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ऐसी फैली नोटों की बीमारी, इंडिया में फंस गई यूक्रेन की नारी

नताली को लगता है कि इन्क्रेडिबल इंडिया कहने वाली टूरिज्म मिनिस्ट्री अपनी टैगलाइन को लेकर बहुत सीरियस है.

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फोटो - thelallantop

vivek shuklaदी लल्लनटॉप पर आपकी खिदमत करने आए हैं एक नए मेजबान. नाम है विवेक शुक्ला. इलाहाबाद, रायपुर और भोपाल की मिट्टी सूंघने के बाद आजकल दिल्ली में बसेरा है इनका. पेशे से पत्रकार हैं, लेकिन फितरत एकदम खानाबदोशों वाली है इनकी. फेसबुक पर ढूंढना हो, तो vivek लिखने की गलती मत करना. ये Wiwek के नाम से मिलेंगे. देखिए आपके लिए क्या लाए हैं.

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अगर राहुल गांधी नोटबंदी को राष्ट्रीय मुद्दा भर समझकर नोटबंदी वापसी की लड़ाई लड़ रहे हैं, तो ये खबर उनके लिए रामबाण है, जादुई गोली है, चमत्कारी चारागरी का नुस्खा है. ललनटॉप वेबसाइट से, इंटरनेट के जरिए, वॉट्सऐप से या फिर आपकी कही-सुनी बात-बकैती से ये खबर राहुल गांधी तक पहुंच भर जाए और वो प्रधानमंत्री पर वो वार करेंगे कि फिर ईष्ट की प्राप्ति हुए बिना नहीं रुकेगी.

क्योंकि इस खबर के बाद नोटबंदी देशों की सीमा लांघते हुए राष्ट्रीय से सीधे अंतरराष्ट्रीय बन जाएगी.

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जी हां, ये खबर है नताली की. 42 साल की नताली यूं तो उक्रेन की हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों से हिंदुस्तान में हैं. सटीक ठिकाना हिंदुस्तान के दिल दिल्ली का पहाड़गंज. जब दुबई के रास्ते नताली ने नई दिल्ली का हवाई टिकट कटाया था, तो एयरपोर्ट पर फ्लाइट के इंतजार में बैठी गूगल पर हिमालय की तस्वीरें खंगाल रही थीं. इरादा था कि पहाड़गंज से सीधे हिमालय का रुख करेंगी.

लेकिन, मैन प्रपोजेज और मोदी जी डिस्पोजेज.

मोदी जी की नोटबंदी के आदेश ने नताली के सपनीले हिमालय पर ऐसा पानी फेरा कि तमाम इरादे रेत की तरह पहाड़गंज की तंग गलियों में बिखर गए. रोजाना विदेशी मुद्रा एक्सचेंज करने की सीमा भी तय हो गई. पास रखे 500 और 1000 के नोट बेकार और ATM के बाहर सवा सौ करोड़ हिंदुस्तानियों की भीड़. मोदी जी भले ही प्लास्टिक मनी के इस्तेमाल का अनुरोध कर रहे हों, लेकिन सच यही है कि पहाड़गंज में भी होटलवाले डेबिट-क्रेडिट कार्ड को वित्त-बैरी की निगाह से ही देखते हैं.

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https://www.youtube.com/watch?v=vW2vCBOAfDc

तो साहब, नोटबंदी में नताली ऐसी फंसीं कि अब पहाड़गंज में गली-गली खाक छान रही हैं. हालात सुधरने का इंतजार कर रही हैं. लेकिन एक बात है. यूक्रेन की इस नारी के हौसले बुलंद हैं. गुरुवार की सुबह सिर्फ एक अमरूद खाया था और दोपहर में पारले जी बिस्किट के साथ चाय नसीब हुई थी. लेकिन बंदी डटी हुई है. जेब में कितना बचा है पूछने पर कहती हैं, 'अभी मैं काफी अमीर हूं. मेरे पास 600 रुपए हैं.'

अब इन 600 रुपयों से नताली भला क्या भारत घूमेंगी. और जब हिंदुस्तान के रहवासियों से ही मोदी जी ने 50 दिन का समय मांग लिया है, तो हालात डेढ़ महीने से पहले क्या ही बेहतर होंगे. लिहाजा नताली अपने ग्रुप के साथ नेपाल का रुख करने का मन बना चुकी हैं. थोड़े बुझे और खट्टे मन के साथ.

नताली ने इंडिया तो नहीं देखा, लेकिन वो सोचती हैं, इन्क्रेडिबल इंडिया कहने वाली टूरिज्म मिनिस्ट्री अपनी टैगलाइन को लेकर वाकई बहुत सीरियस है.

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