The Lallantop

खुदा हमको ऐसी खुदाई न दे, फैमिली को बीच का भाई न दे

बड़े और छोटे के बीच में नर्क होती बीच के भाई जिंदगी वही समझ सकता है. जो खुद बीच का हो. अब भेभन आंसू मत बहाओ. पढ़ जाओ.

Advertisement
post-main-image
फोटो - thelallantop
जानते हो महाभारत का युद्ध क्यों हुआ. दुर्योधन धृतराष्ट्र का बड़ा लड़का था. और युधिष्ठिर पांडु का. दोनों बड़े लड़कों की जिद और खुरपेंच की वजह से महाभारत हुआ. अगर दोनों मझले लड़के होते, तो बड़े भाइयों से लेज चिप्स और पारले जी के पैकेट छीनने में ही उम्र निकल जाती. ये मजाक नहीं है. आदिकाल से ही बीच वाले भाई शोषण का शिकार होते रहे हैं अपनी फैमिली में. बीच वाले माने, एक भाई बड़ा और एक छोटा. बीच में ये, दालभात में मूसलचंद. बीच का होने में इतना रिस्क और खतरा है कि उतने में तीन कश्मीर समस्याएं तैयार हों. ऐसा लगता है जैसे खैरात का, न मां का न बाप का. मम्मी पापा ऐसे होते हैं कि बचपन से ही अपना प्यारा वाला बच्चा चुन लेते हैं. बड़े पुतऊ पापा के चिपक रहते हैं. पापा बचपन से ही उनको अपने काम के लायक ढाल लेते हैं. दुकान से बीड़ी, सिगरेट, पान, तंबाकू लाकर पापा को देते हैं और उनके दुलारे बनते हैं. मम्मी का कुछ एक्स्ट्रा दुलार होता है उनपर. पहिलौठी का लड़का होता है न, इसलिए. मम्मी छोटू को कलेजे से लगा लेती हैं. कहती हैं, पेट पोछना है. तो लास्ट में इस दुनिया में आने की वजह से मोह माया और दया, ये सब छोटू लूट लेते हैं. मम्मी के दुलारे छोटू और पापा के पियारे बड़े भैया कैसे मिलकर बीच वाले मूसलचंद की बैंड बजाते हैं. ये पढ़के आंखों से ओशियन थर्टीन बह निकलेगा बाबू. हां, मम्मी पापा का प्यार एक्सचेंज हो सकता है. बड़े का छोटे में, छोटे से बड़े में. लेकिन मूसलचंद की किस्मत पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. छोटू छलिया मम्मी के फेवरेट. वो तुम्हारे लकड़ी तोड़ दें. तुम्हारे चाय में झाड़ू की सींक से गोबर उछालकर डाल दें. तुम्हारी किताब के पन्नों से पानी का जहाज बनाएं या हवाई जहाज. तुम्हारी पैंट में कुत्ते के पिल्ले भरकर फर्श पर घसीट डालें. या तुम्हारी साइकिल(बड़े भाई की रिटायर) से हवा निकाल दें. अगर तुम्हारी उंगलियों ने छोटू को छू लिया. या नहीं भी छुआ. उन्होंने मन में मैथ की टीचर की तरह 'मान लिया.' और रोना शुरू कर दिया. तो तब तक पिटोगे बेट्टा जबतक उस इंजन से पें पें की आवाज आती रहेगी. बड़े भैया का अत्याचार कभी न खत्म होने वाली विभीषिका है. याद करो, कई सौ साल तपस्या करने के बाद तुम्हारा भैया की पुरानी साइकिल से पीछा छूटा था. पापा से रीं रीं करते हुए मुद्दत गुजर गई. तब वो एक साइकिल लेकर आए. नई, तुम्हारे लिए. और तुम खुशी से फूले हुए थे. कि चलो फाइनली अपने दिन बहुरे. अगले दिन से बड़े भैया ने वही साइकिल लेकर स्कूल जाना शुरू कर दिया. तुमने शिकायत की, घुड़क दिए गए. फिर बड़े भैया ने ऐसी साजिशें रचीं जिनका तोड़ ACP प्रद्युम्न भी न निकाल पाएं.
तुम्हारी हर चीज में बड़े और छोटे भाई का हिस्सा होता है. लेकिन उनकी चीज सिर्फ उनकी होती है. अबे बड़ी जैकेट ले आए तो वो तुम्हारे काम की नहीं. छोटा कप लेकर आए तो उसके लिए रोओगे? भकुवा हो क्या? तुम्हारे लिए बरामदे में झूला लगेगा. ताकि तीनों भाई बारी बारी से झूलो. उसमें भी बड़े भाई का मुक्का और छोटे का पें पें इंजन आपकी बारी छोटी- दर छोटी करते जाते हैं.
ये सब बचपन की समस्याएं नहीं हैं. जैसे जैसे बढ़ते हो, इनका साइज भी बढ़ता है. साइकिल से बाइक पर आओ. तुम्हारी बाइक का तेल फूंककर कोई भी वापस लाकर खड़ी कर देगा. औकात हो तो चूं कर दिखा देना. बड़का ले गया होगा तो पापा के डायलॉग्स: "अरे पेट्रोल के पैसे तो ले गया था मुझसे. डलाया नहीं?" "तुम्हारे टायर तो घिस नहीं गए अगर वो लेकर चला गया." "तुमको बाइक की जरूरत ही क्या है? दिन भर फर्राए घूमते हो बेमतलब. दे दो उसको." छोटू ले गए तो मम्मी के डायलॉग्स: "अरे ले जाने दो. छोटा भाई है तुम्हारा." "तुमको जब पापा से दिलाई थी तो कहा था न मिलके चलाना तुम लोग." "यही करते रहे तो तुमसे छुड़ा के उसे दे दूंगी." लेओ. मुंह बनाके बइठो. तुम इसी के लिए पैदा हुए हो बेटा. और हां, तुम अकेले नहीं हो इस दुनिया में. लगभग हर बीच वाले भाई का किस्सा मुख्तसर यही है. अगर किसी का नहीं है. तो उसका मुंह मीठा करो बे, यूनीक पीस है वो इंसानियत के बीच.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement