ईरान की जनता सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन कर रही है. अब तक ईरान में चल रहे इस प्रदर्शन की वजह से करीब 2 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. जिसकी वजह से अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप लगातार ईरान पर हमला करने का संकेत दे रहे हैं. अमेरिका और ईरान में बढ़ते हुए तनाव की वजह से ईरान ने गुरुवार, 15 जनवरी की सुबह अचानक अपना एयरस्पेस बंद कर दिया. साथ ही अस्थायी तौर पर 'No Flying Zone' की घोषणा भी कर दी.
ईरान ने अचानक बंद किया एयरस्पेस, ये नो-फ्लाई जोन कब लगता है, इसे नहीं माना तो क्या होगा?
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन और अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच कुछ घंटों के लिए एयरस्पेस बंद किया गया. ‘नो फ्लाइंग जोन’ की वजह से दुनियाभर की फ्लाइट्स प्रभावित हुईं. भारत की एक इंडिगो फ्लाइट उस दौरान ईरानी एयरस्पेस से गुजरने वाली इकलौती उड़ान रही. बाद में ईरान ने एयरस्पेस दोबारा खोल दिया.


इसका असर भारत समेत दुनियाभर के फ्लाइट्स पर पड़ा. साथ ही ईरान ने एक नोटिस टू एयरमेन(Notice to Airmen) जारी किया गया. जिसके मुताबिक कुछ ही इंटरनेशनल फ्लाइट्स को उसके एयरस्पेस के इस्तेमाल की अनुमति मिल पाई. साथ ही ईरान और इराक के ऊपर का एयरस्पेस भी तेजी से खाली हो गए. हालांकि, 5 घंटे तक एयरस्पेस बंद करने के बाद ईरान ने अपना एयरस्पेस वापस खोल दिया.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में 'No Flying Zone' की घोषणा से ठीक पहले भारत की इंडिगो एयरलाइन की 6E1808 नंबर की फ्लाइट ईरानी स्पेस से गुजरने वाली एकमात्र फ्लाइट थी. जो जॉर्जिया से चलकर भारत आ रही थी. लाइव फ्लाइट ट्रैकिंग साइट फ्लाइट राडार 24 के मुताबिक, इंडिगो की 6E1808 नंबर की फ्लाइट बुधवार, 14 जनवरी की सुबह 11:29 बजे जॉर्जिया की राजधानी त्बिलिसी से रवाना हुई. जो गुरुवार, 15 जनवरी की सुबह 7:03 बजे दिल्ली में लैंड हुई. बता दें कि इस दौरान 14 और 15 जनवरी की दरम्यानी रात यह फ्लाइट देर रात 2:35 बजे ईरानी एयरस्पेस से गुजरी थी.

सबसे पहले आसान भाषा में समझते हैं कि यह 'No Flying Zone' होता क्या है. इस बारे में हमने भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) के विंग कमांडर अरिजीत घोष से बात की. उन्होंने 'No Flying Zone' के बारे में बताते हुए कहा,
'किसी देश में 'No Flying Zone' को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा जाता है. जिसे देश के अति संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्थानों पर लागू किया जाता है. इसके तहत किसी भी दूसरे देश का कोई भी फ्लाइट इन संवेदनशील जोन में फ्लाई नहीं कर सकता है.'
उदाहरण के तौर पर समझिए, जैसे किसी देश में राष्ट्रीय महत्व से जुड़े कई स्मारक या वीआईपी क्षेत्र होते हैं. इनकी सुरक्षा के लिए 'No Flying Zone' लागू किया जाता है. जैसे- राष्ट्रपति भवन, संसद भवन और ताजमहल. ये ऐसे क्षेत्र होते हैं. जिनके ऊपर से कोई भी फ्लाइट उड़ान नहीं भर सकती है.
अब दो देशों के बीच युद्ध के समय 'No Flying Zone' को समझते हैं. जब दो देश आपस में युद्ध की स्थिति में होते हैं. तो ऐसी स्थिति में देश अपने एयरस्पेस को 'No Flying Zone' घोषित कर देते हैं. इसमें देश की वायु सेना (Air Force) का पूरे एयरस्पेस पर अपना आधिपत्य स्थापित हो जाता है. यानि, इस स्थिति में दुश्मन देश के वायु सेना के लिए 'No Flying Zone' घोषित कर दिया जाता है. इसका सीधा-सपाट मतलब यह है कि दुश्मन देश की एयरफोर्स या कोई अन्य फ्लाइट प्रतिबंधित क्षेत्र में एंट्री नहीं कर सकती है. अगर दुश्मन देश की कोई भी फ्लाइट बंद एयरस्पेस में उड़ान भरने की कोशिश करता है, तो उस इस स्थिति में हवा में ही मार गिराया जाएगा. इस दौरान प्रतिबंध लगाने वाले देश ही अपने एयरस्पेस का इस्तेमाल कर सकता है.

अब समझते हैं कि यह Notice to Airmen होता क्या है. इस बारे में विंग कमांडर अरिजीत ने बताया कि जब कोई देश 'No Flying Zone 'की घोषणा करता है. तो उससे पहले Notice to Airmen या NOTAM जारी कर दिया जाता है. NOTAM एक तरह की ऑफिशियल सूचना होती है. जो किसी भी देश की एविएशन अथॉरिटी द्वारा जारी की जाती है. सबसे पहले समझते हैं कि इसका काम क्या होता है. 'No Flying Zone' की घोषणा होने से पहले ही एयरलाइन कर्मी को एक NOTAM जारी कर दिया जाता है. जिसमें उन्हें फ्लाइंग से जुड़ी सभी नई जानकारियां बता दी जाती है.
इस नोटिस में एयरस्पेस में बदलाव, किसी खतरे और अन्य नई सुविधाओं के बारे में जानकारी हो सकती है. इसके अलावा यह रनवे बंद होने, उपकरण में कोई खराबी, मौसम के बारे में जानकारी के साथ सैन्य गतिविधियों से जुड़ी जानकारी देता है. जिससे पायलट को फ्लाइट उड़ाने से पहले इन बातों की जानकारी हो सके.
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इसका तात्पर्य यह है कि अगर कोई पायलट अपने फ्लाइट रूट का प्लान करता है. तो उसको पहले से ही पता होता है कि वह कौन से एरिया में उड़ान भर सकता है. और कौन सा एरिया उनके लिए 'No Flying Zone'. लेकिन अगर NOTAM के बाद भी किसी अन्य देश का फ्लाइट प्रतिबंधित क्षेत्र में एंट्री करने की कोशिश करता है. या एंट्री कर लेता है, तो उस देश की एयरफोर्स पहले फ्लाइट को वॉर्निंग देंगे. साथ ही आगे की जांच करने के लिए उसे एस्कॉर्ट कर पास के हवाई क्षेत्र में लैंड कराएंगे.
अगर 'No Flying Zone' में एंट्री करने वाली फ्लाइट एयरफोर्स के निर्देशों का पालन नहीं करता है. तो वह उन्हें हवा में ही मार गिराने के लिए फ्री होते हैं.
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