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बैंकों से इस साल 41 हजार करोड़ रुपए लूटे गए, 2013 से 4 गुना ज्यादा

जानिए, बैंकों ने चार्ज के नाम पर आपके कितने पैसे काटे...

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बैंकों का कर्ज बट्टे खाते में डालने से संकट बढ़ रहा है. सांकेतिक तस्वीर.
हम-आप मजबूर हैं. चुपचाप तमाशा देख रहे. और बैंक हैं कि तरस नहीं खा रहे. मिनिमम बैलेंस के नाम पर वो हम सबकी जेब काट रहे. और खुद बैंक, धोखेबाजों के हाथों लुट रहे हैं. बैंकों का ये निराला खेल है. क्या चल रहा है ये सब. आइए जानते हैं.
कितना पैसा लुटाया बैंकों ने? रिज़र्व बैंक के मुताबिक साल 2017-18 में बैंकों से फ्रॉड करके 41,167.7 करो़ड़ रुपए लूटे गए हैं. गुजरे साल यानी साल 2016-17 में यही रकम 23,933 करोड़ रुपए थी. लूटी गई रकम का आंकड़ा साल भर में 72 फीसदी बढ़ गया है. अगर इनके केस की तादाद के बारे में बात करें, तो इनमें भी बढ़त है. बीते साल बैंकिंग फ्रॉड के 5,076 केस हुए थे. साल 2017-18 में बैंकों के साथ धोखाधड़ी के 5,917 मामले सामने आए. गुजरे चार साल से ये आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं. इसका सीधा मतलब ये है कि बैंकों के साथ फ्रॉड के मसले बढ़ते जा रहे हैं. साल 2013-14 में बैंकों से 10,179 करोड़ रुपए की ठगी हुई थी. इसके मुकाबले 2017-18 में ये आंकड़ा बढ़कर चार गुना हो गया है. साल 2017-18 में 2,059 मामलों में बैंकों के साथ 109.6 करोड़ रुपए का साइबर फ्रॉड हुआ. साल 2016-17 में साइबर फ्रॉड के कुल 1,372 मामले सामने आए थे. इनमें 42.3 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था.
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मोटी रकम लुटाई बैंकों ने? बैंकों के साथ फ्रॉड उन लोगों ने ज्यादा किया, जिन्होंने मोटी रकम लोन के तौर पर ली थी. 50 करोड़ रुपए या इससे ज्यादा लोन लेकर बैंकों के साथ धोखाधड़ी ज्यादा हुई. सरकारी हिस्सेदारी वाले बैंकों में एक लाख रुपए से ज्यादा की धोखाधड़ी के 93 फीसदी मामले हुए. बाकी 6 प्रतिशत मामले निजी बैंकों से जुड़े थे. धोखाधड़ी के मामलों ने बैंकों में बैड लोन यानी एनपीए को बढ़ा दिया है. बैंकों के साथ हो रही इस धोखाधड़ी से मार्च 2018 तक उनका एनपीए यानी नॉन परफॉर्मिंग असेट्स बढ़कर 10,39,700 करोड़ रुपए हो गया है. साल 2017-18 में पंजाब नेशनल बैंक के साथ नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के फ्रॉड का मामला सामने आया. इसके साथ ही धोखाधड़ी के कई दूसरे मामले भी सामने आए. इनकी वजह से एनपीए लगातार बढ़ता जा रहा है.
बैंक ग्राहकों पर लगातार चार्ज लगाते जा रहे हैं. (सांकेतिक फोटोः रॉयटर्स)
बैंक ग्राहकों पर लगातार चार्ज लगाते जा रहे हैं. (सांकेतिक फोटोः रॉयटर्स)

 
बैंकों ने मिनिमम चार्ज में कितने रुपए वसूले? एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी बैंकों ने डिजिटल ट्रांजेक्शन और मिनिमम चार्ज के नाम पर अक्टूबर 2018 तक 10 हजार करोड़ वसूल किए. पिछले करीब 3 साल में सरकारी बैंकों ने आम जनता से ये रकम वसूल की है. साल 2012 तक मंथली एवरेज बैलेंस पर एसबीआई चार्ज वसूल कर रहा था. 31 मार्च 2016 को उसने इसे बंद कर दिया. फिर 1 अप्रैल 2017 से एक्स्ट्रा चार्ज वसूलना शुरू कर दिया. सरकार ने 1 अक्टूबर, 2017 से मिनिमम बैलेंस में रखी जाने वाली रकम को कम कर दिया है. प्राइवेट बैंक अपने बोर्ड के नियमों के मुताबिक ये चार्ज वसूलते हैं. प्राइवेट बैंकों के आंकड़े सामने न आने से रकम का खुलासा नहीं हुआ है. लेकिन ज्यादातर प्राइवेट बैंक मिनिमम बैलेंस पूरा न होने पर पैसा काटते हैं. अनुमान हैं कि प्राइवेट बैंकों का आंकड़ा इससे कई गुना ज्यादा हो सकता है. आरबीआई ने बैंकों को उनके बोर्ड के मुताबिक अलग-अलग सेवाओं पर चार्ज वसूल करने की इजाजत दी है. बैंको को भी निर्देश हैं कि उनके चार्ज वाजिब होने चाहिए. बेसिक सेविंग बैंक अकाउंट्स और जन-धन बैंक अकाउंट में मिनिमम बैलेंस रखने की कोई जरूरत नहीं होती है. महज साढ़े तीन साल में सरकारी बैंक 10 हजार करोड़ रुपए वसूल चुके हैं.


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