हे भद्रजनों! एक बात बताओ. एक लड़की और लड़के को हाथ पकड़े हुए सड़क पर जाते हुए देखते हो तो क्या अंदर कुछ अजीब सा होता है? अपने बगल वाले को कोहनी मार कर, तिकोना मुंह बना कर उन दोनों की ओर इंगित करते हो? करते हो ना? क्यूं करते हो? दो लोग प्यार में हैं, इसमें ऐसा क्या है जो आप दूसरे की नोटिस में लाना चाहते हैं? ये जीवन का सबसे नॉर्मल सच है. उतना ही जितना हर सुबह सूरज का पूरब में उगना. क्या आप अपने साथ वाले को सुबह उठकर कहते हैं, "अबे देख, पूरब से सूरज उगा." नहीं न?
लेकिन चिड़ियाघर में जाते हैं. वहां जानवरों के बाड़े के सामने खड़े होकर उन्हें निहारते हैं. क्यूं? क्यूंकि वो नॉर्मल नहीं है. एक चिम्पांज़ी को आप सड़क पर नहीं देख पाते. इसीलिए उसे देखने का टिकट लगता है. उन्हें देखना पड़ता है. वो दिख नहीं जाते. मैं हमेशा चिड़ियाघर में चिम्पांज़ी वाले एरिया में दौड़ कर पहुंचता हूं. मेरे लिए वो बहुत कमाल का जानवर है. उसे देखने में बहुत मज़ा आता है. साथ में जो भी होता है, मैं उसे दिखाता हूं. कोहनी मार मार कर. लेकिन सड़क चलते किसी कुत्ते को देखकर ऐसा नहीं करता हूं. सड़कों पर कुत्ते आम हैं. इसी तरह समाज में प्रेम आम है और इसका सार्वजनिक प्रदर्शन भी. एक-दूसरे का हाथ पकड़कर घूमते लड़के-लड़कियों को अजूबा मत बनाइये. उन्हें चिड़ियाघर का चिम्पांजी मत बनाइये. उन्हें आम रहने दीजिए. उन्हें टिकट लेकर देखने मत जाइए. उन्हें बस घूमने दीजिये.
टीना डाबी और अतहर आमिर खान वही लड़का-लड़की बन गए हैं जिन्हें देखकर हम सभी अपने बाजू वाले को कोहनी मार रहे हैं. उनके बारे में हर जगह खबरें लगी हुई हैं. UPSC टॉप करने वाली लड़की, दूसरे नंबर पर आने वाले लड़के से शादी करने वाली है. ये आज एक खबर है. तब जब देश में त्राहिमाम मचा हुआ था, देश को लाइन में लाकर खड़ा कर दिया गया था, उस वक़्त में ट्रेंड करने वाली खबर ये थी कि दो लोग प्यार में हैं. क्यूं? क्यूंकि UPSC में वो दोनों अव्वल आये थे. एक काम करिये, आईने में अपना चेहरा देखिये. और इस बात को खुद को समझाइये कि आप सचमुच ऐसे वक़्त में रह रहे हैं जहां प्रेम में होना ख़बर बन जाता है. कुछ सवाल हैं -
क्या टीना डाबी प्यार नहीं कर सकतीं?
क्या अतहर आमिर खान प्यार नहीं कर सकते?
क्या ये दोनों आपस में प्यार नहीं कर सकते?
क्या UPSC टॉप करने वाले प्यार नहीं कर सकते?
क्या दो मजहब के लोग आपस में प्यार नहीं कर सकते?
उतना ही नॉर्मल जितना हमारा सांस लेना, आंखों से देख पाना, मछली का पानी में रहना, आग का गर्म और बर्फ़ का ठंडा होना.
