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वोटर लिस्ट से डेटा चुराकर गड़बड़ी करने के आरोप में 3 गिरफ्तार

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने पूरे मामले पर क्या कहा है?

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई

बीते 16 नवंबर को हमने आपसे डेटा प्रोटेक्शन बिल के बारे में बात की थी. बताया था कि डेटा सुरक्षित होना क्यों जरूरी है. आज एक बार फिर से हम इसी मुद्दे पर वापस लौटे हैं क्योंकि ये जुड़ा हमारे-आपके उस अधिकार से जो हमारे लोकतंत्र की नींव है. वोटिंग का अधिकार, जिसके जरिए हम तय करते हैं हमारे देश का, प्रदेश का या स्थानीय निकायों का नेतृत्व कौन करेगा. अब आप सोच रहे होंगे कि बात शुरू की डेटा से और बात वोटिंग की क्यों होने लगी. वो इसलिए क्योंकि आपके डेटा को इकट्ठा कर उसकी खरीदी-बिक्री का काम बड़ी-बड़ी कंपनियां केवल मुनाफा कमाने के लिए नहीं कर रही हैं बल्कि आपके पर्सनल डेटा का इस्तेमाल फेयर इलेक्शन को प्रभावित करने के लिए भी किया जा रहा है.

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खबर बेंगलुरु से आई है. जहां एक NGO पर गैरकानूनी तरीके से वोटर्स का पर्सनल डेटा इकट्ठा करने और गलत तरीके से इस्तमाल करने का आरोप लगा है. आज बेंगलुरु पुलिस ने चिलुमे एजुकेशनल कल्चरल एंड रुरल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट के को-फाउंडर और डायरेक्टर कृष्णप्पा रविकुमार को गिरफ्तार किया. पुलिस ने बताया कि कृष्णप्पा रविकुमार, वोटर्स डेटा चोरी मामले में मुख्य आरोपी है. साथ ही पुलिस ने ये भी बताया कि चिलुमे ट्रस्ट और इसके कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है.

ये वोटर्स डेटा चोरी का क्या मामला है?

दरअसल न्यूज वेबसाइट द न्यूज मिनट और प्रतिध्वनी के 6 पत्रकारों ने 3 महीने की खोजबीन के बाद एक रिपोर्ट में खुलासा किया कि चिलुमे ट्रस्ट ने लोगों को गुमराह करके उनका डेटा इकट्ठा किया. रिपोर्ट के मुताबिक चिलुमे ट्रस्ट ने बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) से वोटर्स को जागरुक करने के लिए एक अभियान चलाने की अनुमति ली थी. ये अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट रिवाइज करने के लिए चुनाव आयोग की ओर से चलाया जाने वाला विशेष अभियान था. चिलुमे ट्रस्ट ने BBMP को फ्री में वॉलिंट्री सर्विस देने की बात कही. 29 जनवरी को चिलुमे ट्रस्ट को महादेवपुरा विधानसभा में जागरुकता अभियान चलाने की अनुमति दी गई. अनमुति में साफ कहा गया कि जागरुकता चलाने वाली एजेंसी किसी पॉलिटिकल पार्टी से जुड़ी नहीं होनी चाहिए और न ही किसी पॉलिटिकल पार्टी से पैसा लेती हो.

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द न्यूज मिनट और प्रतिध्वनी ने अपने रिपोर्ट में दावा किया है कि चिलुमे ट्रस्ट ने BBMP से मिले जागरुकता अभियान के आदेश का दुरुपयोग किया. ट्रस्ट ने बड़ी संख्या में अपने कर्मचारियों के लिए BLO के आईडी कार्ड जारी किए. BLO यानी बूथ लेवल ऑफिसर. BLO यानी ग्राउंड पर मौजूद चुनाव आयोग का जमीनी स्तर का अधिकारी. आसान भाषा में इसे ऐसे समझिए कि इलेक्शन बूथ पर वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने, हटवाने या आईडी बनवाने का जिम्मा BLO का ही होता है. ये सरकारी, अर्ध-सरकारी या रिटायर सरकारी कर्मचारी होते हैं. लेकिन चिलुमे ट्रस्ट ने अपने कर्मचारियों को BLO का फर्जी आईडी कार्ड जारी कर ग्राउंड पर भेज दिया.

चिलुमे के ये कर्मचारी खुद को BLO बताते और लोगों के घर-घर जाकर उनकी पर्सनल जानकारी इकट्ठा करने लगे. ये किस तरह की जानकारी होती? इसमें वोटर की जाति, मातृभाषा, वैवाहिक स्थिति, उम्र, लिंग, रोजगार और पढ़ाई-लिखाई की जानकारी शामिल थी. इतना ही नहीं ये लोग वोटर का फोन नंबर, आधार नंबर, ईमेल आईडी की जानकारी भी इकट्ठा करते.

न्यूज मिनट और प्रतिध्वनी की रिपोर्ट के मुताबिक चिलुमे ट्रस्ट के एक कर्मचारी ने बताया,

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"हम BBMP का आईडी कार्ड पहनकर लोगों के बीच जाते और वोटर्स से जानकारी इकट्ठी करके लाते. ये सारा डेटा डिजिटल समीक्षा ऐप पर अपलोड कर दिया जाता."

