से अपने गुमशुदा बेटे को तलाश रही है. यहां सिर्फ एक पैटर्न था, जिसे पकड़ना बहुत आसान था. ये सभी मुस्लिम महिलाएं हैं. और किसी न किसी तरह से सार्वनजिक जीवन में हैं. या बड़े पैमाने पर लोगों से संवाद करती हैं, खासकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर. इस मामले को सबसे पहले बड़े पैमाने पर हमारे सामने लाईं द वायर की एक महिला पत्रकार. उनका नाम और तस्वीर भी इस एप पर डाला गया था. उन्होंने 1 जनवरी को ट्वीट करके इस बारे में बताया. और साथ में ये भी कहा ये सुल्ली डील्स का ही नया वर्ज़न है. इसके बाद ट्विटर पर कई नामी शख्सीयतों ने इस घटिया एप की निंदा की. शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी, AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी और कई नामी पत्रकार इनमें शामिल थे. बड़ी संख्या में लोगों ने इस बात पर ध्यान दिलाया कि ये सब इसलिए हो रहा है क्योंकि पिछली बार कार्रवाई नहीं हुई थी. इस बारे में प्रियंका चतुर्वेदी के ट्वीट का जवाब देते हुए केंद्रीय सूचना प्रोद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ट्विटर पर लिखा कि गिटहब, माने वो वेबसाइट जहां बुल्ली बाई के लिए एप बनाया गया था, उसे 1 जनवरी की सुबह ही ब्लॉक करा लिया गया. CERT और पुलिस आगे की कार्रवाई के लिए सहयोग कर रहे हैं. CERT माने Indian Computer Emergency Response Team. भारत में ऑनलाइन फिशिंग, हैकिंग या किसी दूसरे सायबर मामले पर कार्रवाई के लिए CERT नोडल एजेंसी की भूमिका में काम करती है. जब सोशल मीडिया पर कोहराम मचा, तो दिल्ली पुलिस ने भी ट्वीट करके ही जवाब दे दिया, कि मामले का संज्ञान ले लिया गया है और अधिकारियों को उचित कार्रवाई का आदेश दे दिया गया है. इसपर पत्रकार ने पूछा कि क्या इस संज्ञान से संबंधित कोई लिखित दस्तावेज़ है? इसके बाद पत्रकार ने दिल्ली की साइबर सेल को इस मामले में एक विधिवत शिकायत दी. फिर 2 जनवरी को ये जानकारी आई कि पत्रकार की शिकायत पर दक्षिण पूर्वी दिल्ली की सायबर पुलिस ने IPC की धारा 153 A - दो समुदायों के बीच दुश्मनी पैदा करना, 153B - देश की अखंडता को नुकसान पहुंचाना, 354 A और 509 के तहत मामला दर्ज कर लिया है. 354 A और 509 यौन महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने और यौन अपराधों के मामले में लगती हैं. 2 जनवरी को ही सूचना प्रोद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक और ट्वीट के माध्यम से जानकारी दी कि भारत सरकार दिल्ली और मुंबई पुलिस के साथ मिलकर इस मसले पर काम कर रही है. यहां मुंबई पुलिस का ज़िक्र इसलिए भी हुआ क्योंकि इस मामले में एक एफआईआर मुंबई में भी दर्ज हुई है. दिल्ली पुलिस ने मामले में बुल्ली बाई के अज्ञात डेवलपर्स के खिलाफ मामला दर्ज किया है. वहीं मुंबई पुलिस ने डेवलपर्स के साथ साथ उन ट्विटर यूज़र्स के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है, जिन्होंने बुल्ली बाई का प्रचार किया. यहां एक संस्था की प्रतिक्रिया खूब चर्चा में रही. राष्ट्रीय महिला आयोग, NCW. जैसे ही ये मामला सामने आया, सभी आयोग और आयोग की अध्यक्षा रेखा शर्मा को टैग करके पूछने लगे कि आयोग इस मामले पर क्या कार्रवाई करेगा. जब