होती हो. इस प्लांट के पानी का इस्तेमाल घरेलू, खेती और औद्योगिक जरूरतों के लिए किया जाएगा. अभी हम डिसैलिनेशन प्लांट के बारे में नहीं, रिन्यूएबल एनर्जी पार्क के बारे में बात करेंगे जिसे दुनिया का सबसे बड़ा बनाने की बात की जा रही है. इस पार्क को पाकिस्तान बॉर्डर से करीब 6 किलोमीटर की दूरी पर बनाया जा रहा है. आइए जानते हैं इस वाले पार्क के बारे में.
किस तरह का होगा ये रिन्यूएबल एनर्जी पार्क?
गुजरात सरकार ने इस हाइब्रिड पार्क के लिए सितंबर 2020 में अपनी मंजूरी दी थी. सरकार को इस पार्क से 1.35 लाख करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है. इस पार्क को अगले दो साल में पूरा किया जाना है. इसे कच्छ जिले में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के पास बंजर जमीन पर बनाया जाएगा. इस पार्क में सौर और पवन ऊर्जा प्रोजेक्ट के लिए कई कंपनियों को जमीन पहले ही अलॉट की जा चुकी है.
भारत सरकार 2022 तक 175 गीगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता स्थापित करने के प्लान पर काम कर रही है. इसी कड़ी में गुजरात सरकार ने भुज से 72 किलोमीटर उत्तर कच्छ के खावड़ा में 1 लाख हेक्टयेर बंजर जमीन की पहचान की. अप्रैल 2020 में रक्षा मंत्रालय ने सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पहचान की गई जमीन में से 72,600 हेक्टेयर पर पार्क बनाने की इज़ाज़त दे दी. यह पार्क 2 भाग में होगा. 49,600 हेक्टेयर वाले एक भाग में 24,800 मेगावॉट क्षमता के विंड और सोलर प्लांट होंगे. 23,000 हेक्टेयर वाले दूसरे हिस्से में एक्सक्लूसिव विंड पार्क बनाया जाएगा.
यह प्रोजेक्ट भारत पाकिस्तान-बॉर्डर के कितने पास है?
प्रोजेक्ट का लोकेशन खवड़ा और विघकोट गांव के बीच है. प्रोजेक्ट साइट खवड़ा से करीब 25 किलोमीटर दूर है जो कि आख़िरी पॉइंट है और यहां नागरिक आसानी से पहुंच सकते हैं. एक्सक्लूसिव विंड पार्क इंटरनैशनल बॉर्डर के 1-6 किलोमीटर के दायरे में आएगा. हाइब्रिड पार्क जोन बॉर्डर से 6 किलोमीटर की दूरी पर होगा. इस इलाके में BSF (बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स) के जवान पहले से ही तैनात हैं.
गुजरात सरकार के एनर्जी और पेट्रोकेमिकल डिपार्टमेंट की एडिशनल जनरल सेक्रेटी सुनैना तोमर ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा,
इस जगह को इसलिए चुना गया क्योंकि ये बंजर जमीन है. दूसरी बात ये कि अगर आप बॉर्डर के नज़दीक पवनचक्की लगाते हैं तो वह भी बॉर्डर के रूप में काम करता है.

भारत पाकिस्तान बॉर्डर के नज़दीक खवड़ा गांव. (गूगल मैप्स)
इस पार्क में विंड और सोलर पार्क कौन बनाएगा?
गुजरात सरकार ने इसको लेकर एप्लीकेशन मंगवाए थे और उसके बाद छह कंपनियों को जमीन दी गई है. हाइब्रिड पार्क जोन के लिए अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड को 19,000 हेक्टेयर, सर्जन रियलिटीज़ लिमिटेड को 9,500 हेक्टेयर, एनटीपीसी लिमिटेड को 9,500 हेक्टेयर, गुजरात स्टेट इलेक्ट्रिसिटी कारपोरेशन को 6,650 हेक्टेयर और गुजरात इंडस्ट्रीज़ पावर कंपनी लिमिटेड को 4,750 हेक्टेयर जमीन अलॉट की गई है.
इन कंपनियों की कैपिसिटी क्षमता भी जान लीजिए
अडानी ग्रीन: 9,500 मेगावॉट सर्जन रियलिटीज़ लिमिटेड: 4,750 मेगावॉट गुजरात स्टेट इलेक्ट्रिसिटी कारपोरेशन: 3,325 मेगावॉट गुजरात इंडस्ट्रीज़ पॉवर कंपनी लिमिटेड: 2375 मेगावॉट एनटीपीसी लिमिटेड: 4,750 मेगावॉट
बिडिंग पॉलिसी के तहत 23,000 हेक्टेयर वाले एक्सक्लूसिव विंड जोन पार्क को सोलर एनर्जी कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया को अलॉट किया गया है.
तोमर ने बताया कि चुने गए डेवलपर्स अगले तीन सालों में कुल उत्पादन क्षमता का 50 फीसद डेवलप करना है और पूरे प्रोजेक्ट को पांच साल में पूरा करना है.
जिस इलाके में सुरक्षाबल की मौजूदगी है, वहां कंस्ट्रक्शन का काम कैसे होगा?
राज्य सरकार के अधिकारी ने मामले को लेकर जानकारी दी है कि राज्य लोक निर्माण विभाग द्वारा 18 किलोमीटर की सड़क बनाई जाएगी. ये सड़क इंडिया ब्रिज को बाईपास करके प्रोजेक्ट तक जाएगी. इसके साथ ही मौजूदा सड़क जो इंडिया ब्रिज से विघकोट तक जाती है को मजबूत और चौड़ा किया जा रहा है.
इस प्रोजेक्ट के नज़दीक में कई 'नो गो जोन' होंगे जो कि BSF या सेना से संबंधित हैं.
मौजूदा वक्त में गुजरात सरकार की रिन्यूएबल एनर्जी की क्या कैपिसिटी है?
मौजूदा वक्त में गुजरात की उच्चतम बिजली ज़रूरत 18,000 मेगा वॉट है. राज्य द्वारा स्थापित 30,500 मेगावॉट की बिजली उत्पादन क्षमता में 11,264 मेगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी है. ये करीब 37 फीसद है. इसमें विंड, सोलर, बायोमास और मिनी-हाइड्रो प्रोजेक्ट से बनने वाली बिजली शामिल है.
पिछले 12 साल में गुजरात में रिन्यूएबल एनर्जी की क्षमता में करीब 10 गुना बढ़ोतरी हुई है. 2008 में गुजरात की रिन्यूवल एनर्जी क्षमता सिर्फ 1,170 मेगावॉट थी जो अब 11,264 मेगावॉट तक पहुंच गई है.






















