The Lallantop

अबुल कलाम आज़ाद की ये स्पीच हर मुसलमान को सुननी चाहिए

1947 में दी गई ये स्पीच आपको अंदर तक हिला देगी.

Advertisement
post-main-image
फोटो - thelallantop

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने 1947 में बकरीद के मौके पर दिल्ली की जामा मस्जिद में आज़ादी मिलने के बाद मुसलमानों को सम्बोधित किया था।
  • यह भाषण उस समय के सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तनों के बीच मुस्लिम समुदाय की स्थिति और खुद सुधार की आवश्यकता पर आधारित था।
  • इस भाषण के माध्यम से समुदाय को आत्मचिंतन और सुधार की दिशा में प्रेरित करने का प्रयास किया गया, जिससे आने वाले समय में बदलाव की संभावना पर बल दिया गया।

ये स्पीच है मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की. जो 1947 में बकरीद के मौके पर दिल्ली की जामा मस्जिद में दी गई. उन्होंने आज़ादी मिलने पर मुसलमानों को उस वक़्त ख़िताब किया. लेकिन उनकी ये बातें पढ़कर ऐसा लगता है जैसे अभी के लिए कही हैं. अबुल कलाम 11 नवंबर 1888 को सऊदी अरब के मक्का में पैदा हुए थे. 22 फ़रवरी 1958 को इस दुनिया से रुखसत हो गए. इस स्पीच को अमेरिकन स्कॉलर चौधरी मोहम्मद नईम ने उर्दू में तहरीर किया है. आप इसे हिंदी में पढ़िए. और हर मुसलमान को इसे पढ़नी चाहिए. जो हालात आजतक मुसलमानों के बने हुए हैं वो खुद के बनाये हुए हैं. ये स्पीच बताती है कि जब तक हम खुद को नहीं बदलेंगे, कुछ नहीं हो सकता. चाहे कितनी ही सच्चर रिपोर्टें आती रहें. नेता आते रहें. कोई फर्क नहीं पड़ेगा. तो पढ़िए और सोचिए.  

Advertisement

Advertisement
Advertisement