सलमान खान (Salman Khan) को बंदूक का लाइसेंस मिल गया है. उन्होंने पिछले महीने इसके लिए अप्लाई किया था. सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद सलमान खान को भी धमकियां मिली थीं, जिसके बाद उन्होंने ये कदम उठाया. उनको तो लाइसेंस मिल गया है, लेकिन अगर किसी आम आदमी को बंदूक का लाइसेंस लेना हो तो उसे क्या करना होगा? क्या प्रकिया है आर्म्स लाइसेंस पाने की, कहां से लाइसेंस मिलेगा और कहां से हथियार खरीद सकते हैं?
सलमान खान को तो मिल गया, आपको बंदूक का लाइसेंस लेने के लिए क्या करना पड़ेगा?
वेरिफिकेशन की पूरी प्रक्रिया के बाद ही दिया जाता है हथियार का लाइसेंस.


किसी भी हथियार का लाइसेंस ‘आर्म्स रूल, 2016’ के तहत दिया जाता है. ये एक संशोधित एक्ट है. 2016 के पहले तक ‘आर्म्स रूल, 1959’ सर्वमान्य था. नियम के मुताबिक जिन शहरों में कमिश्नरेट है, वहां ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर ऑफिस, और जहां नहीं है, वहां जिलाधिकारी ऑफिस से लाइसेंस दिया जाता है. लाइसेंस मिलने की अंतिम मोहर ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर (लाइसेंसिंग) या DM की होती है.
क्या प्रक्रिया है?लाइसेंस के लिए कोई भी आवेदन कर सकता है. बस उम्र 18 साल से ज्यादा होनी चाहिए और आवेदक भारत का नागरिक होना चाहिए. लाइसेंस के आवेदन के लिए DM ऑफिस या ज्वाइंट CP के दफ्तर में फॉर्म मिलता है. फॉर्म ऑनलाइन भी उपलब्ध है. फ्री ऑफ कॉस्ट डाउनलोड किया जा सकता है. फॉर्म भर कर अप्लाई करने के बाद DM के दफ्तर से वो फॉर्म SP ऑफिस जाता है.
इसके बाद शुरू होती है वेरिफिकेशन की प्रकिया. DCRB यानी डिस्ट्रिक्ट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो में आवेदक का क्राइम रिकॉर्ड चेक किया जाता है. उसका सर्किल ऑफिसर (CO) वेरिफिकेशन करता है. इसमें जहां आवेदक रहता है, उस इलाके का SHO पूरी जांच पड़ताल करता है. यहां से प्रकिया आगे बढ़ कर एडिश्नल SP के ऑफिस में जाती है. और पूरी जांच पड़ताल के बाद रिपोर्ट SP ऑफिस को सौंप दी जाती है. और SP ऑफिस DM को ये बताता है कि आवेदक हथियार का लाइसेंस दिए जाने के योग्य है कि नहीं.
इस पूरे वेरिफिकेशन में जांच का केंद्र होता है आवेदक का इतिहास. इस बात को तसल्लीबख्श जांचा जाता है कि आवेदक कहीं किसी अपराध में शामिल तो नहीं रहा है.
हालांकि अभी भी लाइसेंस मिलने की प्रक्रिया पूरी नहीं होती. इसके बाद DM आवेदक का इंटरव्यू लेता है. इस इंटरव्यू में आवेदक को अपनी मांग को जायज ठहराना होता है कि आखिर उसे हथियार की जरूरत क्यों है. मसलन, ये बताना होता है कि क्या उसे किसी से कोई खतरा है? स्पोर्ट्स के लिए चाहिए या कोई अन्य जरूरी कारण है? अगर DM आवेदक की मांग से सहमत हो जाता है तो लाइसेंस मिल जाएगा.
प्रक्रिया में SHO से लेकर DM के इंटरव्यू तक कई बातों को परखा जाता है. जैसे हथियार के लिए आपकी मांग कितनी जायज है, आप हथियार रखने में कितने सक्षम हैं, हथियार की सुरक्षा कैसे की जाएगी वगैरा-वगैरा. क्राइम रिकॉर्ड तो देखा ही जाता है.
किस हथियार के लिए मिलता है लाइसेंस?हथियारों को दो भागों में बांटा गया है. प्रोहिटिबल बोर और नॉन प्रोहिटिबल बोर. DM या ज्वाइंट CP के पास नॉन प्रोहिटिबल बोर का लाइसेंस इशू करने का अधिकार होता है. प्रोहिबिटेड बोर का लाइसेंस लेने के लिए केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय में आवेदन देना होता है. प्रोहिबिटेड बोर के अंतरगत ऑटोमैटिक और सेमिऑटोमैटिक हथियार होते हैं. यानी DM के पास पिस्टल, रिवॉल्वर, 12 बोर की बंदूक या दोनाली बंदूक का लाइसेंस देने का अधिकार होता है.
लाइसेंस मिलने के बाद कहां मिलेगी बंदूक?जिसका लाइसेंस प्रशासन की तरफ से मिलेगा, सिर्फ वही हथियार आप बाजार से खरीद सकते हैं. केवल लाइसेंस वाली रजिस्टर्ड दुकानों से ही हथियार खरीद सकते हैं. खरीदने के बाद आपको DM ऑफिस में जाकर ये दर्ज कराना होगा कि आपने लाइसेंस पर कौन से मॉडल की कौन सी बंदूक खरीदी है, उसका मॉडल नंबर क्या है इत्यादि.
एक बार लाइसेंस जारी हो जाने के बाद आप जीवन भर हथियार रख सकते हैं. जिसके नाम लाइसेंस होता है, अगर उसकी मौत हो जाती है तो उसके डिपेंडेंट के नाम आमतौर पर लाइसेंस दे दिया जाता है. हां अगर डिपेंडेंट सारे नियमों को पूरा नहीं करता तो लाइसेंस को सरेंडर करवा दिया जाता है. इसके अलावा आचार संहिता लागू होने पर हथियार को (लाइसेंस नहीं) सरेंडर करना पड़ता है. आचार संहिता हटने पर हथियार वापस मिल जाता है. लेकिन अगर आप किसी अपराध में लिप्त पाए गए या हथियार का कोई गलत इस्तेमाल पाया गया तो लाइसेंस रद्द कर दिया जाता है.
वीडियो: शूटर के निशाने पर आ गए थे सलमान खान मगर रेंज से बाहर होने की वजह से बच गए!






