रेखा शर्मा ने पत्रकार के ट्वीट पर ''नोटेड'' लिखा, तो पूछा गया कि वो मामले में नोट करने के अलावा क्या कदम उठाएंगी. इसके बाद रेखा शर्मा ने ट्वीट करके जानकारी दी कि दिल्ली पुलिस से इस मामले में तुरंत एफआईआर करने को कह दिया गया है, ताकि ऐसा अपराध दोबारा न हो. चूंकि महिला पत्रकार ने ये बताया था कि ये एप पिछले एक मामले की ही तरह है, तो महिला आयोग ने दिल्ली पुलिस को दोनों मामलों में उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा. यहां तक आते आते आप समझ गए होंगे कि अब हम सबसे संयम की उम्मीद की जा रही है. जानकारी निकाली जा रही है. रिपोर्ट मांगी जा रही है. जांच चल रही है. कार्रवाई होने वाली है. और अंतिम फैसला न्यायालय को करना है टाइप वाक्यों को दोहराने का समय आ गया है. लेकिन यहां तक आते आते आपने गौर किया होगा कि पीड़ित महिला पत्रकार से लेकर राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय महिला आयोग तक एक दूसरे मामले के बारे में बात कर रहे हैं. आइए जानते हैं कि जब बुल्ली बाई की कार्बन कॉपी इंटरनेट पर नुमाया हुई थी, तब सरकार बहादुर ने क्या कार्रवाई की थी. जुलाई 2021 की बात है. माने महिलाओं यूज़र की गरिमा का खास ख्याल रखने वाले IT Rules 2021 आने के चार महीने बीत जाने के बाद. दिल्ली और नोएडा में एक एफआईआर दर्ज कराई गई. शिकायत ठीक वैसी थी, जैसा बुल्ली बाई के मामले में है. बस नाम दूसरा था - सुल्ली डील्स. तब मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरें डालकर उन्हें डील ऑफ द डे बताया जाता था. इन महिलाओं को लेकर एप पर भद्दी चर्चाएं होती थीं. इन्हीं में से कई महिलाओं के नाम इस बार बुल्ली बाई एप पर डाले गए हैं. तब दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा स्वाती मालीवाल ने दिल्ली पुलिस से इस मामले में कार्रवाई करने को कहा था. संसद की आईटी पर स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष शशि थरूर ने भी इस मामले में दिल्ली पुलिस से कार्रवाई करने को कहा था. किशनगंज से कांग्रेस के सांसद मोहम्मज जावेद ने तब गृहमंत्री अमित शाह से मिलकर उन्हें एक पत्र सौंपा था. इस पत्र पर अलग अलग पार्टियों के 56 सांसदों के दस्तखत थे. साथ में लिखा था कि सुल्ली डील्स मामले में आरोपियों की पहचान करके कार्रवाई की जाए. तब दिल्ली पुलिस में DCP (महिला अपराध) वृंदा शुक्ला ने कहा था कि ये बहुत गंभीर अपराध है और पुलिस इस मामले में जांच कर रही है. आरोपियों के डिजिटल फुटप्रिंट का पता लगाया जा रहा है. इतनी सारी बातें सुनकर लगता है कि हंगामा हुआ है, तो ज़रूर कार्रवाई हुई होगी. लेकिन असलियत इससे उलट है. ट्विटर पर शोर क्या थमा, ट्विटर पर जमे रहने वाला निज़ाम हाथ पर हाथ धरे बैठ गया. 