कर्नाटक के होम मिनिस्टर जी परमेश्वर का बयान आता है,"ऐसी घटनाएं होती रहती हैं."दूसरा दृश्य इससे ज्यादा खतरनाक है. बेंगलुरु के ही एक पॉश एरिया की गली में दो लड़कियां ऑटो से उतरती हैं. एक धीरे से घर जाने लगती है. उसके जाने के कुछ देर बाद दूसरी उतरती है. ऑटो वाला इंतजार कर रहा है. दूसरी के निकलने के कुछ सेकेंड बाद दो बाइकों पर लड़के आते हैं. एक बाइक ऑटो के पास खड़ी रहती है. दूसरी पर बैठे लड़के उस लड़की को घेर लेते हैं. जबर्दस्ती पकड़ लेते हैं. इधर उधर हाथ लगाते हैं और जोर से जमीन पर पटक के भाग जाते हैं. https://www.youtube.com/watch?v=vTrYYnxzM-Q
बवाल मचता है. फिर होम मिनिस्टर गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आते हैं. कहते हैं," ये सारा बवाल बेंगलुरु को बदनाम करने के लिए हो रहा है. अगर आप में से किसी के पास वीडियो है तो ले के आइए. हम एक्शन लेंगे."होम मिनिस्टर परमेश्वर ने मीडिया पर ही सवाल खड़े किए. 'मोलेस्टेशन' को 'कथित मोलेस्टेशन' कहा. मीडिया से कहा कि आपके पास सबूत है तो दीजिए.
परमेश्वर ने कहा,
1. 'नए साल पर कथित मोलेस्टेशन की घटना पर मेरे बयान को गलत तरीके से लिया गया. मैं मानता हूं कि सबकी राय महत्वपूर्ण है. महिलाओं के पास समान अधिकार हैं. बेंगलुरु पुलिस चौबीस घंटे काम कर रही है, सारे फुटेज देख रही है. हम जरूरी एक्शन लेंगे और सबसे रिक्वेस्ट करते हैं कि हमसे जानकारी साझा करें.' 2. 'मीडिया से रिक्वेस्ट है कि आप लोग भी वहां मौजूद थे. अगर आपके पास कोई क्लिप है कि मोलेस्टेशन हुआ है और आपने कैप्चर किया है, आपने कुछ स्टिल फोटोग्राफ छापे हैं. मेरी रिक्वेस्ट है कि हमें फुटेज दीजिए. हमारे सीसीटीवी हम देख रहे हैं. हमारी हेल्प कीजिए.' 3. 'मेरी बहनें हैं, मां है, पत्नी है. मैं महिलाओं को दूसरे सेंस में ट्रीट करने वालों में से नहीं हूं. हम सब अपने परिवार और महिलाओं का सम्मान करते हैं. '
मंत्री जी, हमारी अपेक्षा थी कि आप हाथ जोड़कर माफी मांगेंगे. आपके चेहरे पर थोड़ी शर्मिंदगी होगी. और क्या बात कर रहे हैं आप? ये विचलित करने वाली घटनाएं हैं और आप इस पर सियासी आरोपों में घुसे हुए हैं. इस वक्त तो आपको डंडा लेकर खुद गलियों में उतरना चाहिए था. डेढ़ हजार पुलिस वालों के सामने शराब पिए लड़के लगातार औरतों की रूह में दहशत भरते रहे? उस वीडियो में जिस तरह उस लड़की पर हमला किया गया, उसे दबोचा गया, फिर सड़क पर फेंक दिया गया, उसे देखकर आपको शर्म नहीं आई? आई तो आपके चेहरे पर दिखी क्यों नहीं? ये मत कहिएगा कि हर गली तक हर समय पुलिस नहीं पहुंच सकती. नहीं पहुंच सकती तो छोड़ दीजिए कुर्सी. एक सूबे की पुलिस आपके अंडर आती है. आपके राज में अपराधी बेखौफ हैं तो जिम्मेदारी आपकी है या मीडिया और विपक्ष की? ये इतनी विचलित करने वाली घटना है मंत्री जी, कि अहिंसा में यकीन करने के बावजूद रैडिकल ख्याल मन में आते हैं. चीजें आपके वश के बाहर हो गई हैं तो एक एडवाइजरी जारी कर दीजिए कि लड़कियां घरों में रहें. बाहर निकलना हो तो अपने घर के पुरुषों के साथ निकलें. हो सके तो नौकरी छोड़ दें. शराब न पिएं. पार्टी न करें. तन ढंकने वाले कपड़े पहनें. एक अध्यादेश निकलवा दीजिए.
या फिर इसे अमेरिका बना दीजिए. बंदूकों का लाइसेंस खत्म कर दीजिए. लड़कियां एक-एक पिस्टल खऱीद के रख लेंगी और और अपना हिसाब कर लेंगी.
आपसे हमको कोई उम्मीद नहीं है. नवंबर 2015 में बेंगलुरु के फेमस Cubbon Park में दो सिक्योरिटी गार्डों ने एक लड़की का रेप किया था. तब परमेश्वर जी आपने ही कहा था कि एक लड़की को रात 9:30 बजे टेनिस खेलने की क्या जरूरत है? आपको तो उसी वक्त सत्ता से बेदखल कर देना चाहिए था. तब से आप ने इतनी प्रगति कर ली है. उस वक्त एक लड़की का रेप हुआ था. और आज दर्जनों का हुआ है. फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन आप जैसे लोगों के लिए नहीं बना है. पहला कड़ा कानून आपके लिए बनना चाहिए. मध्ययुगीन सभ्यता से लाकर. यकीन मानिए आपके हर शब्द की तासीर पिघले सीसे की है. आपने देश के सारे लोगों को डरा दिया है.
मंत्री जी, आंखों का पानी बचा है तो चुल्लू भर पानी लो और जितना डूबता हो डुबा लो.
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