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नई कृषि नीति के ड्राफ्ट के खिलाफ पंजाब में प्रस्ताव, क्या है विवाद की वजह?

पिछले साल के अंत में केंद्र सरकार ने कृषि पर पॉलिसी का ड्राफ्ट पेश किया. कुछ किसान नेताओं और पंजाब सरकार का कहना है कि सरकार का नया ड्राफ्ट निरस्त हुए तीन कृषि कानूनों से मिलते जुलते हैं.

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पिछले साल के अंत में केंद्र ने कृषि नीति पर ड्राफ्ट पेश किया था. (Aaj Tak)

आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार मंगलवार को पंजाब विधानसभा में केंद्र की राष्ट्रीय कृषि मार्केटिंग नीति मसौदा के खिलाफ एक प्रस्ताव ला रही है. पंजाब विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र  से शुरू 24 फरवरी को हुआ. AAP के प्रवक्ता नील गर्ग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा-

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"भगवंत मान सरकार विधानसभा में केंद्र की किसान विरोधी कृषि मार्केटिंग नीति के खिलाफ प्रस्ताव पास करेगी. यह प्रस्ताव मंगलवार (25 फरवरी) को लाया जाएगा."

पंजाब सरकार ने पिछले महीने केंद्र सरकार की इस नीति पर विरोध जताया था. भगवंत मान सरकार का कहना है कि यह नीति 2021 में रद्द किए गए तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को नए रूप में लागू करने का प्रयास है.

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नई नीति में क्या है?

पिछले साल के अंत में केंद्र सरकार ने कृषि पर पॉलिसी का ड्राफ्ट पेश किया. सरकार का ड्राफ्ट बताता है कि 2016 से 2023 के बीच भारत के कृषि क्षेत्र में लगातार विकास हुआ है. इस दौरान अनाज, तिलहन और बागवानी (फल-सब्जियों) के उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी हुई. लेकिन कुछ बड़ी समस्याएं भी बनी हुई हैं, जैसे:

- छोटे-छोटे खेतों में बंटती जमीन, जिससे खेती करना मुश्किल हो रहा है.

- किसानों के लिए बाजार तक पहुंच सीमित है, जिससे उन्हें अपनी फसल का उचित दाम नहीं मिल पाता.

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- फसल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव की वजह से छोटे और गरीब किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान होता है.

नई नीति में सरकार इन समस्याओं को सुलझाने का दावा कर रही है.

नई नीति के प्रमुख बदलाव

- सरकार का कहना है कि यह नीति किसानों को अपनी उपज को विभिन्न प्लेटफार्मों पर बेचने की स्वतंत्रता देती है. अब किसान केवल पारंपरिक मंडियों (APMC बाजारों) तक सीमित नहीं रहेंगे. वे अपनी फसल निजी खरीदारों और उपभोक्ताओ को भी बेच सकेंगे.

- निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए बाजारों में कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस और अन्य सुविधाओं के निर्माण पर जोर दिया गया है.

- डिजिटल ट्रेडिंग और ई-मार्केटिंग प्लेटफॉर्म को अपनाने की बात कही गई है, जिससे कृषि व्यापार में पारदर्शिता और कुशलता आएगी.

- लाइसेंसिंग नियमों को सरल बनाया जाएगा, राज्यों के विशेष प्रतिबंधों को कम किया जाएगा और किसानों एवं खरीदारों के लिए शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal Mechanism) उपलब्ध कराया जाएगा.

क्या यह नीति 2021 के तीन कृषि कानूनों से मिलती-जुलती है?

सरकार की नई कृषि नीति के ड्राफ्ट पर कुछ किसान नेताओं ने भी आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि यह नई नीति असल में उन्हीं कृषि कानूनों को नए तरीके से लागू करने की कोशिश है, जिन्हें भारी विरोध के बाद 2021 में रद्द कर दिया गया था. जैसे कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (प्रोमोशन एंड फैसिलिटेशन) अधिनियम. यह कानून किसानों को APMC बाजारों से बाहर अपनी उपज बेचने की अनुमति देता था. नई नीति में भी यही प्रावधान दोहराया गया है.

भारत के कई राज्यों में APMC कानून लागू हैं, जहां कृषि उत्पादों की बिक्री निर्धारित मंडियों में ही होनी चाहिए. मंडी में फसल बेचने पर किसानों और व्यापारियों को बाजार शुल्क, उपयोगकर्ता शुल्क और आढ़तियों (कमीशन एजेंटों) को शुल्क देना पड़ता है. हालांकि, किसान APMC से बाहर भी फसल बेच सकते हैं, लेकिन अधिकांश किसान पारंपरिक मंडियों में ही अपनी उपज लाते हैं.

इसके अलावा कुछ किसान नेताओं की तरफ से एक और विरोध दर्ज किया गया.  Farmers (Empowerment and Protection) Agreement on Price Assurance and Farm Services Act. यह कानून किसानों को  कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग और निजी कंपनियों के साथ अनुबंध करने की सुविधा देता था. नई नीति भी निजी निवेश और कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास को बढ़ावा देती है, जिससे यह पुराने कानूनों से मिलती-जुलती लगती है.

लेकिन, नई नीति में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कोई गारंटी नहीं दी गई है, जो किसानों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा है.

 

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