9 अगस्त को दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा स्वाती मालीवाल ने दिल्ली पुलिस सायबर सेल के DCP को आयोग के समक्ष हाज़िर होने का समन भेजा था. क्योंकि दिल्ली पुलिस सुल्ली डील्स मामले में उठाए गए कदमों की जानकारी देने में असफल रही थी. इस दिन तक सुल्ली डील्स मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई थी. जबकि सोशल मीडिया उन स्क्रीनशॉट्स से भरा हुआ था, जिनमें साफ नज़र आ रहा था कि कौन लोग सुल्ली डील्स का प्रचार कर रहे थे. सुल्ली डील्स मामले में कार्रवाई क्यों नहीं हुई, इसका पुलिस सूत्र सिर्फ एक लाइन में जवाब देते हैं - गिटहब ने सहयोग नहीं किया. गिटहब एक अमेरिकी कंपनी है. इसपर एप बना, लेकिन जांच के लिए भेजे गए नोटिस पर जवाब नहीं आया. गिटहब कानूनी पेचीदगियों का हवाला देकर सहयोग में देरी कर रहा है. इंडियन एक्सप्रेस पर छपी आशीष आर्यन और जिग्नासा सिन्हा की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से ये तक लिखा गया है कि दिल्ली पुलिस ने केंद्रीय गृहमंत्रालय तक से मदद मांगी थी. अब यहां एक बात और परेशान करने वाली है. हमारी एजेंसियां और मंत्रालय एक कंपनी के सामने इतने लाचार क्यों पड़ गए? जबकि IT Rules 2021 साफ कहते हैं कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को किसी पोस्ट या कंटेंट के फर्स्ट ओरिजिनेटर की जानकारी सरकार को देनी होगी. मतलब सरकार किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से यह पूछ सकती है कि किसी मेसेज या कंटेंट को सबसे पहले किसने डाला. अगर विदेशी धरती से डाला गया होगा तो बताना होगा कि देश में उसे किसने फैलाया. अगर ये तर्क दिया जाए कि Git Hub आईटी रूल्स 2021 के तहत नहीं आता, तब भी, सरकार के पास पहले से चला रहा आईटी एक्ट है. जिसके सहारे सरकार आराम से गिटहब को जानकारी देने के लिए बाध्य कर सकती है. तो क्या ये कहा जाए कि अब तक इस मामले में कार्रवाई इसलिए नहीं हुई क्योंकि सरकार गंभीर नहीं थी? इस सवाल का जवाब सरकार को देना ही होगा. क्योंकि छह महीने के अंदर दोबारा एक एप बन गया है, जिसपर खुलेआम मुस्लिम महिलाओं को डील ऑफ द डे बताया जा रहा है. और ये सारी वो महिलाएं हैं, जिन्होंने समय समय पर सरकार से असहमति जताई है. कई यूज़र्स ने ये तक दावा किया है कि सुल्ली डील्स और बुल्ली बाई के कोड में भी काफी समानता है. और लगता है कि ये एक ही व्यक्ति या समूह का काम है. क्या बात बात में महिलाओं के सम्मान और अधिकार की दुहाई देने वाली सरकार इस बार कार्रवाई करेगी, ये देखना होगा. खासकर इसलिए कि मुस्लिम महिला के खिलाफ इस तरह के कैंपेन चलाने वालो लोग कमोबेश वही हैं, जो मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हमेशा भड़काऊ बातें करते रहते हैं. अब गौर कीजिए कुछ सुर्खियों पर पहली सुर्खी बनाई मेघालय के राज्यपाल सत्य पाल मलिक ने. इधर कुछ दिनों से सत्य पाल मलिक केन्द्र की मोदी सरकार और बीजेपी नेताओं के खिलाफ बयानबाजी के कारण अक्सर चर्चा में रहते हैं. मलिक ने एक बार फिर किसानों कानूनों को लेकर पीएम मोदी से मुलाकात को लेकर एक बयान दिया है. अपने बयान में राज्यपाल मलिक ने पीएम मोदी को इशारों-इशारों में असंवेदनशील के साथ घमंडी तक कह दिया. सत्यपाल मलिक ने कहा -
मैं जब किसानों के मामले में प्रधानमंत्री जी से मिला, तो मेरी पांच मिनट में ही उनसे लड़ाई हो गई. वो बहुत घमंड में थे. जब मैंने उनसे कहा, हमारे 500 लोग मर गए, तुम तो कुतिया मरती है तो चिट्ठी भेजते हो. तो उन्होंने कहा, मेरे लिए मरे हैं? मैंने कहा आपके लिए ही तो मरे थे, क्योंकि आप उनकी वजह से राजा बने हुए हो, इसको लेकर मेरा उनसे झगड़ा हो गया.