ऐसी खबरें परोसी जाती रहेंगी. क्यूंकि हमें प्यार करना अजूबा लगता है. हमारे लिए नफ़रत, हिंसा बहुत आसान है. आखिरी बार कब सेंसर बोर्ड ने किसी फ़िल्म में दिखाई जा रही हिंसा के सीन को काटा था? और किसिंग सीन्स को? हम आज भी संस्कारी हैं. और मॉडर्न होने का चोगा ओढ़े बैठे हैं. ऐसे में जब मुझे एक लड़की और एक लड़के के प्यार में होने खबर मिलती है तो मेरा संस्कारी वर्ज़न उसे पढ़ना चाहता है. जानना चाहता है कि आखिर माजरा क्या है. और मेरा मॉडर्न वर्ज़न कूल दिखने के लिए उसे फैलाता है. आपके संस्कारी और मॉडर्न वर्ज़न के लिए.
इन सवालों को होल्ड करिए. और खबर पर आइये. हम सांस लेते हैं. क्या ये बात कभी खबर बनी है? हम आंखों से देख सकते हैं. क्या ये बात कभी खबर बनी है? मछली पानी में रहती हैं. क्या ये बात कभी खबर बनी है? आग गरम और बर्फ़ ठंडी होती है. क्या ये बात कभी खबर बनी है? नहीं. कभी नहीं. क्यूं? क्यूंकि ये नॉर्मल है. हम सभी को मालूम है कि ऐसा ही होता है. ऊपर जो सवाल हैं, वो भी बेहद नॉर्मल हैं. टीना डाबी, अतहर आमिर खान को प्यार करने का पूरा हक़ है. दोनों को एक दूसरे से प्यार करने का पूरा हक़ है. UPSC टॉप करने वालों को भी प्यार करने का उतना ही हक़ है. आइ रिपीट, ये नॉर्मल है. साहब, बहुत आसान होता है किसी की भी फेसबुक प्रोफाइल से फ़ोटो उठाकर एक पिक्चर गैलरी बना देना. और लिख देना 'देखें तस्वीरें'. ठंडी और गर्म. हम पिल पड़ते हैं. हम कीवर्ड्स के भूखे हैं. हमारा नाश्ता हैशटैग होता है और डिनर कीवर्ड्स. हम ट्रेंड के भरोसे जी रहे हैं. हममें वो उत्सुकता है. अगले के जीवन में क्या चल रहा है, इसे जानने की. सेंध मारने की. घुसपैठ करने की. इसे भुनाया जा रहा है. हमारे क्लिक की कीमत लग रही है. हमारी टपकती हुई लार ये इशारा है कि खबर चलेगी. ऐसी ही टर्मिनोलॉजी इस्तेमाल होती है. खबर चलती है. एक लड़की और लड़के के प्यार में होने की खबर. UPSC के टॉपर्स शादी करेंगे. अरे करने दीजिये. आपको क्या है? क्या ये कोई भ्रष्टाचार का मामला है? या ये सरकार का कोई ऐतिहासिक फैसला है? क्या दोनों देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं? या विश्व शान्ति की राह में बाधा बन रहे हैं? क्या इन्होंने पाकिस्तान में जाने वाला पानी रोक लिया है? या नॉर्थ ईस्ट में पत्थरों को लाल रंग दिया? क्या फ़िल्म के पहले नैशनल एंथम में वो खड़े नहीं हुए थे? नहीं न? खाली प्यार किया है. एक दूसरे से. करने दीजिये न. प्लीज़. खबर काहे बना रहे हैं? पढ़ क्यूं रहे हैं? क्या मिल रहा है? कौन से ज्ञान में वर्धन हो रहा है? कौन से चित्त का रंजन हो रहा है? कैसे हो रहा है? कितना वक़्त है आपके पास? कितने खाली हैं आप? मनोरंजन चाहते हैं तो बेहतर है आप सेक्सिस्ट, बायस्ड और छिछले जोक्स वाला कपिल शर्मा का शो देख लें. उस वक़्त कम से कम आपके ह्यूमर पर तरस आएगा. आपके मज़े लेने वाली फितरत पर नहीं. दो लोग एक दूसरे से प्यार कर रहे हैं, इसमें आपको क्यूं, कैसे और किस हक़ से दिलचस्पी होने लगी साहब?