2025 का नोबेल शांति पुरस्कार वेनेज़ुएला की विपक्षी नेता मारिया मचाडो को मिला था. अब ये पुरस्कार अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के पास है. मारिया ने खुद उनके घर जाकर उन्हें ये पुरस्कार दिया है. कुछ महीने पहले तक ट्रंप नोबेल का राग अलापते नहीं थक रहे थे. फिर 10 दिसंबर को नोबेल पीस सेंटर ने विजेता का नाम घोषित कर उनके इस राग पर रोक लगा दिया था. लेकिन ट्रंप तो ट्रंप हैं. अंग्रेजी की ये कहावत ‘by hook or by crook’ इन पर बिलकुल फिट बैठती है. 15 जनवरी को जब मारिया ट्रंप से मिलकर वॉइटहाउस के बाहर निकलीं तो उन्होंने ट्रंप को पीस प्राइज का सही हकदार बताया और अपना नोबेल उन्हें सौंप दिया. लेकिन क्या नोबेल पुरस्कार ट्रांसफर किया जा सकता है? कमिटी का इसपर क्या कहना है? और मचाडो ट्रंप की करीबी क्यों बन रही हैं?
नोबेल जीतने वाली मारिया ने ट्रंप को सौंप दिया शांति पुरस्कार, क्या ऐसा करना मुमकिन है?
Venezuela की विपक्षी नेता मारिया मचाडो ने अपना नोबेल पुरस्कार Donald trump को दे दिया है. लेकिन क्या नोबेल पुरस्कार शेयर किया जा सकता है? और मारिया ने ऐसा क्यों किया?


एबीसी न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक़, 15 जनवरी को ट्रंप और मारिया की वॉइटहाउस में मुलाक़ात हुई. ध्यान रहे ये सब कुछ तब हो रहा है जब वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो अमेरिकी जेल में हैं. मुलाक़ात के बाद वॉइटहाउस के एक अधिकारी ने बताया कि ट्रंप ने पुरस्कार स्वीकार कर लिया है. मीटिंग के दौरान और क्या बात हुई इसका ज़िक्र नहीं किया गया. ट्रंप ने अपने सोशल बडी ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए बताया कि मारिया ने उन्हें नोबेल पीस प्राइज दिया है. ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा,
ये आपसी सम्मान का एक शानदार भाव है. मारिया एक शानदार औरत हैं और उन्होंने मेरे काम के लिए मुझे अपना पुरस्कार दिया है. शुक्रिया मारिया.

मीटिंग के बाद जब ट्रंप से जब बातचीत के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बस इतना कहा" बहुत अच्छी रही". इसके अलावा कोई बात नहीं बताई. फॉक्स न्यूज़ के मुताबिक़, मारिया ने बताया कि उन्होंने ट्रंप को ये पुरस्कार ऐतिहासिक रिश्ते को निभाते हुए दिया है. उन्होंने कहा,
200 साल पहले की बात है. अमेरिकी जनरल लाफायेत ने एक मेडल वेनेज़ुएला के साइमन बोलिवर को दिया था. मेडल पर अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन की तस्वीर बनी हुई थी. ये मेडल अमेरिका और वेनेज़ुएला के बीच के भाईचारे को दर्शाता था. साइमन ने ताउम्र अपने साथ वो मेडल रखा. अब बोलिवर के ही लोग वॉशिंगटन के वारिस को लौटा रहे हैं.
मारिया ने बताया कि वेनेज़ुएला को आज़ादी दिलवाने के लिए ट्रंप जो हिम्मत दिखा रहे हैं उसके लिए ये मेडल उनके नाम है. पिछले हफ्ते भी मारिया ने ट्रंप के साथ अपना मेडल शेयर करने की इच्छा जताई थी. लेकिन नोबेल कमिटी ने इसपर साफ़ इंकार कर दिया था.
ऐसा एक वाक़िया और है. मारिया के अलावा अमेरिका के लेखक अर्नेस्ट हेमिंग्वे ने अपना नोबेल दान कर दिया था. साल 1954 में उन्हें लिटरेचर में नोबेल मिला था. उन्हें ये नोबेल द ओल्ड मैन एंड द सी के लिए मिला था. उन्होंने इसमें क्यूबा के लोगों की कहानी बयां की थी. लेकिन बाद में खराब सेहत के कारण उन्होंने अपना नोबेल क्यूबा के लोगों को दान कर दिया.