हरियाणा के चरखी दादरी जिले के एक सामाजिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने सत्यपाल मलिक इतने पर ही नहीं रुके, उन्होंने किसानों के मुद्दों पर बोलते हुए फिर से आंदोलन शुरु करने की बात भी कही. बयान सामने आने के बाद सियासत भी शुरू हो गई जैसा कि अमूमन होता है. कांग्रेस ने मलिक के बयान को ट्वीट कर लिखा, घमंड, क्रूरता, संवेदनहीनता. भाजपा के राज्यपाल के इस बयान में पीएम मोदी के व्यक्तित्व में शामिल इन्हीं 'गुणों' का बखान है. मगर, ये एक लोकतंत्र के लिए चिंता की बात है. बीते कुछ महीनों से सत्यपाल मलिक किसानों के मुद्दों पर केन्द्र सरकार को घेरते हुए नजर आए हैं. 7 नवंबर 2021 को जयपुर की ग्लोबल जाट समिट 2021 में मलिक ने आंदोलनकारी किसानों की मौत पर केन्द्र सरकार की चुप्पी को लेकर कड़ी आलोचना की थी. मामला अगर एकाध बयान का होता तो बात आई-गई होती लेकिन दिल्ली बॉर्डर पर जब से किसान आंदोलन शुरू हुआ था राज्यपाल मलिक लगातार केन्द्र सरकार के खिलाफ बयानबाजी करते हुए नजर आए. 15 मार्च 2021 को जब सत्य पाल मलिक अपने गृह जनपद बागपत पहुंचे थे तब उन्होंने कहा था कि किसानों के मामले पर जितनी दूर तक भी जाना पड़ेगा, उतनी ही दूर तक जाऊंगा. क्योंकि मुझे किसान की तकलीफ मालूम है. देश में किसान बहुत बुरे हाल में है. इस बीच कई बार सत्य पाल मलिक से राज्यपाल के पद से इस्तीफे के बारे में सवाल भी पूछे गये लेकिन हर बार उनका जवाब यही होता था कि दिल्ली के जिन लोगों लोगों ने उन्हें राज्यपाल बनाया है अगर वो कहेंगे तो तुरंत इस्तीफा दे देंगे. अगली सुर्खी उत्तर प्रदेश से जहां अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं. चुनाव से पहले नेताओं का दलबदल कार्यक्रम भी जोरों पर हैं. ऐसे ही एक नेता हैं राकेश पांडेय जो आज लखनऊ में अखिलेश यादव की मौजूदगी में बीएसपी का दामन छोड़ साइकिल पर सवार हो चुके हैं. मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो जलालपुर विधानसभा सीट से अपने चहेते रिंकू उपाध्याय का टिकट बदलने के बाद वह बीएसपी से खासे नाराज थे और रविवार को बीएसपी छोड़ दी. बात अगर राकेश पांडेय के सियासी सफर की करें तो वे एक बार लोकसभा सांसद और एक बार विधायक रह चुके हैं. 2009 में राकेश बीएसपी के टिकट पर अंबेडकर नगर सीट से लोकसभा सांसद बने तो 2002 में सपा के टिकट पर जलालपुर सीट से विधानसभा में पहुंचे थे. राकेश पांडेय के बेटे रितेश पांडेय बीएसपी के टिकट पर 2019 में अंबेडकर नगर सीट से लोकसभा में पहुंचे थे और फिलहाल लोकसभा में बीएसपी के नेता है. सुबह तक कयास लगाए जा रहे थे कि रितेश पांडेय भी समाजवादी पार्टी से जुड़ सकते हैं. अभी तक तो ऐसा कुछ नहीं हुआ लेकिन अगर भविष्य में ऐसा कुछ होगा तो बीएसपी के लिए एक बड़ा झटका होगा. इसी साल हुए पंचायत चुनाव के बाद मायावती ने विधानमंडल दल के नेता लालजी वर्मा और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व राष्ट्रीय महासचिव राम अचल राजभर को पार्टी से निकाल दिया था. पार्टी से निकाले जाने के बाद दोनों नेता समाजवादी पार्टी में