शादी के बाद पता चलता है कि राम को बाइपोलर डिसऑर्डर (Bipolar Disorder) है. राम के दोस्त सेंथिल सुंदर को दोस्त की मानसिक बीमारी के बारे में पता चलता है. डॉक्टर बताता है कि बाइपोलर डिसऑर्डर की समस्या के चलते राम खतरनाक हो सकता है. इसलिए राम का दोस्त जननी को राम से बचाने का फैसला करता है. वो राम की मानसिक समस्या को जननी से छिपाता है. वहीं जननी राम के बिहेवियर से निपटने के लिए संघर्ष करती है.
मूवी का एक सीन.2012 में ही एक और फिल्म आई थी. करीना कपूर स्टारर Heroine. इस फिल्म में वो माही अरोड़ा के रोल में थीं जो बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित है. उसका मूड बार-बार बदलता रहता है. हालांकि फिल्म की मेन कहानी एक्ट्रेस माही अरोड़ा की कामयाबी और उसकी असफलता की है.
फिल्म के एक सीन में करीना कपूर."होमलैंड" एक फेमस अमेरिकी थ्रिलर शो है जो 2011 से 2020 तक चला. इसमें कैरी नाम की एक CIA एजेंट है जिसे बाइपोलर डिसऑर्डर है. अभिनेत्री क्लेयर डेन्स (Claire Danes) ने ये भूमिका निभाई थी. इस CIA एजेंट को लगता है कि युद्ध का एक अमेरिकी कैदी वास्तव में अल कायदा का जासूस है. कई लोग इस कैदी को हीरो के तौर पर सेलिब्रेट कर रहे हैं, लेकिन कैरी का मिजाज कुछ और ही बता रहा है. कैरी में जल्दी से सोचने, जटिल योजनाओं को दूर करने और सहज होने की क्षमता है. उसकी जिंदगी में कई सारी चीजें बाइपोलर डिसऑर्डर की वजह से होती हैं. हालांकि वो दवाएं लेती है. अपनी बीमारी को दुनिया से छिपाती है ताकि उसे उसके काम से न निकाला जाए. लेकिन कभी-कभी वो काम के बीच में इससे परेशान होती है. लेकिन इन फिल्मों और शो का जिक्र आज क्यों? दरअसल एक खबर आई है. सुप्रीम कोर्ट ने बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित एक व्यक्ति के लिए जज बनने का रास्ता साफ कर दिया है. इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, इस कैंडिडेट ने 2018 में दिल्ली जुडिशियल सर्विस के लिए आवेदन किया था. ये विकलांग कोटे के लिए आरक्षित थी. उम्मीदवार 'मानसिक बीमारी' श्रेणी में एकमात्र उम्मीदवार के रूप में चुना गया था. उसे 2018 में विकलांगता प्रमाण पत्र जारी किया गया था, जो 2023 तक वैध था.
इस नियुक्ति को शुरुआत में ये कहकर चुनौती दी गई कि कैंडिडेट न्यायिक कार्य नहीं कर पाएगा. ये भी कहा गया कि उसे सिर्फ दवा की जरूरत है. ऐसे में उसे विकलांग नहीं माना जा सकता.
बायपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित को जज बनाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. (सांकेतिक फोटो)सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय कौल और एमएम सुंद्रेश की बेंच ने नवंबर में ये मामला मेडिकल बोर्ड को भेजा था. इसमें एम्स के मनोचिकित्सक शामिल थे. मेडिकल बोर्ड की सलाह पर कदम उठाते हुए कोर्ट ने नियुक्ति को बरकार रखा है. बोर्ड ने कहा था कि उम्मीदवार को चिकित्साीय छूट मिली है. लेकिन वो ठीक रहने के लिए लंबे समय से दवाएं ले रहा है. इस बात के कोई संकेत नहीं है कि वो न्यायाक अधिकारी के तौर पर अपनी जिम्मेदारियां निभाने में सक्षम नहीं है. हालांकि कोर्ट ने माना कि बाइपोलर डिसऑर्डर जीवनभर की समस्या है. बायपोलर डिसऑर्डर? क्या है? बाइपोलर डिसऑर्डर का ज़िक्र सबसे ज़्यादा तब भी हुआ था जब एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत की खबर आई थी. मुंबई पुलिस और डॉक्टर्स ने कन्फर्म किया था कि सुशांत बाइपोलर डिसऑर्डर से जूझ रहे थे. इस समस्या के बारे में हमारे स्पेशल शो 'सेहत' में बात की गई थी. इसमें डॉक्टर रकीब ने बताया था,
बाइपोलर डिसऑर्डर में दो पोल होते हैं. पहला डिप्रेशन और दूसरा मेनिया. जिसे मेडिकल भाषा में मेनिक डिप्रेसिव साइकोसिस कहा जाता है. इसका सबसे बड़ा लक्षण हैं यूफ़ोरिया (बहुत अधिक उत्तेजित या ख़ुश होना) और हाइपरएक्टिव होना. यूफ़ोरिया का मतलब इंसान सामान्य से ज़्यादा ख़ुश रहेगा. बाइपोलर डिसऑर्डर एक जटिल दिमागी बीमारी है. ये एक तरह का मूड डिसऑर्डर है. बाइपोलर डिसऑर्डर में इंसान का मूड यानी मनोदशा प्रभावित होती है.
