The Lallantop

कश्मीर पंडितों की हत्या करने वाले TRF की पूरी कहानी, जिस पर सरकार ने बैन लगा दिया

लश्कर ने इस आतंकी संगठन को खड़ा किया है.

Advertisement
post-main-image
सांकेतिक तस्वीर. (फाइल फोटो- PTI)

12 अक्टूबर, 2019. श्रीनगर के लाल चौक पर ग्रेनेड से हमला होता है. 8 लोगों घायल हो जाते हैं. 

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

31 दिसंबर, 2020. श्रीनगर के सराई बाला इलाके में एक सुनार की दुकान में घुस कर, गोलीमार कर उसकी हत्या कर दी जाती है. 

5 अक्टूबर, 2021, मेडिकल स्टोर चलाने वाले कश्मीरी पंडित माखन लाल बिंद्रू की हत्या कर दी जाती है. 

Advertisement

सोशल मीडिया पर इन हमलों और हत्याओं में एक चीज़ कॉमन थी. इन सबकी जिम्मेदारी एक नए आतंकी संगठन ने ली थी. जिसका नाम है ‘द रज़िस्टेंस फ्रंट.’ जिसे TRS के नाम से जाना जाता है.

कश्मीर में हो रही टार्गेट किलिंग्स के बीच, कल यानी 5 जनवरी को केंद्र सरकार ने TRF पर प्रतिबंध लगा दिया. गृह मंत्रालय ने अपने नोटिफिकेशन में कहा कि लश्कर-ए-तैयबा का ये प्रॉक्सी संगठन आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है, युवाओं को आतंकी बना रहा है, आतंकियों की घुसपैठ कर रहा है और पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर में हथियार और ड्रग्स स्मगल कर रहा है. प्रॉक्सी का मतलब छद्म. यानी नया नाम, वही काम.

तो मोटा-माटी सरकार के इस नोटिफिकेशन ने TRF का काला चिट्ठा खींच दिया है. और जो आप इस संगठन के बारे में जानना चाहते हैं वो हम बता देते हैं.

Advertisement
क्या है TRF?

5 अगस्त, 2019 को कश्मीर से अनुच्छेद 370 और अनुच्छे 35 को निष्प्रभावी कर दिया गया. कश्मीर के इतिहास में एकाएक इस तरह के बदलाव की संभावना के बारे में भी किसी ने सोचा नहीं था.  इस बीच साल दर साल कश्मीर में आतंकियों के मारे जाने के संख्या बढ़ रही थी. लश्कर और जैश भी मुश्किल में थे. और अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करना पाकिस्तान, ISI और आतंकी संगठनों के लिए किसी सदमे से कम नहीं था. ऐसे में अस्तित्व में आया TRF.

बताया जाता है कि अगस्त 2019 के बाद से कश्मीर में हो रही लगभग सभी आतंकी गतिविधियों में TRF का ही हाथ रहा. उसी साल अक्टूबर में लाल चौक पर हमला कर के ये बताने की कोशिश की गई कि अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी होने के बाद चुप नहीं बैठेंगे.

सरकार ने नोटिफिकेशन में कहा है कि ये संगठन लश्कर ने नाम बदल कर शुरू किया है. लेकिन कश्मीर में आतंकी गतिविधियों पर नज़र बनाने वाले बताते हैं कि यह एक अमरेला आउटफिट है. लश्कर हो या जैश, सभी TRF के झंडे तले काम कर रहे हैं. और इसे खड़ा करने के पीछे हाथ है ISI का.

मकसद क्या है?

अनुच्छेद 370, कश्मीरी पंडितों की वापसी और कश्मीरी युवाओं को आतंकी बनाना. ये वो कीवर्ड हैं जिनके लिए TRF काम कर रहा है. अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी होने के विरोध में क्या योजना हो, कैसे विरोध किया जाए और लोगों को कैसे भड़काया जाए. सरकार अगर कश्मीरी पंडितों को बसाने की बात कर रही है तो कैसे लोगों के मन में डर बैठाया जाए, ताकी वो खुद ही कश्मीर आने से डरें. जो पंडित और कश्मीरी अल्पसंख्यक कश्मीर में रहकर कामकाज कर रहे हैं, उन्हें डराया जाए ताकी वो यहां से भागने पर मजबूर हो जाएं. कुल मिलाकर TRF का मकसद यही है.

टार्गेटेड किलिंग्स

कश्मीर में 90 के दशक के सबसे खराब दौर के बाद जिस चीज़ का जिक्र खबरों में आ रहा है वो है टार्गेटेड किलिंग्स. यानी लोगों को चुन कर मारना. कभी किसी सुनार की हत्या, कभी किसी शिक्षक की, कभी दूसरे राज्य से आए लोगों की हत्या. बीते महीनों से हो रहीं इस तरह की घटनाओं के पीछे TRF है.

संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार ने बताया है कि अगस्त 2019 से जुलाई 2022 के बीच 5 कश्मीरी पंडितों और 16 हिंदुओं और सिखों की हत्या की गईं है. 2022 के मई महीने में सैंकड़ों कश्मीरी पंडित जो सरकारी मुलाजिम थे, घाटी छोड़कर जम्मू चले गए. क्योंकि उन्हें धमकियां दी जा रही थीं और हत्याओं ने उनके मन में डर बैठा दिया था. ये कश्मीरी पंडित सरकार से मांग कर रहे हैं कि उन्हें कश्मीर से दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया जाए.

और TRF के पीछे काम करने वाले भी ऐसा ही चाहता है कि ना तो कोई कश्मीरी पंडित वापस लौटे. और जो रह रहे हैं वो भी छोड़कर चले जाएं.

कैसे काम करता है TRF?

पहले जब कश्मीरी युवा बंदूक उठाता था तो सोशल मीडिया पर बाकायदा इस बात का ढिंढोरा पीटता था. फोटो से लेकर धमकी और जो कुछ बखान कर सकें. लेकिन अब ये पैटर्न बदल चुका है. अब युवा आतंकी संगठन में शामिल हो जाते हैं लेकिन किसी तरह की कोई शोशाबाजी नहीं. सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट नहीं. संगठन में शामिल होने के बाद भी ये मिलिटेंट्स आम लोगों के बीच रहते हैं. और जैसे ही वो अपनी पहली आतंकी घटना को अंजाम देते हैं उसके बाद अंडरग्राउंड हो जाते हैं. और इन्हीं आतंकियों को कहा जाता है हाइब्रिड आतंकी. और TRF के काम करने का तरीका यही है.

इस संगठन से जुड़े आतंकी स्मार्ट फोन का इस्तेमाल कम से कम करते हैं. क्योंकि उससे ट्रैक होने का खतरा रहता है. सालों से कश्मीर कवर करने वाले आजतक के अशरफ वानी बताते हैं कि ये लोग एक पाकिस्तानी ऐप पर पूरी बातचीत करते हैं ताकी रडार से बाहर रहें.

बात अगर TRF से जुड़े आतंकियों की करें तो सरकार ने अपने नोटिफिकेशन में बताया है कि संगठन के कमांडर शेख सज्जाद गुल को आंतकी घोषित किया जा चुका है. इससे पहले नवंबर 2021 में सुरक्षाबलों ने कुलगाम में पांच आतंकियों को मारा था, जिसमें TRF का अफाक सिकंदर भी शामिल था.

जम्मू-कश्मीर में पहले 4 हिन्दुओं की हत्या, फिर IED ब्लास्ट पर पुलिस ने क्या बोला!

Advertisement