वो जवानी जवानी नहीं, जिसकी कोई कहानी न हो. जिंदगी की न टूटे लड़ी, बात कर ले घड़ी दो घड़ी.
माइक होगा, तख्त होगा, दरख्त होगा, आ जाओ लल्लनटॉप अड्डे पर
कविता सुनानी हो, जोक सुनाते हों, मिमिक्री करनी हो, इंस्ट्रूमेंट बजाना हो, तो लल्लनटॉप अड्डा आपकी राह तक रहा है. सप्रेम.


घड़ी देखिए. दिन है शुक्रवार और टाइम लंच के बाद का. अब मोबाइल वाली घड़ी में रिमांइडर लगाइए. शनिवार और इतवार. दो दिन जवानी की कहानियां-कविताएं किस्से सुनाने के. अपना हुनर दिखाने के. कोई गजल, जो आपने हॉस्टल के दिनों में लिखी थी और भूरे चमड़े की डायरी में अब तक दफन है. कोई किस्सा जो हादसे सी हकीकत बन आपके साथ किसी सफर में हुआ था और अब तक महफिलों में सन्नाटा खींच देता है. कोई आंखों देखी, जिसने आपकी जिंदगी बदल दी. कोई कानों सुनी, जो अब तक गुदगुदाती है.
देश की सबसे चौचक हिंदी वेबसाइट thelallantop.com लेकर आ रही है एक तखत. दरख्त के नीचे. माइक के सामने. ये होगा लल्लनटॉप अड्डा. जो जमेगा साहित्य आज तक में. शनिवार और रविवार को. सुबह 11 बजे से शाम तक.
यहां क्या होगा. यहां तमाम तुर्रम खां आएंगे. अपने हिस्से के किस्से सुनाएंगे. गाने गाएंगे. चाय पर चर्चा करेंगे. और इन्हीं सबके बीच साहित्य आज तक में आ रहे मेहमान भी आएंगे. और वो भी आपके रंग में रंग जाएंगे. किस्से सुनाएंगे. सिलसिले को आगे बढ़ाएंगे. पीयूष मिश्रा बताएंगे दिल्ली की वो शामें. प्रसून जोशी बताएंगे मैनेजमेंट कॉलेज के हॉस्टल के कहकहे. अनुराग कश्यप बताएंगे फैजाबाद, ग्वालियर. देहरादून, बनारस और मुंबई के किस्से. राजशेखर सुनाएंगे कविताएं. 'तनु वेड्स मनु' के वाकये. मजनू का टीला की शुरुआत. मधेपुरा की बातें.
ये सिर्फ ट्रेलर है.
पूरी पिक्चर में होंगे आज तक, इंडिया टुडे के तमाम एंकर्स और रिपोर्टर्स, जो हर रोज नए रोज की तरह जीते हैं. नई जगहों पर जाते हैं. नए वाकयों का बयान दर्ज करते हैं. मसलन गौरव सावंत, जो हमें सुनाएंगे फौज के अग्रिम मोर्चों की कहानियां. पीयूष पांडे बताएंगे आगरे के बालकों के तराने. शम्स ताहिर खान बताएंगे मुर्दों के आसपास जिंदा रहने के मायने क्या हैं. क्राइम के सीन पर पहुंचने के बाद दिमाग में क्या आता है. पाणिनि आनंद आपको अवध के ऐसे लोकगीत सुनाएंगे, जिन्हें सुन गांव की मिट्टी माथे पर महसूस होगी.
एक पेटी-बाजा टोली भी चल चुकी है आपके सुर में सुर मिलाने के लिए बुंदेलखंड से. ये टोली आपको ब्राजीली लालालालला सुनाएगी कीर्तन स्टाइल में. तो आपको क्या करना है. रियाज करिए. शीशे के सामने. या फिर मत करिए. सीधे वहीं तखत पर रियाज हो जाएगा.
ये इवेंट सबके लिए है, क्योंकि सबमें हुनर है और हमें इसकी कदर है. आप कविता-कहानी लिखते हों, जोक सुनाते हों, मिमिक्री करते हों, कोई इंस्ट्रूमेंट बजाते हों, तो ये लल्लनटॉप अड्डा और इसका तख्ता आपकी राह तक रहा है. हर दिन 10 विनर्स को प्राइज भी मिलेंगे.
तो आइए और छा जाइए. जब दिल न लगे दिलदार हमारी गली आ जाना, गाने वाले बालक-बालिकाओं की तरफ से सप्रेम.
कोई कन्फ्यूजन हो या परफॉर्म करने से जुड़ा कोई सवाल हो, तो हमारे फेसबुक पेज पर मेसेज करें.











.webp?width=275)