सांकेतिक तस्वीरबायपोलर डिसऑर्डर के लक्षण क्या हैं? मन उदास रहता है. किसी काम को करने की इच्छा नहीं होती है. बिस्तर पर लेटे रहना. नींद कम आएगी या बहुत ज़्यादा आएगी. भूख नहीं लगेगी या बहुत ज़्यादा लगेगी. आत्महत्या के विचार आना, थकान, कमज़ोरी महसूस होना. एलिवेटेड मूड में इंसान बहुत ज़्यादा बात करता है. बिना तर्क की, बड़ी-बड़ी बातें करता है. बेवजह खर्च करता है. कई बार बाइपोलर डिसऑर्डर से ग्रसित इंसान बहुत गुस्सा करने लगता है. गालियां देने और मारपीट करने लगता है. घर के सामान तोड़ता है. कई बार दूर-दूर तक पैदल चला जाता है. शराब, सिगरेट, तंबाकू, गांजा के नशे की लत लगा लेता है. अचानक से लोगों से बहुत मिलनसार हो जाता है. मोबाइल का इस्तेमाल ज्यादा करने लगता है. बाइपोलर डिसऑर्डर के कारण क्या हैं? बाइपोलर डिसऑर्डर एक कॉम्प्लेक्स मनोवस्था है, इसलिए इसके कारण भी काफ़ी जटिल हैं. यानी कि ये किसी एक वजह से नहीं, बल्कि कई फैक्टर्स की वजह से होता है. एक कारण है जेनेटिक. यानी अगर किसी के परिवार में बाइपोलर डिसऑर्डर की हिस्ट्री रही है तो उसे ये डिसऑर्डर होने के चांसेज़ बाकी लोगों से 4 से 6 गुना ज़्यादा होते हैं.
दूसरा कारण है हमारे दिमाग में होने वाली असमानताएं. हमारे दिमाग में एक हिस्सा होता है हिप्पो कैंपस. उसके ब्रेन सेल्स में डैमेज होने से भी बाइपोलर डिसऑर्डर होता है. हिप्पो कैंपस का प्रमुख काम मेमरी स्टोर करना होता है. पर ये इनडायरेक्टली हमारी मनोवस्था पर भी असर डालता है.
सांकेतिक तस्वीरहमारे दिमाग में न्यूरोकेमिकल नाम के पदार्थ पाए जाते हैं. इनका काम हमारे ब्रेन में एक जगह से दूसरी जगह मैसेज पहुंचाना होता है. अगर दिमाग में मौजूद दो केमिकल डोपामिन और सेरोटोनिन के बीच में बैलेंस बिगड़ जाता है तो बाइपोलर डिसऑर्डर होने का ख़तरा बढ़ जाता है. बहुत ज़्यादा तनाव से भी बाइपोलर डिसऑर्डर होने का खतरा होता है. डेली लाइफ की परेशानियों का भी दिमाग पर बहुत असर पड़ता है. अगर ये परेशानियां लंबे समय तक बनी रहती हैं तो ये भी बाइपोलर को ट्रिगर कर सकता है. किसी करीबी की मौत भी ऐसे एपिसोड को ट्रिगर कर सकती है. और भी कारण हो सकते हैं.
























