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'गद्दार' ओवैसी की पाकिस्तान यात्रा!

कहते हैं भारत माता की जय नहीं बोलेंगे. लेकिन पाकिस्तान जाके खूब चहकते हैं. पूरी फॉर्म में आ जाते हैं. वहां कुछ और, यहां कुछ और.

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फोटो - thelallantop

"भारत माता की जय!" ये नारा पहले ही लगा दिया. इसलिए कि इस आर्टिकल के ख़तम होने तक मेरे देश में रहने के अधिकार को मुझसे न छीन लिया जाये.

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हमको लगता है वो देश का गद्दार है और इस तरह से भारत में रह के, 'भारत माता की जय' बोलने से इस तरह से उसको परहेज है तो हमको नहीं लगता उनको भारत में रहने का अधिकार है. हमारा यही कहना है जिस जिह्वा से इस तरह का वो बयानबाजी करते हैं, उसको काट के लाने वाले को 1 करोड़ रुपये इनाम दूंगा.


हर किसी की नज़र में वो एक परफेक्ट विलेन बन चुके हैं. चक दे इंडिया के शाहरुख़ खान की तरह. जिसके घर की दीवार पर गद्दार लिख दिया गया है. वो अपने घर से निकलता है तो बच्चा कहता है, "पापा-पापा मुझे भी गद्दार देखना है."


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बात हो रही है असदुद्दीन ओवैसी की और ये कहना था उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के लीडर श्याम प्रकाश द्विवेदी का. द्विवेदी साहब ने ऐसा इसलिए कहा क्यूंकि कुछ रोज़ पहले ही ओवैसी साहब ने कहा था कि मैं वो नारा नहीं बोलूंगा, आप क्या कर लेंगे भागवत साहब? ओवैसी का ये भी कहना था कि देश के संविधान में कहीं भी उन्हें भारत माता की जय कहने को नहीं कहा गया है इसलिए किसी के ज़बरदस्ती कहलवाने पर वो ये नारा नहीं लगायेंगे. इसपर जावेद साहब अख्तर ने मज़े लिए थे. उन्होंने अपने ही अंदाज़ में कहा था कि संविधान में तो उन्हें शेरवानी और टोपी पहनने को भी नहीं कहा जाता, तो वो क्यूं लगाते हैं? https://www.youtube.com/watch?v=vR9VKHAKND0 तसलीमा नसरीन ने भी भारत माता की जय कहते हुए ओवैसी को लताड़ा था. कोई ओवैसी को गद्दार बता रहा था तो कोई पाकिस्तान चले जाने को कह रहा था. किसी ने तो ये भी कह दिया कि इनकी भारतीय नागरिकता ही रद्द कर दी जाए और इनके वोट देने के अधिकार को छीन लिया जाये. कुल मिलाके मालूम ये दे रहा था कि ओवैसी अपनी ही मर्जी से गरम-गरम तवे पे बैठ गए हैं. देश में अक्सर गद्दार का मतलब होता है पाकिस्तानी सपोर्टर. ये दोनों ही एक दूसरे के पर्याय बन चुके हैं. पाकिस्तान ज़िन्दाबाद भी कहने वाले को गद्दार समझा जाता है. क्यूंकि आम चलन के हिसाब से पाकिस्तान ज़िन्दाबाद = हिंदुस्तान मुर्दाबाद. इसी तर्ज पर ओवैसी को पाकिस्तानी एजेंट से लेकर क्या कुछ नहीं कह दिया गया. तो अब अगर इन सभी बातों को सच मान लिया जाये, और यूट्यूब की और देखा जाये तो घना कन्फ्यूज़न पैदा होता है. कैसे? बताते हैं. ओवैसी पिछले साल पाकिस्तान गए थे. अकेले नहीं, साथ में कांग्रेस के मणिशंकर ऐय्यर और बीजेपी के कीर्ति आज़ाद भी थे. ये सभी अमन की आशा नाम के एक प्रोग्राम में पाकिस्तानी नेताओं और वहां के जानकारों से डिबेट करने गए थे. यहां ये बता दिया जाए कि ओवैसी इंडिया की ओर थे, ख़िलाफ़ नहीं. वहां जो भी डिस्कशन हुआ, उसके वीडियो देखकर लोग सचमुच सकपका से गए थे. किसी को भी ऐसा नहीं मालूम देता था कि ओवैसी पाकिस्तान को आईना इस हद तक साफ़ करके दिखायेंगे. मणिशंकर ऐय्यर और कीर्ति आज़ाद की दलीलें शायद ओवैसी जितनी ताकतवर नहीं थी. ओवैसी न केवल इंडिया को रिप्रेज़ेंट कर रहे थे बल्कि वो इंडिया के मुसलामानों को वहां पेश कर रहे थे जिनकी पाकिस्तान को कुछ खास ही फ़िक्र रहती है. उस लिहाज़ से उन पर और भी ज़्यादा जिम्मेदारियां थीं जिसे उन्होनें बखूबी निभाया. काउंटर अटैक क्या होता है, ये मणि शंकर और कीर्ति आज़ाद को भी सीखने को ज़रूर ही मिला होगा. साथ ही ये भी बता दिया जाए कि वही अमन की आशा का डिस्कशन है जहां कांग्रेसी मणिशंकर ऐय्यर इंडिया का बेड़ा गर्क करने का पूरा इंतजाम कर आये थे. उन्होंने वहां ये कह दिया था कि मोदी के भारत का पीएम बनने पर उन्हें शर्म आती है और मोदी को हटाने के लिए उन्हें पाकिस्तान की मदद की ज़रुरत पड़ेगी. लेकिन गद्दार उन्हें नहीं कहा गया. सवाल चाहे 26/11 के मामले में पाकिस्तान के नाकारापान का हो या मालेगांव बम धमाके हों या पाकिस्तान की गुजरात दंगों पर जताई चिंता हो, ओवैसी पाकिस्तानी पैनल को एक के बाद एक पस्त करते गए.

वीडियो देखें:

https://www.youtube.com/watch?v=bBgzFVfa228 सवाल था कि हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच रिश्ते इतने ख़राब क्यूं हैं? और हैं तो इसके लिए ज़िम्मेदार कौन है? https://youtu.be/d6pXuHnFatg?t=6m46s   और फिर वापस आकर हैदराबाद में फुल हैदराबादी इश्टाइल में लोगों को मजे ले-ले कर पाकिस्तान में हुए किस्सों के बारे में बताया. साथ ही ये तंज भी मारा कि कैसे देशभक्ति का ठेका सिर्फ कुछ लोगों ने ले रक्खा है और बाकी हर किसी को उस देश का हिस्सा समझा ही नहीं जाता है. https://www.youtube.com/watch?v=31zmj9pJEOc   मुझे नहीं मालूम कि ओवैसी गद्दार हैं या नहीं. देशभक्त हैं या नहीं. और मेरे पास ये तय करने की या ये डिक्लेयर करने की कोई ताकत भी नहीं है. और सच पूछो तो इस देश में किसी को भी ये ताकत और ये हक़ नहीं है कि वो किसी को देशभक्त या गद्दार डिक्लेयर कर दे. वैसे गद्दार शब्द देशभक्त का विलोम  नहीं है. बस भीड़ को इंसाफ़ परोसने से रोक लो भाई! प्लीज़.

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