इसके साथ एक दिलचस्प किस्सा भी जुड़ा है. इस मेडल को एक कैथोलिक चर्च में रखा गया था. लेकिन साल 1986 में मेडल चोरी हो गया था फिर बाद में मिल भी गया. हालांकि तब से पब्लिक डिस्प्ले में सिर्फ डिप्लोमा रखा गया है.
नियम क्या कहता है?जब मारिया ने ट्रंप के साथ अपना पुरस्कार शेयर करने की बात कही तब नार्वेजियन नोबेल कमिटी ने 9 जनवरी को एक प्रेस रिलीज़ जारी कर बताया था कि,
एक बार नोबेल पुरस्कार की घोषणा हो जाने के बाद इसे रद्द नहीं किया जा सकता. बांटा नहीं जा सकता. या दूसरों को दिया नहीं किया जा सकता. यह फैसला आखिरी होता है और हमेशा के लिए लागू रहता है.

नोबेल कमिटी ने अपने बयान में लिखा कि उसके और नॉर्वेजियन नोबेल इंस्टीट्यूट के पास नोबेल शांति पुरस्कार के विजेता के स्थाई तौर पर पुरस्कार रखने को लेकर काफी सवाल आते हैं. इसके बाद कमिटी ने आगे कहा कि उसका फैसला आखिरी होता है और हमेशा रहता है. हालांकि एक पोस्ट में नोबेल कमिटी ने बताया है कि मेडल पर अलग अलग लोगों का अधिकार हो सकता है लेकिन नोबेल पीस पुरस्कार की उपाधि नहीं बदली जा सकती है और न किसी और को दी जा सकती है.
हालांकि नोबेल के लिए दिया गया नाम वापस लिया जा सकता है. इसमें सबसे कुख्यात मामला है एडोल्फ हिटलर का. 1939 में एरिक ब्रांड ने नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अडोल्फ हिटलर का नाम सुझाया था. लेकिन इस प्रस्ताव पर ही हड़कंप मच गया. लोगों ने विरोध प्रदर्शन करने शुरू कर दिए जिसके बाद एरिक ने अपनी सफाई पेश की. उन्होंने बताया कि वो एक तंज़ था. इसके तुरंत बाद ही विश्व युद्ध छिड़ गया जिसके बाद उन्होंने खुद नाम वापस ले लिया.
क्या नोबेल ठुकराया जा सकता है? जवाब है हां. अब तक दो लोगों ने नोबेल ठुकराया है. एक फ्रेंच लेखक जॉन पॉल और दूसरे यूएस सेक्रेटरी हेनरी किसिंगर. जॉन पॉल का कहना था कि उन्हें किसी संस्था के अंतर्गत नहीं आना है.
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मारिया का राजनीतिक हित2011 में मारिया वेनेज़ुएला की राष्ट्रीय विधानसभा (National Assembly) की सदस्य चुनी गईं. इस दौरान उन्होंने सरकारी दमन और भ्रष्टाचार के खिलाफ तीखा रुख अपनाया. 2014 में एक विरोध प्रदर्शन में उनकी भूमिका के कारण उन्हें नेशनल असेंबली से निकाल दिया गया. मारिया ने इसके बाद 2013 में 'वेंते वेनेज़ुएला' (Vente Venezuela) नाम के एक उदारवादी राजनीतिक दल की स्थापना की और उसकी नेशनल कन्वीनर बनीं. उन्होंने हमेशा निकोलस मादुरो सरकार की कड़ी आलोचना की है.
इसी आलोचना के चलते वो हमेशा सरकार से छुपती रहीं. लेकिन ट्रंप सरकार जब निकोलस को बंदी बनाकर ले गई तब मारिया को लगा कि अब उनका दौर शुरू हो सकता है. मारिया ने कहा कि अब वेनेज़ुएला की कमान विपक्षी पार्टी के हाथ में होना चाहिए. उन्होंने ट्रंप को उनकी हिम्मत के लिए सराहा भी. लेकिन ट्रंप ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया. ट्रंप ने मीडिया को दिए एक बयान में कहा,
मुझे लगता है कि मारिया के लिए नेता बनना बहुत मुश्किल है. मारिया की कोई इज़्ज़त नहीं है और उन्हें देश में कोई ठीक से सपोर्ट भी नहीं करता है.
ट्रंप ने तुरंत ही डेल्सी रोड्रिग्जके हाथ में वेनेज़ुएला की कमान सौंप दी. ट्रंप ने कहा कि डेल्सी के पास वो क्षमता है कि वो वेनेज़ुएला को चला सकती हैं. ट्रंप ने जब मारिया को दरकिनार कर दिया. उसके बाद से ही वो ट्रंप से नज़दीकियां बढ़ाने पर ज़ोर देने लगीं. मारिया के ट्रंप को नोबेल पीस देने वाली बात भी इसी ओर इशारा करती है.
वीडियो: डॉनल्ड ट्रंप को नहीं मिला नोबेल पीस प्राइज, वेनेजुएला की मारिया कोरिना मचाडो रहीं विजेता












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