डिजिटल समीक्षा ऐप गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद है. ये ऐप भी उसी पते पर रजिस्टर है जहां चिलुमे ट्रस्ट है. ये ऐप पॉलिटिकल पार्टियों, सांसदों, विधायकों और लोकल लेवल के इलेक्शन कैंडिडेट्स का इलेक्शन मैनेजमेंट का काम देखती है.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 20 अगस्त को बैकग्राउंड चेक किए बिना ही चिलुमे ट्रस्ट को BBMP के अधिकार क्षेत्र में आने वाली सभी 28 विधानसभा सीटों पर अभियान चलाने का काम दे दिया गया. अब चिलुमे ट्रस्ट पूरे बेंगलुरु शहर में  घूम-घूम कर लोगों का डेटा इकट्ठा करने लगी. लोगों को लगता कि ये लोग सरकारी कर्मचारी हैं. जबकि असली BLO को इन सब की कोई जानकारी ही नहीं होती.इसी बीच बीते 20 सितंबर को समन्वय नाम के एक NGO ने BBMP और चुनाव आयोग के पास एक शिकायत दर्ज कराई कि चिलुमे ट्रस्ट की ओर से उनके वर्कर्स को पैसे नहीं दिए जा रहे हैं. समन्वय, सर्वे करने के लिए चिलुमे ट्रस्ट को मैनपॉवर उपलब्ध कराती थी. समन्वय ने ये सवाल भी उठाया कि एक प्राइवेट एजेंसी, वोटर्स का पर्सनल डेटा क्यों इकट्ठा कर रही है?

जिसके बाद 4 नवंबर को BBMP ने चिलुमे ट्रस्ट को मिला परमिशन कैंसिल कर दिया. बीते 16 नवंबर को द न्यूज मिनट और प्रतिध्वनि ने जब इस पूरे मामले का खुलासा किया तो विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी ने राज्य सरकार में मंत्री डॉ. सीएन अश्वथनारायण के साथ पर चिलुमे ट्रस्ट से जुड़े होने का आरोप लगाया और मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई से इस्तीफे की मांग की. कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने मामले की शिकायत चुनाव आयोग से की है और मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार से मिलने के लिए समय मांगा है. जवाब में कर्नाटक बीजेपी प्रभारी अरुण सिंह ने इसे बेवजह का मुद्दा बताया. वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री का कहना है कि मामले की जांच हो रही है. इसके अलावा इस तरह के सर्वे तब से हो रहे हैं जब कांग्रेस की सरकार थी.

फिलहाल BBMP की शिकायत पर बेंगलुरु पुलिस ने चिलुमे ट्रस्ट और इसके कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और अब तक 3 लोगों को गिरफ्तार किया है. ये हमने अब तक जो कुछ हुआ उसके बारे में बताया. अब ये भी समझ लेते हैं कि हमारा आपका पर्सनल डेटा अगर किसी तीसरे व्यक्ति के पास पहुंच जाता है तो इससे क्या खतरा हो सकता है?

डेटा को नए जमाने का ऑयल कहा जाता है. आपने सुना भी होगा, डेटा इज़ द न्यू ऑइल. माने जैसे तेल से शोहरत बरसी, वैसे डेटा से भी हो सकता है. डेटा यानी आपकी पहचान. आपके बारे में जानकारी. आप क्या पहनते हैं, क्या खाते हैं, क्या पीते हैं, क्या पसंद हैं क्या नापसंद है, क्या खरीदना चाहते हैं, कहां रहते हैं, सबकुछ. बड़ी-बड़ी कंपनियां आपका डेटा हासिल करने की जुगत में लगी रहती हैं. ताकि वे आपके बिहैवियर के हिसाब से अपना प्रोडक्ट बेच सकें. यही खेल बेंगलुरु में भी दिख रहा है. जहां लोगों के काम, उनकी सामाजिक-धार्मिक पहचान, जरूरतों और व्यक्तिगत विचारों को इकट्ठा कर उसे पॉलिटिकल पार्टियों या इनडिविजुअल कैंडिडेट्स तक पहुंचा दिया गया. ताकि वे उसी हिसाब से अपना इलेक्शन प्लान तैयार कर सकें. यहीं नहीं विपक्षी दलों की ओर से लोगों की पहचान कर उनका नाम वोटर लिस्ट से हटाने के आरोप भी लगाए गए हैं.

इसके अलावा कुछ सवाल हैं जिनके जवाब आने जरूरी हैं. जैसे- अगर चिलुमे ट्रस्ट BBMP या इलेक्शन कमीशन से पैसे नहीं ले रहा था तो फिर उसके पास इतने सारे कर्मचारियों के लिए फंड कहां से आ रहा था? एक NGO, जिसमें शामिल लोग इलेक्शन मैनेजमेंट का काम देखते हैं, वो इतने दिनों तक वोटर्स का डेटा इकट्ठा करती रही और BBMP या चुनाव आयोग को पता तक नहीं चला? मुख्यमंत्री ने मामले की जांच की बात कही है. एक नागरिक के तौर पर हमारी यही उम्मीद है कि इन सवालों के जवाब सामने आएंगे.

वीडियो: वोटर लिस्ट से डेटा चुराकर गड़बड़ी करने के आरोप में 3 गिरफ्तार

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