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इब्न बतूता के बगल में जूता नहीं, मोहम्मद बिन तुगलक था

नक्शेबाज सीरीज में आज पढ़िए मोरक्को के ट्रैवलर इब्न बतूता के बारे में:

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फोटो - thelallantop
पारुल
पारुल

घूमने का शौक तुमको बचपन से है. ये मालूम है हमें. तभी हम लाए हैं नक्शेबाज सीरीज. 'दी लल्लनटॉप' की इस नई सीरीज की आज पढ़िए चौथी किस्त. इसे लिखा है पारुल ने. आज पढ़िए मोरक्को के ट्रैवलर इब्न बतूता के बारे में. कैसे ये बंदा 30 सालों तक घूमता रहा. इसे पढ़िए और सीखिए कि घूमने के लिए प्लान बनाने की जरूरत नहीं होती. बस एक जोरदार हिचकी जैसा कुछ चाहिए होता है, जिसके आते ही आप बस्ता उठाकर चल दें.


 
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इब्न बतूता

मोरक्को के ट्रैवलर थे ये. 14वीं सेंचुरी में घूमने निकले थे. करीब तीस सालों में अफ्रीका के अधिकतर हिस्से और लगभग पूरा एशिया घूम चुके थे.
ड्राइविंग फ़ोर्स:
इब्न बतूता दिल से घुमक्कड़ आदमी थे. और घर में पहले ही धार्मिक पढ़ाई का माहौल था, तो वो हज करने निकले. फिर कई सालों तक घर वापस नहीं आए, घूमते रहे.
फैमिली बैकग्राउंड/इनकम लेवल:
इब्न बतूता के परिवार में कई इस्लामिक स्कॉलर थे. इनमें से कुछ 'उलेमा' का हिस्सा भी थे. मतलब एलीट क्लास की फैमिली कह सकते हैं. इब्न बतूता ने खूब सारी पढ़ाई की थी. बाद में, घूमने के दौरान भी ये काफी पढ़ते रहते थे. संस्कृत, अरबी और फ़ारसी जैसी कई भाषाएं भी सीख रखी थीं.
ट्रैवल रूट/जगहें:
ये अफ्रीका से होते हुए मदीना गए. रास्ते में इजिप्ट, सीरिया और लीबिया घूमते हुए. इस सफ़र में वो काफी सारे लोगों से मिले, जिन्होंने उन्हें भारत घूम आने की सलाह दी. मक्का में महीने भर रहने के बाद वो इराक के लिए निकले. फिर ये ईरान, सोमालिया और भी बहुत सारी जगहें घूमते रहे. फाइनली ये सिंध नदी के पास गए. फिर वहां से दिल्ली के लिए चल दिए. उस वक़्त दिल्ली के सुल्तान थे मुहम्मद बिन तुगलक. जिनके बारे में इब्न बतूता ने भी सुन रखा था. वो जानते थे कि सुल्तान पढ़े-लिखे और काबिल लोगों की बड़ी इज्ज़त करते हैं. सुल्तान के पास पहुंचने पर ऐसा ही हुआ. उनको दिल्ली का क़ाज़ी बना दिया गया. भारत में भी ये कई जगह घूमते थे. एक बार तो एक ग़लतफ़हमी की वजह से सुल्तान ने इनको जेल में भी डाल दिया था. कुछ दिन बाद इनका मन बन गया था भारत से जाने का. लेकिन सुल्तान ने परमिशन नहीं दी.
इब्न बतूता का रूट
इब्न बतूता का रूट
जब चाइना के बादशाह की तरफ से एक अम्बेसडर टाइप आदमी आया, तब जाकर इन्हें मौका मिला दिल्ली से निकलने का. इस अम्बेसडर को एक बौद्ध मंदिर बनवाना था. इसी ग्रुप के साथ इब्न बतूता कोझीकोड पहुंच गए. फिर चाइना जाने से पहले मालदीव पहुंच गए. वहां नौ महीने तक काज़ी बनकर रहे. उसके बाद श्रीलंका चले गए. वहां से निकलते वक़्त उनकी नाव डूबते-डूबते बची. और वो वापस भारत आ गए, मदुरई में. फिर वहां से चले चाइना जाने का मन बना कर. लेकिन रुक गए चिट्टगॉन्ग में. फिर कुछ दिन असम में भी रहे. तब कहीं जाकर चाइना के लिए निकल पाए.
चाइना में इब्न बतूता ने काफी दिन बिताए. खूब घूमे वहां. ताओइस्ट साधुओं और बादशाहों से मिले. और सब कुछ के बारे में लिखा. इब्न बतूता जब वापस घर की ओर निकले, तो रास्ते में कुछ जगहों पर रुकना चाहते थे. लेकिन प्लेग में उनके पापा की मौत की खबर मिली तो वो सीधे घर पहुंच गए.
मुश्किलें:
इब्न बतूता के सामने तो ढेरों मुश्किलें आईं. रास्ते में कई बार डाकूओं से पाला पड़ा. एक बार जेल गए. दो-तीन बार नाव डूबते-डूबते बची. कोझीकोड के रास्ते में अपने साथ वालों से बिछड़ गए थे. इब्न बतूता ने अपने ट्रैवल अकाउंट में बकायदे इस बारे में लिखा है. कभी घरवालों की याद आने के बारे में, कभी सफ़र में अकेले पड़ जाने के बारे में. इनकी एक और प्रॉब्लम ये थी कि ये थे महाघुमक्कड़ आदमी. एक जगह टिक नहीं सकते थे. लेकिन कई बार लोकल पॉलिटिक्स में फंस कर, एक ही जगह काफी वक़्त तक अटक जाते थे. अक्सर सुल्तान या बादशाह लोग इनको रोक लेते थे.
Handmade_oil_painting_reproduction_of_Ibn_Battuta_in_Egypt,_a_painting_by_Hippolyte_Leon_Benett.

आउटपुट:
इब्न बतूता का ट्रैवल अकाउंट बहुत मजेदार है. इसमें भारत के लोग, पॉलिटिक्स से लेकर पान और नारियल के बारे में लिखा गया है. घर पहुंच कर, मोरक्को के राजा के कहने पर इन्होंने अपने सफ़र की सारी कहानियां सुना डालीं. इनके इस ट्रैवल अकाउंट को आमतौर पे 'रिहला' कहते हैं. जिसका मतलब होता है सफरनामा. वैसे कुछ हिस्टोरियंस का मानना है कि इब्न बतूता ने घूमते वक़्त कोई नोट्स नहीं बनाए थे. और वो उन सारी जगहों पर नहीं गए थे, जितनी सारी जगहों के बारे में उन्होंने लिख डाला है.
इब्न बतूता करके एक गाना भी आया था इश्किया में. सुन लियो.
https://www.youtube.com/watch?v=r5OhY6VqJ-o


इस सीरीज में इसके पहले की किस्तें

1. फाह्यान: वो ट्रैवलर, जो चीन से पैदल इंडिया आ गया

2.  वो पहला चाइनीज, जो बिना इजाजत इंडिया आया

3. इस बंदे ने दीये का तेल खोजने के चक्कर में घूम डाली दुनिया

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