शामिल हो चुके हैं. बसपा से लालजी वर्मा की विदाई के बाद नेता विधानमंडल दल बने शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली. लेकिन गुड्डू जमाली ने सिर्फ 6 महीने के भीतर बीएसपी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. एक-एक कर चुने हुए विधायक पार्टी छोड़ रहे हैं जिससे बीएसपी के विधानसभा में सिर्फ 3 विधायक बचे हैं जबकि 2017 में पार्टी के 19 विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. राकेश पांडेय के अलावा बहराइच की नानपारा सीट बीजेपी विधायक माधुरी वर्मा, पूर्व एमएलसी कांति सिंह और प्रतापगढ़ से पूर्व विधायक बृजेश मिश्र ने भी समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली. यूपी से इतर पंजाब में भी एक बड़े नेता ने घर वापसी की है. घर वापसी उस पार्टी में जिसे उन्होंने हफ्ते भर पहले ही छोड़ा था. 6 दिन पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए विधायक बलविंदर सिंह लड्डी का बीजेपी से मोहभंग हो गया है और वह अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस में शामिल हो गये हैं. लड्डी की वापसी कांग्रेस के पंजाब मामलों के प्रभारी हरीश चौधरी और मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की मौजूदगी में हुई. तीसरी सुर्खी यूपी में इनकम टैक्सी की छापेमारी से. कन्नौज में पिछले चार दिनों से समाजवादी पार्टी के एमएलसी पुष्पराज जैन पंपी के ठिकानों पर इनकम टैक्स की रेड जारी है. रविवार की रात पंपी जैन को आईटी की एक नई टीम ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की जो बुलेटिन की तैयारी तक जारी है. मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो इनकम टैक्स की टीम कन्रौज के बाद पंपी जैन को लेकर कानपुर के लिए निकल चुकी है. कानपुर के एक्सप्रेस रोड पर पंपी जैन का ऑफिस है. जहां पर इनकम टैक्स को छापेमारी करनी है. बताते चलें कि यूपी में कारोबारी पीयूष जैन के ठिकानों बाद आयकर विभाग ने 31 दिसंबर को कानपुर, कन्नौज के साथ-साथ लखनऊ और मुंबई में भी छापेमारी की थी. ये छापे समाजवादी पार्टी के एमएलसी पुष्पराज जैन उर्फ पंपी और इत्र कारोबारी मोहम्मद याकूब के ठिकानों पर मारे गये थे. अगली सुर्खी यूपी में लखीमपुर हिंसा से जुड़ी है. लखीमपुर में किसानों को गाड़ी से कुचलने के मामले में SIT ने कोर्ट में करीब पांच हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है.  SIT की तरफ से केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा को मुख्य आरोपी बनाया गया है. सूत्रों की मानें तो पुलिस ने जांच में आशीष मिश्रा के एक अन्य रिश्तेदार वीरेंद्र शुक्ला पर भी साक्ष्य छिपाने का आरोप लगाते हुएआरोपी बनाया है. साथ ही आशीष मिश्रा की घटना स्थल पर मौजूदगी की बात भी SIT ने कही है. चार्जशीट दायर होने के बाद आरोपी आशीष मिश्रा के पिता और केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी के इस्तीफे की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है.

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